
भुवनेश्वर: ओडिशा ने अपनी 574 किलोमीटर लंबी तटरेखा पर मौजूद रेत के टीलों (सैंड ड्यून्स) की अनोखी जैव-विविधता को बचाने और तटीय कटाव को रोकने के लिए एक 'तटीय रेत टीला प्रबंधन योजना' तैयार करने का फैसला किया है।
यह फैसला हाल ही में ओडिशा कोस्टल ज़ोन मैनेजमेंट अथॉरिटी (OCZMA) की बैठक में लिया गया। OCZMA ने बताया है कि रेत के टीलों के प्रबंधन की योजना पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) से मंज़ूरी प्राप्त एक विशेषज्ञ एजेंसी के ज़रिए तैयार की जाएगी।
इसे CRZ नोटिफिकेशन, 2019 के क्लॉज़ 2.1.1(b) के तहत तैयार किया जाएगा, जिसके तहत तटीय क्षेत्र प्रबंधन योजना में पहचाने गए सभी पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील इलाकों के लिए प्रबंधन रणनीतियाँ बनाना ज़रूरी है।
राज्य के वन, पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन विभाग के एक अधिकारी ने कहा कि अन्य नियमों के अलावा रेत के टीलों की सुरक्षा से तटीय इलाकों में कटाव का खतरा कम करने में मदद मिलेगी, क्योंकि ये संरचनाएँ लहरों की ऊर्जा को सोख लेती हैं और कटाव के खिलाफ़ एक प्राकृतिक रुकावट का काम करती हैं।





