
कटक: नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की पूर्वी जोन बेंच ने अंगुल जिले में कथित अवैध रेत खनन से संबंधित एक मामले में ट्रिब्यूनल के समक्ष वकील के माध्यम से पेश होने और जवाब दाखिल करने में विफल रहने पर ओडिशा सरकार के मुख्य सचिव और सात अन्य अधिकारियों पर 25,000 रुपये का जुर्माना लगाया है।
न्यायमूर्ति अरुण कुमार त्यागी (न्यायिक सदस्य), और विशेषज्ञ सदस्य ए सेंथिल वेल और ईश्वर सिंह की पीठ ने आठ उत्तरदाताओं पर जुर्माना लगाया, यह देखते हुए कि उनके वकीलों की बार-बार गैर-उपस्थिति के कारण पर्यावरणीय मुद्दों के निर्णय में देरी हो रही थी।
मुख्य सचिव के अलावा, अन्य उत्तरदाताओं में जल संसाधन विभाग के प्रमुख सचिव, अंगुल के एसपी, खानों के उप निदेशक (तालचेर सर्कल), क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी (अंगुल), तालचेर और परजंग के तहसीलदार और तालचेर पुलिस स्टेशन के प्रभारी निरीक्षक शामिल हैं।
28 सितंबर को जारी आदेश मंगलवार को अपलोड किया गया। ट्रिब्यूनल तालचेर स्थित एक गैर सरकारी संगठन द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें तालचेर तहसील के अंतर्गत ब्राह्मणी नदी में निजगढ़ज़ामी रेत खदान, जिसे स्थानीय रूप से गोपीनाथपुर रेत खदान के रूप में जाना जाता है, के निजी पट्टेदार द्वारा अनुमत पट्टा क्षेत्र से परे खनन और अतिरिक्त निकासी का आरोप लगाया गया था।





