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Odisha : जलाशयों पर बनेगी फ्लोटिंग सोलर परियोजनाएं, छह जगहों का चयन

Kavita2
14 July 2026 9:36 AM IST
Odisha : जलाशयों पर बनेगी फ्लोटिंग सोलर परियोजनाएं, छह जगहों का चयन
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भुवनेश्वर : ओडिशा सरकार राज्य में नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए जलाशयों की जल सतहों का उपयोग कर सौर ऊर्जा उत्पादन की योजना पर तेजी से काम कर रही है। इसके तहत राज्य में फ्लोटिंग सोलर परियोजनाएं स्थापित करने की तैयारी शुरू कर दी गई है। शुरुआती चरण में सरकार ने संभावित परियोजनाओं के लिए छह प्रमुख जलाशयों की पहचान की है। इनमें से दो जलाशयों को अंतिम रूप देकर वहां सौर ऊर्जा परियोजना स्थापित करने की योजना बनाई जा रही है।

फ्लोटिंग सोलर परियोजना के तहत जलाशयों की सतह पर सौर पैनल लगाए जाते हैं, जिससे जमीन की आवश्यकता कम होती है और पानी के बड़े हिस्से का उपयोग ऊर्जा उत्पादन के लिए किया जा सकता है। सरकार का उद्देश्य स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ उपलब्ध जल संसाधनों का बेहतर उपयोग करना है।

राज्य सरकार द्वारा चुने गए छह जलाशयों में गजपति जिले का हरभंगी जलाशय, गंजाम जिले का सोरदा जलाशय, ढेंकनाल जिले का रामियाल जलाशय, अंगुल जिले का डेरजंग जलाशय, बारगढ़ जिले का झरबंधा जलाशय और देवगढ़ जिले का गोहिरा जलाशय शामिल हैं।

जल संसाधन विभाग के मुख्य अभियंता कार्यालय के अनुसार, इन सभी संभावित स्थलों का विस्तृत निरीक्षण किया जाएगा। इसके लिए अधिकारियों और विशेषज्ञों की टीम 17 जुलाई से 22 जुलाई के बीच संबंधित जलाशयों का दौरा करेगी। निरीक्षण के दौरान परियोजना की तकनीकी और व्यावहारिक संभावनाओं का मूल्यांकन किया जाएगा।

अधिकारियों के अनुसार, टीम इन जलाशयों पर उपलब्ध बुनियादी ढांचे, पहुंच व्यवस्था, निर्माण संबंधी सुविधाओं और अन्य जरूरी पहलुओं का अध्ययन करेगी। इसके अलावा स्थानीय हितधारकों के साथ भी चर्चा की जाएगी, ताकि परियोजना को लागू करने में आने वाली संभावित चुनौतियों और आवश्यकताओं को समझा जा सके।

फ्लोटिंग सोलर परियोजनाओं के लिए सबसे महत्वपूर्ण पहलुओं में से एक बिजली का ट्रांसमिशन है। इसके लिए टीम आसपास मौजूद ओडिशा पावर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन लिमिटेड (OPTCL) के सबस्टेशनों का भी दौरा करेगी। यहां से बिजली ट्रांसमिशन की क्षमता, ग्रिड से जुड़ने की संभावनाओं और तकनीकी आवश्यकताओं से जुड़ी जानकारी जुटाई जाएगी।

निरीक्षण के बाद टीम प्रत्येक जलाशय की विस्तृत रिपोर्ट तैयार करेगी। इस रिपोर्ट में जलाशय की क्षमता, सौर ऊर्जा उत्पादन की संभावना, तकनीकी सुविधाएं, बिजली ट्रांसमिशन व्यवस्था और परियोजना की व्यवहार्यता से जुड़े सभी पहलुओं को शामिल किया जाएगा।

यह रिपोर्ट आगामी राज्य जलाशय समिति की बैठक में प्रस्तुत की जाएगी। समिति रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद यह तय करेगी कि किन दो जलाशयों को फ्लोटिंग सोलर परियोजना के लिए अंतिम रूप दिया जाए।

ओडिशा सरकार का यह कदम राज्य में हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए सरकार सौर ऊर्जा समेत अन्य नवीकरणीय स्रोतों पर लगातार ध्यान दे रही है।

विशेषज्ञों के अनुसार, फ्लोटिंग सोलर परियोजनाओं के कई फायदे हैं। इससे बड़े भू-भाग की आवश्यकता नहीं होती और जलाशयों की खाली सतह का उपयोग ऊर्जा उत्पादन के लिए किया जा सकता है। इसके अलावा जलाशयों की सतह पर सौर पैनल लगाने से पानी के वाष्पीकरण को कम करने में भी मदद मिल सकती है।

हालांकि, ऐसी परियोजनाओं को शुरू करने से पहले पर्यावरणीय प्रभावों का अध्ययन करना जरूरी होता है। जलाशयों में रहने वाले जीव-जंतुओं, पानी की गुणवत्ता और स्थानीय उपयोग पर पड़ने वाले प्रभावों को ध्यान में रखना होगा।

राज्य सरकार की योजना है कि तकनीकी और पर्यावरणीय मानकों को पूरा करते हुए इन परियोजनाओं को आगे बढ़ाया जाए। यदि चयनित जलाशयों पर फ्लोटिंग सोलर परियोजनाएं सफल रहती हैं, तो भविष्य में राज्य के अन्य जलाशयों में भी ऐसी योजनाओं का विस्तार किया जा सकता है।

फिलहाल छह जलाशयों के निरीक्षण की प्रक्रिया शुरू होने वाली है। इसके बाद विशेषज्ञों की रिपोर्ट और राज्य जलाशय समिति के निर्णय के आधार पर परियोजना के अगले चरण की दिशा तय होगी। ओडिशा सरकार का यह प्रयास राज्य को स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन के क्षेत्र में आगे बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

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