ओडिशा

ओडिशा सरकार ने मेरे साथ भेदभाव किया और मनमाने ढंग से वापस ले लिया

Subhi
29 Sept 2026 11:37 AM IST
ओडिशा सरकार ने मेरे साथ भेदभाव किया और मनमाने ढंग से वापस ले लिया
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नई दिल्ली: सीनियर IPS अधिकारी सुशांत कुमार नाथ ने ओडिशा के डायरेक्टर जनरल ऑफ़ पुलिस (DGP) की नियुक्ति के मामले में सुप्रीम कोर्ट में एक हलफ़नामा दायर किया है। उन्होंने आरोप लगाया है कि राज्य सरकार ने उनके साथ भेदभाव किया है और बिना किसी गड़बड़ी के आरोप या सबूत के मनमाने ढंग से उनका 'इंटीग्रिटी सर्टिफ़िकेट' (ईमानदारी का प्रमाण पत्र) वापस ले लिया है।

1993 बैच के सीनियर इंडियन पुलिस सर्विस (IPS) अधिकारी, 59 वर्षीय नाथ ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में दायर हलफ़नामे में यह बात कही। कोर्ट इस मामले की सुनवाई मंगलवार को करेगा।

उन्होंने कहा, "आवेदक (नाथ) के ख़िलाफ़ सिर्फ़ एक बात मानी गई है, और वह यह कि CBI ने 4 अगस्त के अपने पत्र में कहा है कि अगर ज़रूरत पड़ी तो उनसे बाद में पूछताछ की जा सकती है। यह पूछताछ M/s ITI अधिकारियों के ख़िलाफ़ सेक्शन 17A के तहत मंज़ूरी मिलने और उनसे पूछताछ होने के बाद हो सकती है। CBI का यह खुला जवाब साफ़ तौर पर बताता है कि आवेदक से पूछताछ हो भी सकती है और नहीं भी; और अगर पूछताछ होती भी है, तो वह सिर्फ़ एक गवाह के तौर पर हो सकती है।"

नाथ ने आगे कहा कि CBI के इस बयान का इस्तेमाल उन्हें UPSC की सिलेक्शन प्रोसेस में निष्पक्ष रूप से विचार किए जाने के मौक़े से वंचित करने के लिए नहीं किया जा सकता।

सीनियर IPS अधिकारी ने कहा कि वह यह हलफ़नामा इसलिए दायर कर रहे हैं ताकि कोर्ट के सामने लंबित मुद्दों के सही फ़ैसले के लिए ज़रूरी अतिरिक्त तथ्य और दस्तावेज़ रिकॉर्ड पर लाए जा सकें।

आवेदक के सीनियर वकील पहले ही सुप्रीम कोर्ट के सामने ज़रूरी दस्तावेज़ों के नोट्स और संकलन पेश कर चुके हैं।

नाथ ने यह भी कहा कि उन्हें पता चला है कि राज्य सरकार द्वारा UPSC को भेजे गए प्रस्ताव में शामिल दो अधिकारियों - RP कोचे (IPS) और संजीव पांडा (IPS) - से CBI पहले ओडिशा में 'सीशोर चिट फंड केस' के सिलसिले में पूछताछ कर चुकी है। यह जानकारी पब्लिक डोमेन और इलेक्ट्रॉनिक व प्रिंट मीडिया में उपलब्ध है।

हालांकि, उन्होंने कहा कि इन दो अधिकारियों से CBI द्वारा पूछताछ किए जाने की बात न तो ओडिशा सरकार ने कोर्ट या UPSC के सामने रखी, और न ही राज्य सरकार ने उनके 'इंटीग्रिटी सर्टिफ़िकेट' रोके। हलफनामे में आगे कहा गया, "असल में, यह साफ है कि मौजूदा आवेदक की स्थिति के बारे में पूछने वाला 3 अगस्त का पत्र जैसा कोई पत्र अन्य दो अधिकारियों के संबंध में नहीं भेजा गया है।"

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