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ओडिशा विधानसभा स्पीकर ने BJD की अयोग्यता याचिका खारिज की

Kavita2
22 Jun 2026 10:40 AM IST
ओडिशा विधानसभा स्पीकर ने BJD की अयोग्यता याचिका खारिज की
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Odisha ओडिशा: राजनीति में एक अहम घटनाक्रम के तहत विधानसभा स्पीकर सुरमा पाधी ने विपक्षी दल बीजू जनता दल (BJD) की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें आठ विधायकों को अयोग्य ठहराने की मांग की गई थी। यह मामला इस वर्ष मार्च में हुए राज्यसभा चुनाव के दौरान कथित क्रॉस-वोटिंग से जुड़ा हुआ था।

सूरमा पाधी ने BJD की याचिका पर सुनवाई के बाद इसे खारिज कर दिया, जिससे इन पेड़ों की सदस्यता पर कोई खतरा नहीं रहा है। इस फैसले के बाद राज्य की राजनीति में एक नई बहस शुरू हो गई है।

बीजू जनता दल ने स्पीकर से इन आठ पेड़ों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। पार्टी का आरोप था कि इन जंगलों ने पार्टी व्हिप का उल्लंघन करते हुए राज्यसभा चुनाव में BJP समर्थित वैलेंटाइन उम्मीदवार दिलीप रे के पक्ष में वोट दिया।

BJD का कहना था कि यह कदम पार्टी अनुशासन के खिलाफ है और इसे गंभीर पार्टी-विरोधी गतिविधि माना जाना चाहिए। इसी आधार पर पार्टी ने इन विधायकों को पहले ही निलंबित कर दिया था और बाद में अयोग्यता की याचिका स्पीकर के समक्ष दायर की गई थी।

अप्रैल महीने में विपक्ष की मुख्य सचेतक प्रमिला मलिक के नेतृत्व में BJD के एक प्रतिनिधिमंडल ने विधानसभा अध्यक्ष से मुलाकात की थी और औपचारिक रूप से यह मांग रखी थी कि इन विधायकों को सदन से अयोग्य घोषित किया जाए।

प्रमिला मल्लिक के नेतृत्व में प्रस्तुत याचिका में बताया गया कि कुल आठ दलों ने पार्टी में शामिल होने का उल्लंघन किया है और क्रॉस वोटिंग में शामिल हैं।

इनमें से छह विधायकों को विशेष रूप से राज्यसभा चुनाव में क्रॉस-वोटिंग के आरोपों के चलते निलंबित किया गया था। इनमें चक्रमणि कन्हार (बालीगुडा), नबा किशोर मलिक (जयदेव), सौविक बिस्वाल (चौद्वार-कटक), सुबासिनी जेना (बास्ता), रमाकांत भोई (तिरटोल) और देवी रंजन त्रिपाठी (बांकी) शामिल हैं।

इसके अलावा, दो अन्य विधायकों अरविंद महापात्रा (पाटकुरा) और सनातन महाकुड (चंपुआ) को भी पार्टी-विरोधी गतिविधियों के आरोपों में पहले ही निलंबित किया जा चुका था।

अरविंद महापात्र और सनातन महाकुड का नाम भी इस विवाद में शामिल रहा, जिससे मामला और अधिक राजनीतिक रूप से जुड़ा हुआ है।

स्पीकर के इस फैसले के बाद BJD के भीतर असंतोष देखा जा रहा है, जबकि विपक्षी खेमे में इसे एक महत्वपूर्ण कानूनी और राजनीतिक जीत के रूप में देखा जा रहा है। वहीं, राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला आने वाले दिनों में ओडिशा की राजनीति को और प्रभावित कर सकता है।

फिलहाल, इस फैसले के बाद सभी आठ विधायकों की सदस्यता बरकरार है और विधानसभा की कार्यवाही में उनकी स्थिति यथावत बनी हुई है।

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