ओडिशा

Odisha : वर्ल्ड एनवायरनमेंट डे पर भुवनेश्वर में पेड़ों की कटाई को लेकर चिंता

Kavita2
5 Jun 2026 9:42 AM IST
Odisha : वर्ल्ड एनवायरनमेंट डे पर भुवनेश्वर में पेड़ों की कटाई को लेकर चिंता
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Odisha ओडिशा: आज पूरे देश में वर्ल्ड एनवायरनमेंट डे मनाया जा रहा है, जिसमें पर्यावरण संरक्षण, पेड़ लगाने और हरियाली बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। लेकिन इसी बीच ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई को लेकर पर्यावरणविदों और स्थानीय लोगों में गंभीर चिंता जताई जा रही है।

गुरुवार को यूनिट-9 इलाके में आनंद बाजार के पास पेड़ों की कटाई के नए मामले सामने आए, जिससे स्थानीय लोगों में नाराजगी देखने को मिली। पिछले कुछ वर्षों में शहर के कई हिस्सों में इसी तरह की घटनाएं लगातार बढ़ी हैं। इनमें नीलाद्री विहार, पोखरीपुट, सलिया साही, ओल्ड टाउन और यूनिट-4 का MLA क्वार्टर्स क्षेत्र शामिल है, जहां विकास परियोजनाओं के नाम पर बड़ी संख्या में पेड़ काटे गए हैं।

पर्यावरण विभाग, वन विभाग और जलवायु परिवर्तन विभाग जहां एक ओर वृक्षारोपण को बढ़ावा देने और हरियाली बढ़ाने के प्रयास कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर जमीनी स्तर पर पेड़ों की कटाई की गति तेजी से बढ़ती जा रही है। पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि राजधानी में पेड़ों की कटाई की दर, उनके बदले लगाए जा रहे पौधों की संख्या से कहीं अधिक है, जिससे पर्यावरण संतुलन पर गंभीर असर पड़ रहा है।

पिछले दस वर्षों में सड़क चौड़ीकरण, शहरी विकास और विभिन्न निर्माण परियोजनाओं के लिए हजारों पेड़ काटे जा चुके हैं। इनमें न केवल पुराने और विशाल बरगद जैसे पेड़ शामिल हैं, बल्कि हाल ही में लगाए गए पौधों को भी हटाया गया है। इससे शहर की हरियाली तेजी से कम होती जा रही है और शहरी पर्यावरण पर दबाव बढ़ रहा है।

नियमों के अनुसार, विकास कार्यों के लिए यदि एक पेड़ काटा जाता है तो उसके बदले दस पौधे लगाने का प्रावधान है। इसके लिए संबंधित एजेंसियों को वन विभाग में क्षतिपूर्ति वनीकरण (Compensatory Afforestation) के तहत फंड भी जमा करना होता है। हालांकि, पर्यावरणविदों का कहना है कि केवल नियम बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके सख्त क्रियान्वयन की जरूरत है।

विशेषज्ञों के अनुसार, कई मामलों में लगाए गए पौधों की सही देखभाल नहीं होने के कारण वे पेड़ बनने से पहले ही नष्ट हो जाते हैं। इससे क्षतिपूर्ति वनीकरण का वास्तविक लाभ नहीं मिल पाता और हरियाली का नुकसान लगातार बढ़ता जाता है।

स्थानीय पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि शहर में विकास कार्यों के नाम पर पर्यावरण को नजरअंदाज किया जा रहा है। उनका कहना है कि यदि इसी तरह पेड़ों की कटाई जारी रही तो आने वाले वर्षों में भुवनेश्वर में प्रदूषण और तापमान दोनों में बढ़ोतरी होगी।

वर्ल्ड एनवायरनमेंट डे के मौके पर इस मुद्दे ने एक बार फिर ध्यान आकर्षित किया है। पर्यावरणविदों ने प्रशासन से मांग की है कि पेड़ों की कटाई पर सख्त नियंत्रण लगाया जाए और हर परियोजना में पर्यावरण संतुलन को प्राथमिकता दी जाए।

समग्र रूप से देखा जाए तो जहां एक तरफ पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ भुवनेश्वर में लगातार हो रही पेड़ों की कटाई इस संदेश पर सवाल खड़े कर रही है और यह स्थिति चिंता का विषय बनी हुई है।

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