ओडिशा

अवैध रेत खनन पर NGT का बड़ा एक्शन, ओडिशा सरकार को सख्त आदेश

Kavita2
6 Nov 2026 11:28 AM IST
अवैध रेत खनन पर NGT का बड़ा एक्शन, ओडिशा सरकार को सख्त आदेश
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भुवनेश्वर। ओडिशा में अवैध रेत खनन और छोटे खनिजों की चोरी पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने कड़ा रुख अपनाया है। ट्रिब्यूनल ने राज्य सरकार को अवैध खनन रोकने के लिए निगरानी व्यवस्था मजबूत करने, खनिज परिवहन में इस्तेमाल होने वाले वाहनों की अनिवार्य ट्रैकिंग करने और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ आपराधिक मुकदमे दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही अवैध रूप से निकाली गई और जब्त की गई रेत के नियमानुसार निपटान तथा नीलामी पर भी जोर दिया गया है। एनजीटी ने स्पष्ट किया है कि केवल जुर्माना वसूलकर अवैध खनन के मामलों को समाप्त नहीं किया जा सकता।

यह महत्वपूर्ण आदेश एनजीटी की पूर्वी क्षेत्रीय पीठ ने तीन नवंबर 2026 को जारी किया था। मामला बरगढ़ जिले के अंबाभोना तहसील अंतर्गत चिखिली गांव में महानदी से बड़े पैमाने पर अवैध रेत निकालने से संबंधित है। याचिकाकर्ता शिवाजी पटेल ने वर्ष 2024 में ट्रिब्यूनल का दरवाजा खटखटाया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि बिना वैध खनन पट्टे के नदी से रेत निकालकर उसका भंडारण और कारोबार किया जा रहा है।

याचिका में आरोप लगाया गया कि निजी व्यक्ति प्रेम किशोर पटेल महानदी के नदी तल से अवैध तरीके से रेत निकालने में शामिल था। इसके लिए नावों पर सक्शन पंप लगाकर रेत निकालने का दावा किया गया। आरोप था कि निकाली गई रेत को नदी किनारे जमा किया जाता था और बाद में निर्माण परियोजनाओं तथा ईंट-भट्टों को बेचा जाता था।

मामले की सुनवाई न्यायिक सदस्य न्यायमूर्ति अरुण कुमार त्यागी और विशेषज्ञ सदस्यों डॉ. ए. सेंथिल वेल तथा ईश्वर सिंह की पीठ ने की। ट्रिब्यूनल ने अवैध खनन की शिकायतों, संयुक्त जांच समिति की रिपोर्ट और संबंधित अधिकारियों की ओर से उठाए गए कदमों का परीक्षण किया।

संयुक्त जांच समिति में बरगढ़ के कलेक्टर, ओडिशा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के वरिष्ठ वैज्ञानिक और जिला खनन अधिकारी शामिल थे। समिति की जांच में सामने आया कि चिखिली का संबंधित स्थान अधिसूचित रेत खदान नहीं था और वहां खनन की अनुमति नहीं दी गई थी। इसके बावजूद बड़ी मात्रा में रेत का भंडारण पाया गया।

मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि अलग-अलग निरीक्षण और छापेमारी में हजारों घनमीटर रेत मिलने के बावजूद पर्याप्त आपराधिक कार्रवाई नहीं की गई।

रिपोर्ट के अनुसार, नौ जून 2024 को बरगढ़ खनन अधिकारी ने लगभग 1,000 घनमीटर रेत पकड़ी थी। इस मामले में 2.70 लाख रुपये का कंपाउंडिंग शुल्क वसूला गया। इसके बाद 22 जून को किए गए निरीक्षण में लगभग 7,688 घनमीटर अतिरिक्त रेत का भंडारण मिला। इस मामले में करीब 11.74 लाख रुपये की राशि वसूली गई।

इस तरह दोनों अवसरों पर कुल लगभग 8,688 घनमीटर रेत पकड़े जाने का विवरण सामने आया। ट्रिब्यूनल ने सवाल उठाया कि इतनी बड़ी मात्रा में कथित अवैध रेत मिलने के बावजूद संबंधित अधिकारियों ने पर्याप्त कानूनी कार्रवाई क्यों नहीं की।

एनजीटी ने स्पष्ट किया कि अवैध रेत खनन, परिवहन और भंडारण से जुड़े मामलों में प्राथमिकी दर्ज करना आवश्यक है। पुलिस और जिला प्रशासन केवल शुल्क वसूलकर मामले को समाप्त करने का विकल्प नहीं अपना सकते, यदि घटना में आपराधिक कानून के तहत कार्रवाई बनती है।

ट्रिब्यूनल के अनुसार, खनन कानून के तहत कंपाउंडिंग शुल्क या जुर्माना जमा कर देने से खनिज चोरी जैसे अपराधों के लिए आपराधिक मुकदमे से स्वतः छूट नहीं मिल जाती। प्रशासनिक कार्रवाई और आपराधिक प्रक्रिया अलग-अलग हैं।

एनजीटी ने ओडिशा के पुलिस महानिदेशक (DGP) को निर्देश दिया है कि सभी पुलिस अधीक्षकों को अवैध खनन से संबंधित मामलों में तत्काल प्राथमिकी दर्ज करने के संबंध में आवश्यक निर्देश जारी किए जाएं। बिना उचित कारण कार्रवाई में देरी करने या जिम्मेदारी निभाने में विफल रहने वाले अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई भी की जा सकती है।

ट्रिब्यूनल ने खनिज परिवहन में इस्तेमाल होने वाले वाहनों की निगरानी के लिए भी महत्वपूर्ण आदेश दिए हैं। खान एवं भूविज्ञान निदेशालय को निर्देश दिया गया है कि छोटे खनिजों के परिवहन में लगे वाहनों में चालू स्थिति वाले जीपीएस आधारित व्हीकल ट्रैकिंग सिस्टम और रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन (RFID) टैग लगाए जाएं।

इन उपकरणों का उद्देश्य रेत और अन्य छोटे खनिजों के परिवहन पर नजर रखना है। इससे संबंधित अधिकारी वाहनों की आवाजाही और परिवहन मार्ग की निगरानी कर सकेंगे। निर्धारित ट्रैकिंग उपकरणों के बिना खनिज ढुलाई करने वाले वाहनों को परिवहन की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।

अवैध गतिविधियों में इस्तेमाल होने वाले वाहनों और मशीनरी को नियमानुसार जब्त करने की कार्रवाई पर भी जोर दिया गया है। साथ ही जब्त रेत के सुरक्षित भंडारण और विधिसम्मत नीलामी की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

एनजीटी ने राज्य के मुख्य सचिव को भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी है। मुख्य सचिव को कम से कम प्रत्येक तीन महीने में अवैध रेत खनन रोकने के उपायों की समीक्षा करनी होगी। इन बैठकों में लिए गए निर्णयों और समीक्षा रिपोर्ट को राज्य सरकार की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।

ट्रिब्यूनल का मानना है कि नियमित समीक्षा और सार्वजनिक रिपोर्टिंग से अधिकारियों की जवाबदेही बढ़ेगी। इससे यह पता चल सकेगा कि अवैध खनन रोकने के लिए जारी निर्देशों का जमीनी स्तर पर कितना पालन हो रहा है।

मामले में ओडिशा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति निर्धारित करने और उसकी वसूली के लिए आवश्यक प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया गया है। अवैध रेत खनन के कारण नदी तंत्र को होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए यह कदम महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

विशेष रूप से बरगढ़ के पुलिस अधीक्षक को संबंधित घटनाओं में अलग-अलग प्राथमिकी दर्ज कराने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं, राज्य के मुख्य सचिव, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और खान एवं भूविज्ञान निदेशालय को 90 दिनों के भीतर अनुपालन एवं कार्रवाई रिपोर्ट एनजीटी की कोलकाता पीठ के रजिस्ट्रार के समक्ष प्रस्तुत करनी होगी।

अवैध रेत खनन केवल सरकारी राजस्व के नुकसान तक सीमित नहीं है। अनियंत्रित खनन से नदी की प्राकृतिक संरचना, किनारों की स्थिरता और जलीय पारिस्थितिकी पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। अत्यधिक रेत निकालने से नदी के तल में बदलाव और आसपास के क्षेत्रों में कटाव जैसी समस्याएं भी उत्पन्न हो सकती हैं।

एनजीटी के इस आदेश को ओडिशा में अवैध खनन के खिलाफ निगरानी और जवाबदेही मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अब राज्य सरकार के सामने चुनौती इन निर्देशों को प्रभावी तरीके से लागू करने की होगी।

फिलहाल ट्रिब्यूनल ने स्पष्ट संदेश दिया है कि अवैध खनन के मामलों में केवल आर्थिक जुर्माना पर्याप्त नहीं है। नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई, पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति की वसूली और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही भी सुनिश्चित करनी होगी।

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