
Odisha ओडिशा: ओडिशा सरकार ने भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी जीरो-टॉलरेंस नीति को दोहराते हुए बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने भुवनेश्वर के पूर्व एडिशनल तहसीलदार चित्तरंजन पिल्ला को सरकारी सेवा से बर्खास्त कर दिया है। यह कार्रवाई जमीन से जुड़े सरकारी फैसलों में कथित अनियमितताओं के मामलों में की गई है।
मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से शनिवार को जारी आधिकारिक बयान में इसकी पुष्टि की गई। बयान के अनुसार, चित्तरंजन पिल्ला पर उनके कार्यकाल के दौरान भूमि मामलों में लिए गए प्रशासनिक निर्णयों में गंभीर गड़बड़ियों के आरोप थे, जिसके बाद विभागीय जांच कराई गई।
जांच में भूमि से जुड़े कई फैसलों और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में अनियमितताएं सामने आईं। वरिष्ठ राजस्व अधिकारियों द्वारा की गई इस विभागीय जांच में पाया गया कि संबंधित मामलों में नियमों का पालन सही तरीके से नहीं किया गया था और कई निर्णयों में प्रक्रिया संबंधी खामियां थीं।
जानकारी के अनुसार, चित्तरंजन पिल्ला पहले भुवनेश्वर में एडिशनल तहसीलदार के पद पर कार्यरत थे और बाद में उन्हें जगतसिंहपुर जिले में डिप्टी कलेक्टर के रूप में तैनात किया गया था। उनके कार्यकाल के दौरान लिए गए कुछ भूमि संबंधी फैसलों को लेकर शिकायतें सामने आई थीं, जिनके आधार पर जांच शुरू की गई।
जांच रिपोर्ट के आधार पर मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने कार्रवाई को मंजूरी दी और पिल्ला को सरकारी सेवा से हटाने का निर्णय लिया। सरकार ने स्पष्ट किया है कि प्रशासन में पारदर्शिता और जवाबदेही उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है और भ्रष्टाचार के मामलों में किसी भी प्रकार की ढिलाई नहीं बरती जाएगी।
इस कार्रवाई को राज्य सरकार के सख्त रुख के रूप में देखा जा रहा है, जो यह संदेश देती है कि सरकारी तंत्र में किसी भी स्तर पर अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
फिलहाल इस मामले से जुड़े अन्य दस्तावेजों और फैसलों की भी समीक्षा की जा रही है, ताकि पूरे प्रकरण की विस्तृत तस्वीर सामने आ सके।





