
Odisha ओडिशा: ओडिशा सरकार ने एक अहम फैसला लेते हुए अपने सभी सरकारी संस्थानों और कंपनियों के लिए 1 जून 2026 से सिर्फ़ इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) को किराए पर लेना अनिवार्य कर दिया है। यह निर्णय राज्य के खजाने पर बढ़ते फ़्यूल खर्च और ऊर्जा संकट के समय में पर्यावरण अनुकूल विकल्प अपनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
गुरुवार को जारी किए गए सर्कुलर में फ़ाइनेंस डिपार्टमेंट ने स्पष्ट किया कि यह कदम विशेष रूप से पश्चिम एशिया संकट के कारण उत्पन्न हुई ऊर्जा और ईंधन चुनौतियों को देखते हुए उठाया गया है। सर्कुलर में कहा गया है कि सभी सरकारी संस्थान और कंपनियां अब पारंपरिक डीज़ल और पेट्रोल वाहनों के बजाय इलेक्ट्रिक वाहन ही किराए पर लेंगी।
सर्कुलर में विभिन्न श्रेणियों के सरकारी कर्मचारियों के लिए मासिक हायरिंग चार्ज भी निर्धारित किया गया है। हालांकि, इस हायरिंग चार्ज में इलेक्ट्रिक वाहनों को चार्ज करने का खर्च शामिल नहीं है। इलेक्ट्रिक वाहनों की चार्जिंग के लिए सेवा प्रदाता को अलग से ₹2 प्रति किलोमीटर का भुगतान किया जाएगा। वहीं, यदि राज्य सीधे चार्जिंग का खर्च उठाता है, तो सर्विस प्रोवाइडर को किसी अतिरिक्त भुगतान की आवश्यकता नहीं होगी।
फ़ाइनेंस डिपार्टमेंट ने यह भी स्पष्ट किया कि इलेक्ट्रिक वाहनों की किराया सुविधा ओडिशा रिन्यूएबल एनर्जी डेवलपमेंट एजेंसी (OREDA) के माध्यम से उपलब्ध कराई जाएगी। OREDA के पास वर्तमान में 300 इलेक्ट्रिक वाहन उपलब्ध हैं, जिन्हें राज्य के विभिन्न सरकारी विभागों और संस्थानों में किराए पर दिया जाएगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस कदम से न केवल राज्य सरकार का ईंधन खर्च कम होगा, बल्कि पर्यावरणीय प्रभाव को भी कम करने में मदद मिलेगी। इलेक्ट्रिक वाहनों के इस्तेमाल से कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी और ओडिशा की सस्टेनेबल और ग्रीन एनर्जी नीतियों को मजबूती मिलेगी।
सरकारी अधिकारियों का कहना है कि इस नई नीति के लागू होने के बाद सभी विभागों और कंपनियों को पारंपरिक वाहनों से इलेक्ट्रिक वाहनों में संक्रमण करने में आसानी होगी। साथ ही, यह नीति राज्य के सार्वजनिक वाहनों के पूरे नेटवर्क को धीरे-धीरे इलेक्ट्रिक वाहन आधारित बनाने की दिशा में भी पहला कदम है।
OREDA की ओर से इस योजना के तहत इलेक्ट्रिक वाहनों की आपूर्ति और मेंटेनेंस सुनिश्चित की जाएगी। एजेंसी वाहन चार्जिंग, बैटरी लाइफ और नियमित सर्विस का भी ध्यान रखेगी। इसके अलावा, OREDA को वाहन वितरण और किराए के प्रबंधन में पारदर्शिता और दक्षता बनाए रखने के लिए निर्देशित किया गया है।
इस नीति को राज्य सरकार की स्थायी ऊर्जा नीति और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के विज़न के हिस्से के रूप में देखा जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि भविष्य में और अधिक इलेक्ट्रिक वाहनों को शामिल किया जाएगा, ताकि सरकारी बेड़े को पूरी तरह से इलेक्ट्रिक वाहन आधारित बनाया जा सके।
समग्र रूप से देखा जाए तो ओडिशा सरकार का यह कदम न केवल ऊर्जा और ईंधन बचत के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और ग्रीन टेक्नोलॉजी के प्रचार-प्रसार में भी एक मील का पत्थर साबित होगा।





