
नई दिल्ली: बुधवार को राज्य पुलिस प्रमुख चयन मामले की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि क्या ओडिशा सरकार को यूपीएससी एम्पैनलमेंट कमेटी को डीजीपी स्तर के अधिकारी सुशांत कुमार नाथ का नाम भेजने से पहले पुलिस एसआई परीक्षा अनियमितता के संबंध में सीबीआई एफआईआर के बारे में पता था।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन न्यायाधीशों की पीठ, जिसमें जस्टिस जॉयमाल्या बागची और वी मोहना शामिल थे, ने मामले की सुनवाई की।
पुलिस अधिकारी नाथ की ओर से पेश वरिष्ठ वकील करुणा नंदी ने कहा कि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 17 (ए) के तहत, ठेकेदार एजेंसी मेसर्स आईटीआई, जो परीक्षा की प्रभारी थी, के अधिकारियों से पूछताछ करने की मंजूरी का अनुरोध लंबित है। लेकिन सुशांत कुमार नाथ से पूछताछ करने का कोई भी सीबीआई अनुरोध लंबित नहीं है।
उन्होंने कहा कि सीबीआई भविष्य में नाथ को तलब कर सकती है, लेकिन अभी तक अनुमति नहीं मांगी है. एसआई परीक्षा मामले में सीबीआई ने 12 नवंबर 2025 को एफआईआर दर्ज की थी. इसमें आईपीएस अधिकारी नाथ का नाम नहीं था. इसके बाद मई 2026 में उनका नाम यूपीएससी को डीजीपी पैनल में शामिल होने के लिए भेजा गया।





