
Odisha ओडिशा: सरकार ने सहकारी क्षेत्र को मजबूत करने और किसानों को खेती के मौसम में समय पर उर्वरक उपलब्ध कराने के उद्देश्य से 42 करोड़ रुपये की ब्याज सबवेंशन (Interest Subvention) योजना को मंजूरी दे दी है। इस नई योजना का उद्देश्य प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों (PACS) और बड़े आकार की आदिवासी बहुउद्देशीय सहकारी समितियों (LAMPCS) को वित्तीय सहायता देकर उर्वरकों की अग्रिम खरीद और भंडारण को आसान बनाना है। सरकार का मानना है कि इससे किसानों को समय पर खाद उपलब्ध होगी और कालाबाजारी जैसी समस्याओं पर भी प्रभावी रोक लग सकेगी।
सरकार की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, "फर्टिलाइज़र की प्री-पोजिशनिंग के लिए कैश क्रेडिट लोन पर इंटरेस्ट सबवेंशन" नामक नई राज्य क्षेत्र योजना को वित्त विभाग से मंजूरी मिल चुकी है। इसके बाद इसे मौजूदा वित्तीय वर्ष से लागू करने की स्वीकृति भी प्रदान कर दी गई है। इस प्रस्ताव की सिफारिश सहकारिता विभाग के आयुक्त-सह-सचिव की अध्यक्षता वाली स्टैंडिंग फाइनेंस कमेटी (SFC) ने की थी।
राज्य सरकार का कहना है कि खेती के व्यस्त सीजन से पहले बड़ी मात्रा में उर्वरकों की खरीद और भंडारण करना सहकारी समितियों के लिए एक बड़ी चुनौती होती है। इसके लिए उन्हें बैंकों से कैश क्रेडिट लोन लेना पड़ता है, जिस पर ब्याज का अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ता है। नई योजना के तहत इसी ब्याज भार को कम करने के लिए सरकार ब्याज सबवेंशन उपलब्ध कराएगी, जिससे समितियों की वित्तीय स्थिति मजबूत होगी।
विशेष रूप से PACS और LAMPCS जैसी सहकारी संस्थाएं ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों तक उर्वरकों की आपूर्ति की महत्वपूर्ण कड़ी हैं। ये संस्थाएं खेती के मौसम से कई महीने पहले खाद खरीदकर अपने गोदामों में रखती हैं, ताकि मांग बढ़ने पर किसानों को बिना किसी देरी के उर्वरक उपलब्ध कराया जा सके। हालांकि, अग्रिम खरीद के कारण इन संस्थाओं को ब्याज पर काफी खर्च करना पड़ता है। सरकार की नई योजना इसी समस्या का समाधान करने की दिशा में उठाया गया कदम मानी जा रही है।
सरकार का मानना है कि इस योजना से सहकारी समितियां पर्याप्त मात्रा में उर्वरकों का पहले से भंडारण कर सकेंगी। इससे किसानों को जरूरत के समय खाद की कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा। साथ ही, बाजार में कृत्रिम कमी पैदा कर अधिक कीमत वसूलने या कालाबाजारी करने की संभावनाओं पर भी अंकुश लगाया जा सकेगा।
कृषि क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर उर्वरकों की उपलब्धता फसल उत्पादन के लिए बेहद महत्वपूर्ण होती है। यदि किसानों को बुवाई या फसल की वृद्धि के दौरान समय पर खाद नहीं मिलती, तो इसका सीधा असर उत्पादन और आय पर पड़ता है। ऐसे में सहकारी संस्थाओं को वित्तीय सहायता मिलने से पूरे कृषि तंत्र को लाभ मिल सकता है।
राज्य सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि योजना का उद्देश्य केवल सहकारी संस्थाओं को आर्थिक राहत देना नहीं है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में उर्वरकों की आपूर्ति श्रृंखला को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाना भी है। इससे किसानों को उचित मूल्य पर खाद उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी और निजी बाजार पर निर्भरता भी कम हो सकती है।
सहकारी विभाग के अधिकारियों का मानना है कि ब्याज सबवेंशन योजना लागू होने के बाद अधिक संख्या में सहकारी समितियां उर्वरकों की अग्रिम खरीद करने के लिए आगे आएंगी। इससे वितरण व्यवस्था मजबूत होगी और कृषि सीजन के दौरान किसी प्रकार की आपूर्ति बाधित होने की संभावना भी कम होगी।
ओडिशा सरकार की यह पहल कृषि क्षेत्र को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। सरकार को उम्मीद है कि योजना के प्रभावी क्रियान्वयन से किसानों को समय पर उर्वरक उपलब्ध होंगे, सहकारी संस्थाओं की वित्तीय स्थिति बेहतर होगी और राज्य में कृषि उत्पादन को भी बढ़ावा मिलेगा।





