ओडिशा

Odisha: माओवादियों से सहानुभूति रखने वाले 295 मिलिशिया ने किया सरेंडर

Kunti Dhruw
12 Jun 2022 9:24 AM GMT
Odisha: माओवादियों से सहानुभूति रखने वाले 295 मिलिशिया ने किया सरेंडर
x
बड़ी खबर

ओडिशा के मलकानगिरी जिले माओवादियों से सहानुभूति रखने वाले 295 सक्रिय मिलिशिया ने आत्मसमर्पण किया है। इनमें स्वाभिमान आंचल के पूर्व वामपंथी उग्रवाद के गढ़ के चार गांवों के मिलिशिया, स्थानीय ग्राम समिति के सदस्यों, माओवादियों से सहानुभूति रखने वालों और गण नाट्य संघ जैसे माओवादी संगठनों के सदस्य शामिल हैं। पुलिस अधिकारियों ने कहा कि जंत्री ग्रामपंचायत के धाकड़पदार, डाबुगुडा, ताबेर और अर्लिंगपाड़ा गांवों के 295 पुरुषों और महिलाओं ने बीएसएफ शिविर में आयोजित समारोह में आत्मसमर्पण किया।

आत्मसमर्पण करने वाले ग्रामीणों में आगजनी, नागरिक हत्याएं, राष्ट्रीय ध्वज के बजाय काला झंडा फहराना, वाहनों को जलाना, विधायक-सांसद चुनाव का बहिष्कार, माओवादियों को भोजन व रसद की आपूर्ति और सूचना पहुंचाने के आरोपी शामिल हैं। इन पर सुरक्षा बलों की आवाजाही में रुकावट, पुलिस मुखबिरों के बहाने निर्दोष आदिवासियों को उनके पैतृक गांव छोड़ने के लिए धमकाने और हमला करने के मामले भी दर्ज हैं। माओवादी विचारधारा के प्रति अपना विरोध दिखाने के लिए ग्रामीणों ने माओवादियों की पोशाक सामग्री को जला दिया और माओबाड़ी मुर्दाबाद के नारे लगाए। जिला प्रशासन ने इन ग्रामीणों को जॉब कार्ड और पेंशन कार्ड मुहैया कराए।

BSF ने जंत्री इलाके में तैयार किया अपना बेस
पुलिस ने कहा कि बीएसएफ ने जंत्री में अपना बेस तैयार करने के बाद ग्रामीणों का आत्मसमर्पण कराया, जो स्वाभिमान आंचल के अंतिम छोर पर है। मानसून के दौरान सड़क मार्ग यहां आना बहुत मुश्किल हो जाता है। जंत्री स्थित बीएसएफ बेस से जंत्री, अंद्रापल्ली, धौलीपुट और रालेगड़ा ग्रामपंचायतों में माओवादी प्रभाव पड़ने की आशंका है। हालांकि, मलकानगिरी में आदिवासी कार्यकर्ताओं ने कहा कि जंत्री ग्रामपंचायत में ग्रामीणों का आत्मसमर्पण केवल पुलिस अधिकारियों के अहंकार को बढ़ाने की कवायद है।
'आत्मसमर्पण करने वालों को सरकार से कोई लाभ नहीं मिला'
मलकानगिरी स्थित आदिवासी कार्यकर्ता गेनु मुदुली ने पूछा, "आदिवासियों को आत्मसमर्पण करने से कैसे लाभ होता है? 2016 में भी तत्कालीन मलकानगिरी एसपी ने विभिन्न गांवों में 700 से अधिक आदिवासियों को माओवादियों के आत्मसमर्पण की योजना बनाई थी। उनमें से किसी को भी आत्मसमर्पण करने से राज्य सरकार से कोई लाभ नहीं मिला। आज का आत्मसमर्पण भी ऐसा ही है। किसी भी मामले में ग्रामीण हिंसा के लिए कैसे जिम्मेदार हैं, क्योंकि वे माओवादियों के गढ़ में रहते थे और उनकी मदद करने के अलावा उनके पास कोई विकल्प नहीं था।"

ये लोग पुनर्वास के लिए सहायता पाने के पात्र नहीं
चित्रकोंडा के अनुमंडलीय पुलिस अधिकारी अंशुमान द्विवेदी ने स्वीकार किया कि पुलिस के सामने आत्मसमर्पण करने वाले 295 लोगों में से कोई भी राज्य सरकार की योजना के तहत वामपंथी उग्रवादियों के आत्मसमर्पण और पुनर्वास के लिए सहायता पाने का पात्र नहीं होगा, जिसे 2014 में अंतिम बार संशोधित किया गया था। उन्होंने कहा, "योजना के अनुसार केवल सशस्त्र और कैडर माओवादी पुनर्वास के लिए पात्र हैं। हालांकि पुनर्वास नीति के अनुसार ग्रामीणों को कोई मौद्रिक सहायता नहीं मिलेगी, आत्मसमर्पण एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम है क्योंकि मिलिशिया माओवादी आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाते हैं। इससे यह भी पता चलता है कि माओवादी अपने पूर्व गढ़ में ताकत खो रहे हैं।"


Next Story
© All Rights Reserved @ 2022Janta Se Rishta