
Odisha ओडिशा: सरकार ने राज्य में स्वच्छ ऊर्जा ढांचे को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में ओडिशा सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (CGD) नीति को मंजूरी दे दी गई है। इस नीति का उद्देश्य राज्य में PNG और CNG इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार को तेज करना और स्वच्छ ईंधन के उपयोग को बढ़ावा देना है।
Odisha सरकार के अनुसार, यह नई नीति मौजूदा कई प्रशासनिक चुनौतियों को दूर करेगी, जिनमें अलग-अलग एजेंसियों से मंजूरी लेना और एक समान ढांचा न होने जैसी समस्याएं शामिल हैं। अब एक सरल और एकीकृत प्रक्रिया के माध्यम से परियोजनाओं को तेजी से लागू किया जा सकेगा।
मुख्य सचिव अनु गर्ग ने जानकारी दी कि इस नीति का प्रमुख उद्देश्य PNG (पाइप्ड नेचुरल गैस) और CNG (कंप्रेस्ड नेचुरल गैस) के लिए एक स्पष्ट और प्रभावी ढांचा तैयार करना है। इसके तहत मंजूरी प्रक्रिया को सरल बनाया जाएगा और स्वच्छ ईंधन को तेजी से अपनाने पर जोर दिया जाएगा।
उन्होंने बताया कि यह नीति CGD परियोजनाओं को समय पर पूरा करने में मदद करेगी और गैस आपूर्ति प्रणाली को सुरक्षित, भरोसेमंद और कुशल बनाए रखेगी। इसके साथ ही एसेट मैनेजमेंट को बेहतर बनाकर पूरे नेटवर्क की कार्यक्षमता बढ़ाने पर भी ध्यान दिया जाएगा।
नई नीति के तहत स्वच्छ भारत मिशन के लक्ष्यों के अनुरूप कंप्रेस्ड बायो गैस (CBG) प्लांट्स के विकास को भी बढ़ावा दिया जाएगा। इससे न केवल पर्यावरण संरक्षण को बल मिलेगा, बल्कि ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों को भी बढ़ावा मिलेगा।
सरकार ने इस नीति के कार्यान्वयन के लिए एक मजबूत प्रशासनिक ढांचा भी तैयार किया है। इसके तहत हाउसिंग एंड अर्बन डेवलपमेंट विभाग को नोडल एजेंसी के रूप में नियुक्त किया गया है। यह विभाग पूरी योजना के क्रियान्वयन और निगरानी की जिम्मेदारी संभालेगा।
इसके अलावा, राज्य स्तर पर एक हाई-पावर्ड कमेटी और जिला स्तर पर मॉनिटरिंग कमेटी का गठन किया जाएगा, जो परियोजनाओं की प्रगति पर नजर रखेगी और समय-समय पर समीक्षा करेगी।
राज्य सरकार का मानना है कि इस नीति से न केवल गैस आधारित इंफ्रास्ट्रक्चर को गति मिलेगी, बल्कि शहरों में स्वच्छ और सस्ती ऊर्जा की उपलब्धता भी बढ़ेगी। इससे प्रदूषण में कमी आएगी और आम जनता को बेहतर ईंधन विकल्प मिलेंगे।
कैबिनेट द्वारा मंजूर यह नीति ओडिशा को स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में आगे ले जाने वाला एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जो आने वाले वर्षों में राज्य के ऊर्जा क्षेत्र में बड़े बदलाव ला सकती है।





