
Odisha ओडिशा: मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने शुक्रवार को भुवनेश्वर में ‘गो ईस्ट’ प्लेटफॉर्म की शुरुआत की। यह एक महत्वपूर्ण पहल है जिसका उद्देश्य पूर्वी भारत में औद्योगीकरण की गति को तेज करना और राज्य को एक प्रमुख औद्योगिक केंद्र के रूप में विकसित करना है। इस अवसर पर राज्य की औद्योगिक नीति प्रस्ताव (IPR)-2022 में भी संतुलित क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा देने के लिए आवश्यक बदलावों की घोषणा की गई।
मुख्यमंत्री ने यह घोषणा CII ईस्टर्न रीजनल काउंसिल मीटिंग 2026 को संबोधित करते हुए की। उन्होंने कहा कि ओडिशा अगले पांच वर्षों में पूर्वी भारत का प्रमुख औद्योगिक गंतव्य बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने निवेश आकर्षित करने और परियोजनाओं के त्वरित क्रियान्वयन के लिए राज्य सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया।
नई शुरू की गई ‘गो ईस्ट’ पहल का पूरा नाम “ओडिशा सरकार – ईस्टर्न इन्वेस्टमेंट एक्सेलेरेटर और स्पेशल टास्क फोर्स” बताया गया है। यह एक समर्पित तंत्र है, जिसका उद्देश्य पूर्वी और पूर्वोत्तर राज्यों से निवेश आकर्षित करना है। इस प्लेटफॉर्म के तहत नीति समर्थन, सुविधा व्यवस्था और परियोजनाओं के तेज कार्यान्वयन की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।
मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने कहा कि इस पहल से उद्योगों को अपने मौजूदा उत्पादन आधार और बाजार को अपने गृह राज्यों में बनाए रखने में मदद मिलेगी, जबकि उन्हें ओडिशा में अपने संचालन का विस्तार करने के लिए भी प्रोत्साहन मिलेगा। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य निवेशकों के लिए अनुकूल और भरोसेमंद वातावरण तैयार करना है, जिससे राज्य में औद्योगिक गतिविधियों को नई दिशा मिल सके।
सरकार ने इस पहल को प्रभावी रूप से लागू करने के लिए कई संस्थागत और डिजिटल व्यवस्थाएं भी शुरू करने की घोषणा की है। इसके तहत निवेश प्रस्तावों को तेजी से आगे बढ़ाने के लिए एक विशेष टास्क फोर्स का गठन किया जाएगा। यह टास्क फोर्स परियोजनाओं की निगरानी और समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित करेगी।
इसके अलावा ओडिशा इंडस्ट्रियल प्रमोशन एंड इन्वेस्टमेंट कॉरपोरेशन (IPICOL) के अंतर्गत एक समर्पित ‘गो ईस्ट सेल’ स्थापित किया जाएगा। यह सेल निवेशकों को एकल खिड़की सुविधा प्रदान करेगा और सभी आवश्यक मंजूरियों की प्रक्रिया को सरल और तेज बनाएगा।
सरकार ने एक नए डिजिटल मॉड्यूल ‘गो स्विफ्ट’ की भी शुरुआत करने की योजना बनाई है, जो निवेश अनुमोदन की रियल-टाइम निगरानी और ट्रैकिंग की सुविधा देगा। इस डिजिटल सिस्टम के माध्यम से निवेश प्रस्तावों की स्थिति की लगातार समीक्षा की जा सकेगी, जिससे पारदर्शिता और दक्षता में वृद्धि होगी।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि ओडिशा सरकार निवेश प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और तेज बनाने के लिए लगातार सुधार कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य में औद्योगिक नीति में किए गए संशोधन संतुलित क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा देंगे, जिससे केवल बड़े शहर ही नहीं बल्कि दूरदराज के क्षेत्र भी विकास की मुख्यधारा में शामिल हो सकेंगे।
उन्होंने यह विश्वास भी जताया कि आने वाले वर्षों में ओडिशा न केवल पूर्वी भारत बल्कि पूरे देश में एक प्रमुख औद्योगिक केंद्र के रूप में उभरेगा। सरकार का फोकस बुनियादी ढांचे के विकास, निवेश आकर्षण और रोजगार सृजन पर केंद्रित रहेगा।
उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने भी इस पहल का स्वागत किया है और इसे निवेश के लिए एक सकारात्मक कदम बताया है। उनका मानना है कि ‘गो ईस्ट’ जैसे प्लेटफॉर्म से क्षेत्रीय सहयोग बढ़ेगा और उद्योगों को विस्तार के नए अवसर मिलेंगे।
फिलहाल राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि सभी नई नीतियों का उद्देश्य निवेशकों को बेहतर सुविधा देना और औद्योगिक विकास को गति देना है। आने वाले समय में इस पहल के तहत कई और सुधारात्मक कदम उठाए जाने की संभावना है, जिससे ओडिशा की औद्योगिक पहचान को और मजबूत किया जा सकेगा।





