
कटक: ओडिशा हाई कोर्ट ने आयुष (AYUSH) के पूर्व डायरेक्टर विभु प्रसाद सारंगी की समय से पहले रिटायरमेंट को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार ने उन्हें सर्विस से रिटायर करते समय अपनी ही गाइडलाइंस का पालन नहीं किया, खासकर तब जब वे चार महीने में रिटायर होने वाले थे।
जस्टिस बिराजा प्रसन्ना सतपथी ने सरकार को निर्देश दिया कि सारंगी को 31 जनवरी, 2021 को उनकी सामान्य रिटायरमेंट की तारीख तक सर्विस में माना जाए और उन्हें रिटायरमेंट के सभी हकदार लाभ दिए जाएं।
सारंगी 1987 में ओडिशा एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विस (OAS-II) में शामिल हुए थे और 2017 में स्पेशल सेक्रेटरी ग्रेड तक पहुंचे थे। मार्च 2020 में उन्हें आयुष का डायरेक्टर नियुक्त किया गया था। एक महिला सहकर्मी के आरोपों के बाद भुवनेश्वर महिला पुलिस स्टेशन में दर्ज यौन उत्पीड़न के मामले में उन्हें 9 जुलाई, 2020 को गिरफ्तार किया गया था। चार दिन बाद उन्हें ज़मानत मिल गई और गिरफ्तारी की तारीख से ही उन्हें सस्पेंड कर दिया गया।
7 अगस्त, 2020 को सौंपी गई इंटरनल कमिटी की रिपोर्ट के आधार पर, सरकार ने 13 अगस्त को ओडिशा सर्विस कोड के नियम 71(a) के तहत उन्हें समय से पहले रिटायर करने का आदेश दिया। हालांकि, सारंगी की अपील पर विचार करते हुए हाई कोर्ट ने इस फैसले में कमी पाई, मुख्य रूप से इस आधार पर कि समय से पहले रिटायरमेंट के लिए उनके मामले पर विचार किए जाने के समय वे अपनी तय रिटायरमेंट से केवल चार महीने दूर थे।
कोर्ट ने सामान्य प्रशासन विभाग (General Administration Department) की 24 सितंबर, 2019 की गाइडलाइन का हवाला दिया, जिसमें कहा गया है कि आम तौर पर किसी कर्मचारी को अक्षमता (ineffectiveness) के आधार पर रिटायर नहीं किया जाना चाहिए यदि वह एक साल के भीतर रिटायर होने वाला हो। गाइडलाइन में एक अपवाद भी है, जब रिटायरमेंट से पहले के साल में किसी अधिकारी की क्षमता, कार्यकुशलता या प्रभावशीलता में "अचानक और भारी गिरावट" आती है।





