
Odisha ओडिशा: स्कूल और जन शिक्षा मंत्री नित्यानंद गोंड ने सोमवार को स्पष्ट किया कि गलतियों से भरी सभी स्कूल पाठ्यपुस्तकों को वापस लेना और उनकी जगह नई किताबें छापना फिलहाल संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि इसके बजाय राज्य सरकार ने निर्णय लिया है कि सभी स्कूलों को पाठ्यपुस्तकों की संशोधित और त्रुटि-सुधारित कॉपी उपलब्ध कराई जाएगी, जिनके आधार पर छात्रों की पढ़ाई जारी रहेगी।
मंत्री ने बताया कि राज्य में उपयोग हो रही पाठ्यपुस्तकों में पाई गई त्रुटियों की जांच के लिए एक उच्च स्तरीय समिति (हाई-लेवल कमिटी) का गठन किया गया था। इस समिति ने अपनी विस्तृत रिपोर्ट और सुझाव सरकार को सौंप दिए हैं, जिसके बाद आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने इस पूरे मामले पर व्यक्तिगत रूप से निगरानी रखी और संबंधित विभाग को तत्काल प्रभाव से सुधारात्मक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि छात्रों की पढ़ाई पर किसी भी प्रकार का नकारात्मक असर न पड़े।
नित्यानंद गोंड के अनुसार, संशोधित पाठ्यपुस्तकों की कॉपी सभी स्कूलों और जिला शिक्षा अधिकारियों (DEOs) को भेजी जाएगी। इन संशोधित दस्तावेजों में उन सभी गलतियों को ठीक किया गया होगा, जो मूल पाठ्यपुस्तकों में पाई गई थीं। छात्र अपनी मौजूदा किताबों के साथ इन सुधारित सामग्री का उपयोग कर अपनी पढ़ाई जारी रखेंगे।
मंत्री ने यह भी बताया कि हाई-लेवल कमिटी द्वारा कुल 14 महत्वपूर्ण सिफारिशें दी गई थीं, जिनके आधार पर सुधार लागू किए जा रहे हैं। इन सिफारिशों का उद्देश्य शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और गुणवत्ता सुधार सुनिश्चित करना है, ताकि भविष्य में ऐसी गलतियां दोबारा न हों।
सरकार ने यह भी निर्णय लिया है कि इन 14 सिफारिशों को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। इसमें पाठ्यपुस्तक निर्माण प्रक्रिया की समीक्षा, लेखन और संपादन प्रणाली में सुधार तथा गुणवत्ता जांच को मजबूत करना शामिल है।
इससे पहले राज्य सरकार ने इस मामले में सख्त कदम उठाते हुए स्टेट काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (SCERT) के चार अधिकारियों को निलंबित कर दिया था। इसके अलावा छह अन्य अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की गई है।
शिक्षा विभाग के अनुसार, यह कदम इसलिए उठाया गया ताकि जिम्मेदारी तय की जा सके और भविष्य में इस तरह की लापरवाही को रोका जा सके। सरकार का मानना है कि पाठ्यपुस्तकें शिक्षा की नींव होती हैं और इनमें किसी भी प्रकार की गलती छात्रों के सीखने की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती है।
मंत्री ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता छात्रों की शिक्षा की गुणवत्ता बनाए रखना है, इसलिए किसी भी प्रकार के भ्रम या असुविधा से बचने के लिए सुधारित कॉपी समय पर सभी स्कूलों तक पहुंचाई जाएंगी।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से भले ही तत्काल समस्या का समाधान हो जाएगा, लेकिन लंबे समय में पाठ्यपुस्तक निर्माण प्रक्रिया में सुधार और निगरानी प्रणाली को और मजबूत करना जरूरी है।
फिलहाल राज्य सरकार इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए सुधार प्रक्रिया पर तेजी से काम कर रही है, ताकि शैक्षणिक सत्र प्रभावित न हो और छात्रों की पढ़ाई सुचारू रूप से जारी रह सके।





