
जगतसिंहपुर: 62 साल की संजुक्ता दास ने साबित कर दिया है कि उम्र ज़िंदगी के लक्ष्यों को पाने में कोई रुकावट नहीं बन सकती। जब उन्होंने पशुपालन शुरू करने का फ़ैसला किया, तो उनका मकसद सिर्फ़ अपनी आर्थिक हालत सुधारना नहीं था; वह यह दिखाना चाहती थीं कि ग्रामीण महिलाएँ व्यवस्थित खेती-बाड़ी के ज़रिए टिकाऊ आजीविका बना सकती हैं और साथ ही दूसरों के लिए रोज़गार के मौके भी पैदा कर सकती हैं।
आज, संजुक्ता के पक्के इरादे ने आजीविका के एक छोटे से काम को सुअर पालन और डेयरी के बढ़ते हुए कारोबार में बदल दिया है। यह कारोबार कई ग्रामीण महिलाओं को खेती-बाड़ी को आय के टिकाऊ ज़रिया के तौर पर अपनाने के लिए प्रेरित कर रहा है। वह खुद हर महीने 60,000 से 70,000 रुपये तक की अच्छी-खासी कमाई करती हैं।
उन्होंने अपने सफ़र की शुरुआत 2000 में 'हरापारबती स्वयं-सहायता समूह' (SHG) बनाकर की थी। इस समूह में 10 सदस्य थे और संजुक्ता इसकी सेक्रेटरी थीं। समय के साथ, उन्होंने और दूसरे सदस्यों ने आय बढ़ाने वाली कई गतिविधियाँ शुरू कीं, जैसे PDS डीलरशिप चलाना, मिड-डे मील प्रोग्राम के तहत खाना बनाना और अगरबत्ती, पापड़ व बड़ी बनाना। वे अपने उत्पादों को ज़िला प्रशासन और राज्य सरकार द्वारा आयोजित प्रदर्शनियों में बेचती थीं।
हालाँकि, संजुक्ता आजीविका का एक ज़्यादा स्थिर और टिकाऊ ज़रिया बनाना चाहती थीं। 2024 में, उन्होंने SHG की मदद से पशुपालन के काम में, शुरुआत में सिर्फ़ 10,000 रुपये लगाकर, सुअर पालन और डेयरी फ़ार्मिंग शुरू करने का फ़ैसला किया। जैसे-जैसे सुअरों की संख्या बढ़ी, यह काम धीरे-धीरे फैलता गया; हर मादा सुअर साल में लगभग 10 से 12 बच्चे देती है। अब वह हर साल लगभग 40 से 50 सुअर बेचती हैं, जिनकी कीमत उनके आकार के हिसाब से 18,000 से 20,000 रुपये के बीच होती है।





