
कटक: ओडिशा हाई कोर्ट ने एक युवा जोड़े की उस रिट याचिका को खारिज कर दिया है जिसमें उन्होंने साथ रहने के लिए पुलिस सुरक्षा की मांग की थी। कोर्ट ने कहा कि उनकी याचिका शादी के लिए तय कानूनी न्यूनतम उम्र से बचने की कोशिश लग रही थी।
हाल ही में दिए गए एक आदेश में कोर्ट ने पाया कि दोनों याचिकाकर्ता लगभग 20 साल के थे, लेकिन महिला शादी की कानूनी उम्र तक पहुँच चुकी थी, जबकि पुरुष तय उम्र से एक साल छोटा था।
चीफ जस्टिस हरीश टंडन और जस्टिस चित्तरंजन डैश की दो जजों की बेंच ने कहा, "यह जानते हुए भी कि लड़के ने कानून में बताई गई शादी की उम्र पूरी नहीं की है, याचिकाकर्ताओं ने चालाकी से एक ऐसी कहानी बनाई जिसमें वे बिना शादी किए साथ रह रहे थे।"
याचिकाकर्ताओं ने अपने रिश्ते के लिए सुरक्षा की मांग करते हुए कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उनका कहना था कि उनके परिवारों ने उनके साथ रहने के फैसले को स्वीकार नहीं किया है। उन्हें अपनी शांतिपूर्ण ज़िंदगी में खतरे, ज़बरदस्ती या किसी और तरह की दखलअंदाजी का डर था और उन्होंने पुलिस प्रशासन से अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश देने की मांग की थी।
हालांकि, बेंच ने कहा कि दोनों याचिकाकर्ता बालिग हो चुके थे और उनमें अपनी ज़िंदगी के बारे में फैसले लेने की समझ थी। जजों ने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि सिर्फ़ आशंकाओं के आधार पर, बिना किसी सबूत के, न्यायिक दखल को सही नहीं ठहराया जा सकता।
हाई कोर्ट ने आगे कहा कि बिना किसी ठोस सबूत के, सिर्फ़ आशंका या सोच के आधार पर 'रिट ऑफ़ मैंडमस' (आदेश) या ऐसा ही कोई निर्देश जारी नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने गौर किया कि याचिका में ऐसा कोई खास आरोप नहीं था कि किसी याचिकाकर्ता के साथ उनके माता-पिता ने गलत व्यवहार किया हो या उन्हें धमकियाँ मिली हों या शारीरिक हमला हुआ हो।





