
मदुरै: मद्रास उच्च न्यायालय की मदुरै पीठ ने बुधवार को मदुरै की 5वीं अतिरिक्त सत्र अदालत को निर्देश दिया कि वह बी. अजितकुमार की हिरासत में हुई मौत से जुड़े मामले की सुनवाई 9 महीने के भीतर पूरी करे। अजितकुमार शिवगंगा के मदापुरम भद्रकालीअम्मन मंदिर में गार्ड थे।
न्यायमूर्ति पी. मुरुगन ने यह आदेश चार आरोपियों द्वारा दायर याचिकाओं को खारिज करते हुए दिया। इन आरोपियों ने निचली अदालत के 10 सितंबर 2026 के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसके तहत उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था।
याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि सत्र न्यायाधीश ने केवल कोरे आरोपों के आधार पर उन्हें हिरासत में भेजा है। उन्होंने यह भी कहा कि जमानत अर्जी लंबित न होने पर भी उन्हें हिरासत में भेजना सुप्रीम कोर्ट के तय सिद्धांतों के खिलाफ है, क्योंकि उन्होंने कमिटल कोर्ट (मामले को सत्र अदालत में भेजने वाली अदालत) के समक्ष BNSS की धारा 91 के तहत एक बॉन्ड भरा था।
हालांकि, न्यायाधीश ने कहा कि हत्या का आरोप जुड़ जाने के बाद, पहले भरा गया बॉन्ड सत्र अदालत में आरोपियों को कोई सुरक्षा नहीं देगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब किसी गंभीर अपराध के आरोप तय हो जाते हैं, तो आरोपी को संबंधित अदालत के सामने सरेंडर करना होता है और जमानत मांगनी होती है। उन्होंने कहा कि आरोपियों ने ऐसा करने के बजाय हिरासत के आदेश को ही चुनौती दे दी।





