
Odisha ओडिशा: ओडिशा सरकार ने संबलपुर जिले में आयोजित होने वाले प्रसिद्ध सीतल षष्ठी महोत्सव के लिए 1.08 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता देने का ऐलान किया है। यह फैसला राज्य की सांस्कृतिक परंपराओं को बढ़ावा देने और स्थानीय त्योहारों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से लिया गया है।
सरकारी जानकारी के अनुसार मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी के निर्देश पर ओडिया भाषा, साहित्य और संस्कृति विभाग को इस आयोजन के लिए वित्तीय सहायता जारी करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। यह सहायता राशि संबलपुर में आयोजित होने वाले सीतल षष्ठी महोत्सव के विभिन्न आयोजनों पर खर्च की जाएगी।
इस वर्ष संबलपुर में कुल 21 अलग-अलग त्योहार समितियों को इस राशि से लाभ मिलेगा, जो अपने-अपने स्तर पर सीतल षष्ठी के कार्यक्रमों का आयोजन करेंगी। इससे त्योहार के आयोजन को और अधिक भव्य और सुव्यवस्थित बनाने में मदद मिलेगी।
सीतल षष्ठी महोत्सव ओडिशा की समृद्ध सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। यह पर्व भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है और हर वर्ष संबलपुर में बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ आयोजित किया जाता है।
राज्य के संस्कृति मंत्री सूर्यवंशी सूरज ने इस अवसर पर कहा कि सीतल षष्ठी केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं है, बल्कि यह ओडिशा की सांस्कृतिक विरासत, परंपराओं और आध्यात्मिक मूल्यों का जीवंत प्रदर्शन है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ऐसी परंपराओं को संरक्षित और प्रोत्साहित करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।
मंत्री ने यह भी कहा कि इस प्रकार की वित्तीय सहायता से त्योहार के आयोजन को और अधिक भव्य बनाया जा सकेगा, जिससे न केवल स्थानीय लोगों की भागीदारी बढ़ेगी, बल्कि यह आयोजन राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ओडिशा की सांस्कृतिक पहचान को भी मजबूत करेगा।
सरकार का मानना है कि पारंपरिक त्योहारों को समर्थन देने से न केवल सांस्कृतिक धरोहर सुरक्षित रहती है, बल्कि इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था और पर्यटन को भी बढ़ावा मिलता है। सीतल षष्ठी जैसे आयोजन क्षेत्रीय कला, संगीत और परंपराओं को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
अधिकारियों के अनुसार, इस वित्तीय सहायता से त्योहार समितियों को सजावट, आयोजन, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और अन्य व्यवस्थाओं में मदद मिलेगी, जिससे पूरे आयोजन को और भव्य स्वरूप दिया जा सकेगा।
राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में भी ऐसे सांस्कृतिक आयोजनों को समर्थन जारी रहेगा, ताकि ओडिशा की समृद्ध परंपराएं आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित और जीवंत बनी रहें।





