ओडिशा

Odisha : किसान प्रमोद पुरोहित की आम की खेती बनी सफलता की कहानी

Kavita2
28 May 2026 3:33 PM IST
Odisha : किसान प्रमोद पुरोहित की आम की खेती बनी सफलता की कहानी
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Odisha ओडिशा: ओडिशा के सुंदरगढ़ जिला के कुटरा ब्लॉक स्थित पंचरा गांव के किसान प्रमोद पुरोहित ने आम की खेती के जरिए अपनी एक अलग पहचान बनाई है। कड़ी मेहनत और मजबूत इच्छाशक्ति के बल पर उन्होंने लगभग तीन एकड़ भूमि पर ‘तृप्ति ऑर्चर्ड फार्म हाउस’ नाम से एक सफल आम का बाग विकसित किया है।

प्रमोद पुरोहित ने करीब पांच साल पहले छोटे स्तर पर खेती की शुरुआत की थी, लेकिन धीरे-धीरे इसे एक व्यवस्थित और लाभदायक उद्यम में बदल दिया। आज उनका यह बाग न केवल उनकी आय का मुख्य स्रोत बन चुका है, बल्कि क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणा बन रहा है।

वर्तमान में इस बाग में लगभग 300 आम के पेड़ हैं, जिनमें कई लोकप्रिय और उच्च गुणवत्ता वाली किस्में शामिल हैं। इनमें बॉम्बे पिंक, नीलम, केसर, लंगड़ा, दशहरी और आम्रपाली जैसी प्रचलित किस्में प्रमुख हैं। इन किस्मों की बाजार में अच्छी मांग होने के कारण किसानों को बेहतर कीमत मिल रही है और उत्पादन से स्थिर मुनाफा प्राप्त हो रहा है।

प्रमोद पुरोहित का कहना है कि शुरूआती वर्षों में उन्हें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा, जिनमें पौधों की देखभाल, सिंचाई व्यवस्था और कीट नियंत्रण प्रमुख थे। लेकिन समय के साथ उन्होंने आधुनिक कृषि तकनीकों और वैज्ञानिक तरीकों को अपनाकर अपने बाग को विकसित किया।

‘तृप्ति ऑर्चर्ड फार्म हाउस’ अब एक संगठित फल उत्पादन केंद्र के रूप में उभर चुका है, जहां नियमित देखभाल और उचित प्रबंधन के कारण उत्पादन की गुणवत्ता में लगातार सुधार हुआ है। किसान का मानना है कि अगर सही योजना और मेहनत के साथ खेती की जाए तो पारंपरिक खेती के मुकाबले बागवानी अधिक लाभदायक साबित हो सकती है।

स्थानीय स्तर पर भी प्रमोद पुरोहित की सफलता की चर्चा हो रही है। आसपास के किसान उनके बाग का दौरा कर आधुनिक बागवानी तकनीकों को समझने की कोशिश कर रहे हैं। कई किसान उनसे प्रेरणा लेकर आम की खेती की ओर रुख कर रहे हैं।

कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की बागवानी खेती ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा सकती है। कम जमीन में भी बेहतर उत्पादन और अधिक मुनाफा संभव है, बशर्ते वैज्ञानिक तरीकों को अपनाया जाए।

फिलहाल प्रमोद पुरोहित अपने बाग के विस्तार की योजना पर भी काम कर रहे हैं और आने वाले समय में उत्पादन बढ़ाने के लिए नई किस्मों को शामिल करने की तैयारी कर रहे हैं।

यह सफलता की कहानी दिखाती है कि अगर किसान मेहनत, धैर्य और सही तकनीक का उपयोग करें, तो पारंपरिक खेती को भी एक लाभकारी व्यवसाय में बदला जा सकता है।

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