
Odisha ओडिशा: बहुचर्चित बालिअंटा मामले में मॉब लिंचिंग से जुड़े आरोप न लगाए जाने को लेकर उठ रहे सवालों पर क्राइम ब्रांच ने सोमवार को स्थिति स्पष्ट की है। इस मामले में सरकारी रेलवे पुलिस (GRP) के एक कांस्टेबल की मौत हुई थी, जिसे कथित तौर पर रेप की कोशिश के आरोप के बाद स्थानीय लोगों ने पीटकर मार दिया था।
ओडिशा क्राइम ब्रांच के डायरेक्टर जनरल विनयतोष मिश्रा ने बताया कि मामले की जांच अभी शुरुआती चरण में है और अब तक मिले सबूत भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत मॉब लिंचिंग की धाराओं को जोड़ने के लिए पर्याप्त नहीं हैं।
उन्होंने कहा कि BNS के अनुसार मॉब लिंचिंग तब मानी जाती है जब पांच या उससे अधिक लोगों द्वारा किसी व्यक्ति पर जाति, धर्म, लिंग, भाषा, जन्म स्थान या व्यक्तिगत विश्वास जैसे आधारों पर हमला किया जाता है। लेकिन इस मामले में अब तक जांच या एफआईआर में ऐसा कोई स्पष्ट मकसद सामने नहीं आया है।
मिश्रा के अनुसार, प्रारंभिक जांच में जो तथ्य सामने आए हैं, वे मॉब लिंचिंग की कानूनी परिभाषा को सीधे तौर पर सपोर्ट नहीं करते। इसी कारण फिलहाल इस मामले में संबंधित धाराएं नहीं जोड़ी गई हैं।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जांच अभी जारी है और जैसे-जैसे नए सबूत सामने आएंगे, मामले की कानूनी दिशा बदल सकती है। यदि भविष्य में यह साबित होता है कि घटना किसी विशेष आधार या सामूहिक उद्देश्य से की गई थी, तो मॉब लिंचिंग से संबंधित धाराएं जोड़ी जा सकती हैं।
इस घटना ने राज्य में कानून व्यवस्था और भीड़ द्वारा हिंसा की घटनाओं को लेकर गंभीर बहस छेड़ दी है। मृतक कांस्टेबल के परिजनों ने भी मामले में सख्त कार्रवाई की मांग की है।
क्राइम ब्रांच ने भरोसा दिलाया है कि पूरे मामले की निष्पक्ष और विस्तृत जांच की जा रही है और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
फिलहाल पुलिस टीम घटनास्थल के आसपास के लोगों से पूछताछ कर रही है और सीसीटीवी फुटेज समेत अन्य तकनीकी सबूतों की भी जांच की जा रही है।





