
Odisha ओडिशा: ओडिशा की सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने एक महत्वपूर्ण राजनीतिक फैसला लेते हुए पूर्व लोकसभा सांसद ऐरा खरबेला स्वैन का निलंबन रद्द कर दिया है। यह जानकारी पार्टी की अनुशासन समिति के संयोजक सुदर्शन नायक ने दी। उन्होंने बयान जारी करते हुए कहा कि पार्टी ने वरिष्ठ नेता ऐरा खरबेला स्वैन पर लिया गया निलंबन समाप्त करने का निर्णय लिया है।
ऐरा खरबेला स्वैन ओडिशा के बालासोर लोकसभा क्षेत्र से तीन बार सांसद रह चुके हैं। वे वर्ष 1998, 1999 और 2004 में भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर चुनाव जीतकर संसद पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने पार्टी संगठन में एक मजबूत स्थान बनाया था।
हालांकि, वर्ष 2009 में उन्होंने भारतीय जनता पार्टी छोड़ दी थी और इसके बाद राज्य में एक नई राजनीतिक पार्टी का गठन किया था। कुछ वर्षों तक अलग राह पर चलने के बाद स्वैन ने 2019 में फिर से भाजपा में वापसी की और कंधमाल लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा, लेकिन उन्हें इस चुनाव में हार का सामना करना पड़ा था।
पार्टी सूत्रों के अनुसार, वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान स्वैन ने बालासोर सीट से भाजपा का टिकट मांगा था। लेकिन पार्टी द्वारा टिकट नहीं दिए जाने पर उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ने का फैसला किया। इसी निर्णय को अनुशासनहीनता मानते हुए भाजपा ने उन्हें पार्टी से निलंबित कर दिया था।
अब, लंबे समय बाद पार्टी ने उनका निलंबन रद्द कर दिया है, जिसे ओडिशा की राजनीति में एक अहम घटनाक्रम माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम आगामी राजनीतिक रणनीतियों और संगठनात्मक संतुलन को ध्यान में रखते हुए उठाया गया हो सकता है।
सुदर्शन नायक के बयान के बाद यह स्पष्ट हुआ है कि पार्टी नेतृत्व ने पुराने मतभेदों को पीछे छोड़ते हुए संगठन को मजबूत करने की दिशा में कदम उठाया है। हालांकि, अभी यह साफ नहीं है कि ऐरा खरबेला स्वैन की पार्टी में सक्रिय भूमिका क्या होगी और उन्हें किसी संगठनात्मक या चुनावी जिम्मेदारी में शामिल किया जाएगा या नहीं।
स्वैन की राजनीतिक यात्रा लंबे समय से उतार-चढ़ाव भरी रही है। भाजपा में तीन बार सांसद बनने के बाद पार्टी छोड़ने, फिर वापसी और बाद में अनुशासनात्मक कार्रवाई तक का उनका सफर ओडिशा की राजनीति में चर्चा का विषय रहा है।
पार्टी के इस फैसले के बाद ओडिशा की राजनीतिक हलचल तेज हो गई है और माना जा रहा है कि आने वाले समय में यह निर्णय राज्य की राजनीति और भाजपा की रणनीति पर असर डाल सकता है।
फिलहाल पार्टी और स्वैन दोनों की ओर से आगे की भूमिका को लेकर कोई विस्तृत घोषणा नहीं की गई है, लेकिन निलंबन रद्द होने के बाद उनके दोबारा सक्रिय राजनीति में शामिल होने की संभावनाएं बढ़ गई हैं।





