
Odisha ओडिशा: ओडिशा के पुलिस डायरेक्टर जनरल (DGP) वाई.बी. खुरानिया ने राज्य स्तरीय मल्टी-एजेंसी कोस्टल सिक्योरिटी सेमिनार का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि पूरे दिन चली वर्कशॉप में हुई चर्चाओं से ओडिशा के तटीय सुरक्षा ढांचे को और मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण सुझाव और उपयोगी जानकारी प्राप्त होगी।
यह एक दिवसीय वर्कशॉप राज्य की समुद्री और तटीय सुरक्षा को लेकर विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय को बढ़ाने के उद्देश्य से आयोजित की गई थी। कार्यक्रम में कुल 18 एजेंसियों ने भाग लिया, जिनमें भारतीय नौसेना, भारतीय तटरक्षक बल (कोस्ट गार्ड), बंदरगाह प्राधिकरण, मत्स्य विभाग, पड़ोसी राज्यों के प्रतिनिधि और केंद्र सरकार की विभिन्न सुरक्षा एवं प्रशासनिक एजेंसियां शामिल थीं।
सेमिनार के दौरान दिनभर छह तकनीकी सत्र आयोजित किए गए, जिनमें तटीय सुरक्षा से जुड़े प्रमुख तकनीकी पहलुओं और उभरती चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने समुद्री सीमाओं की निगरानी, अवैध गतिविधियों की रोकथाम, आपदा प्रबंधन और आधुनिक तकनीक के उपयोग जैसे विषयों पर अपने विचार साझा किए।
डीजीपी वाई.बी. खुरानिया ने अपने संबोधन में कहा कि तटीय सुरक्षा केवल एक विभाग या एजेंसी की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह कई एजेंसियों के समन्वय और साझा प्रयासों से ही मजबूत हो सकती है। उन्होंने कहा कि इस तरह की वर्कशॉप्स से सभी हितधारकों को एक मंच मिलता है, जहां वे अपने अनुभव साझा कर सकते हैं और मौजूदा प्रणाली में सुधार के लिए ठोस सुझाव दे सकते हैं।
कार्यक्रम में शामिल वरिष्ठ अधिकारियों ने भी तटीय सुरक्षा के विभिन्न पहलुओं पर अपने अनुभव और सुझाव प्रस्तुत किए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि बदलते समय में समुद्री सुरक्षा को लेकर नई चुनौतियां सामने आ रही हैं, जिनसे निपटने के लिए तकनीकी उन्नयन और अंतर-एजेंसी सहयोग बेहद जरूरी है।
विशेषज्ञों ने इस बात पर भी चर्चा की कि ओडिशा का लंबा समुद्री तट रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है, और यहां सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी आवश्यक है। बैठक में निगरानी प्रणाली, तटीय गश्त, सूचना साझा करने की व्यवस्था और आपात प्रतिक्रिया तंत्र को और प्रभावी बनाने पर भी विचार-विमर्श किया गया।
सेमिनार के अंत में यह सहमति बनी कि सभी एजेंसियों के बीच समन्वय को और मजबूत किया जाएगा और नियमित अंतराल पर ऐसे संवाद और प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, ताकि तटीय सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाया जा सके।





