
Odisha ओडिशा: ओडिशा सरकार राज्य के भीतर और बाहर स्थित भगवान जगन्नाथ से जुड़ी जमीनों को एक नई यूनिफॉर्म सेटलमेंट पॉलिसी के तहत आधिकारिक प्रशासनिक नियंत्रण में लाने की योजना पर काम कर रही है। इस नीति का उद्देश्य मंदिर से जुड़ी अचल संपत्तियों और भूमि संसाधनों का व्यवस्थित सेटलमेंट, संरक्षण और पुनर्प्राप्ति करना बताया जा रहा है।
गुरुवार को इस प्रस्तावित ढांचे पर विस्तृत चर्चा के लिए एक उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई। यह बैठक लॉ मिनिस्टर Prithiviraj Harichandan की अध्यक्षता में लॉ डिपार्टमेंट के कॉन्फ्रेंस हॉल में हुई। बैठक में लॉ कमीशन के चेयरमैन, लॉ डिपार्टमेंट के वरिष्ठ अधिकारी और अन्य शीर्ष प्रशासनिक अधिकारी शामिल हुए।
बैठक में भगवान जगन्नाथ से संबंधित जमीनों के सेटलमेंट और रिकवरी के लिए तैयार किए जा रहे प्रस्तावित फ्रेमवर्क पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। सरकार का मानना है कि लंबे समय से इन संपत्तियों का सही रिकॉर्ड और नियंत्रण व्यवस्थित रूप से नहीं हो पाया है, जिसके कारण कई जगहों पर अतिक्रमण और विवाद की स्थिति बनी हुई है।
लॉ मंत्री ने बैठक में बताया कि सरकार ने भगवान जगन्नाथ से जुड़ी सभी अचल संपत्तियों को वापस लाने और उनके बेहतर प्रबंधन के लिए एक महत्वपूर्ण नीति निर्णय लिया है। इस नीति के माध्यम से उन जमीनों की पहचान की जाएगी, जिन पर अवैध कब्जा है या जिनका रिकॉर्ड स्पष्ट नहीं है।
हालांकि, सरकार ने यह भी संकेत दिया है कि जो लोग लंबे समय से मंदिर की जमीनों पर निवास कर रहे हैं, उनके लिए मानवीय दृष्टिकोण अपनाया जा सकता है। प्रस्तावित नीति के तहत ऐसे लोगों को कुछ शर्तों के साथ सेटलमेंट राइट्स दिए जाने पर विचार किया जा रहा है, ताकि सामाजिक संतुलन भी बना रहे और भूमि विवादों का समाधान भी हो सके।
इस पहल को प्रशासनिक रूप से एक बड़े सुधार के रूप में देखा जा रहा है, जिसका उद्देश्य धार्मिक संपत्तियों के प्रबंधन को पारदर्शी और व्यवस्थित बनाना है। अधिकारियों के अनुसार, इस प्रक्रिया में भूमि रिकॉर्ड का डिजिटलीकरण, सत्यापन और कानूनी समीक्षा भी शामिल होगी।
बैठक में शामिल अधिकारियों ने इस बात पर जोर दिया कि नीति को लागू करते समय कानूनी ढांचे और स्थानीय सामाजिक परिस्थितियों का ध्यान रखा जाएगा। साथ ही यह सुनिश्चित किया जाएगा कि किसी भी वास्तविक निवासी को अनावश्यक परेशानी न हो।
सरकार की इस पहल के बाद ओडिशा में जगन्नाथ मंदिर से जुड़ी भूमि व्यवस्था को लेकर नई बहस शुरू हो गई है, और इसे धार्मिक संपत्तियों के बेहतर प्रबंधन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।





