ओडिशा

Nuapada: कांग्रेस नेता भक्ता चरण दास ने Jagannath Yatra के दौरान हादसों पर सरकार की निंदा की

SHIDDHANT
8 Nov 2025 11:47 PM IST
Nuapada: कांग्रेस नेता भक्ता चरण दास ने Jagannath Yatra के दौरान हादसों पर सरकार की निंदा की
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Odisha ओडिशा। ओडिशा प्रदेश कांग्रेस कमेटी (OPCC) के अध्यक्ष भक्ता चरण दास ने Nuapada जिले में हाल ही में आयोजित Jagannath Yatra के दौरान हुई दुर्घटनाओं और लोगों की मौतों को लेकर सरकार की कड़ी आलोचना की है। भक्ता चरण दास ने इसे "अपराधी सरकार" करार देते हुए कहा कि इस हादसे में कई लोग अपनी जान गंवा चुके हैं, हजारों प्रभावित हुए और कई घायल हुए। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर यह सब क्यों हुआ और प्रशासन की जिम्मेदारी कहां है। OPCC अध्यक्ष ने कहा, "आज सरकार ने कुछ DSP और निचले अधिकारियों को निलंबित किया है, लेकिन उपमुख्यमंत्री और आयोजन की निगरानी कर रहे वरिष्ठ अधिकारी कहां हैं? मुख्य प्रशासक कहां हैं? जिन वरिष्ठ अधिकारियों का इसमें हाथ था, उनके बारे में कुछ कहा ही नहीं गया।

भक्ता चरण दास ने स्पष्ट किया कि यह केवल कुछ अधिकारियों का मामला नहीं है बल्कि पूरे प्रशासनिक तंत्र की विफलता है। उन्होंने कहा कि केवल निचले स्तर के अधिकारियों को निलंबित करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। कांग्रेस नेता ने जनता और प्रभावित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार को गंभीरता से हादसों की जांच करनी चाहिए और दोषियों को न्याय के कटघरे में लाना चाहिए। उन्होंने कहा कि राज्य में ऐसे आयोजनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए स्पष्ट दिशानिर्देश और प्रभावी निगरानी की आवश्यकता है।

भक्ता चरण दास ने मीडिया से बातचीत में कहा कि यह हादसा केवल प्रशासन की लापरवाही का नतीजा है और इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे इस मामले में सचेत रहें और न्याय की मांग करते रहें। इस बयान से राज्य में Jagannath Yatra के दौरान हुई घटनाओं को लेकर राजनीतिक विवाद और गहन हो गया है। कांग्रेस पार्टी ने स्पष्ट किया है कि वह इस मामले को विधानसभा और सार्वजनिक मंचों पर उठाती रहेगी और प्रभावितों को न्याय दिलाने के लिए सरकार पर दबाव बनाएगी। इस प्रकार, Nuapada में हुई यह घटना प्रशासनिक जवाबदेही और सुरक्षा प्रबंधन की कमी को उजागर करती है, जबकि कांग्रेस नेता भक्ता चरण दास की कड़ी टिप्पणी ने इसे राजनीतिक और सामाजिक बहस का विषय बना दिया है।
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