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ओडिशा की बौद्ध विरासत संरक्षण को नई पहल

Kavita2
15 July 2026 5:15 PM IST
ओडिशा की बौद्ध विरासत संरक्षण को नई पहल
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भुवनेश्वर : ओडिशा की समृद्ध बौद्ध विरासत के संरक्षण और प्रचार-प्रसार की दिशा में राज्य सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। पर्यटन विभाग और ओडिशा सरकार के ओडिया भाषा, साहित्य एवं संस्कृति विभाग ने गुरु पद्मसंभव बौद्ध महाविहार, जिरांग के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं।

यह समझौता लोक सेवा भवन में आयोजित कार्यक्रम के दौरान किया गया। इस पहल का उद्देश्य ओडिशा में मौजूद बौद्ध धरोहरों को संरक्षित करना, धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देना और राज्य की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत करना है।

MoU पर हस्ताक्षर के दौरान ओडिशा सरकार के वरिष्ठ अधिकारी, मंत्री और बौद्ध समुदाय के प्रतिनिधि मौजूद रहे। कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री, महिला एवं बाल विकास, मिशन शक्ति और पर्यटन विभाग की मंत्री प्रावती परिदा, ओडिया भाषा, साहित्य एवं संस्कृति, खेल एवं युवा सेवा तथा उच्च शिक्षा मंत्री सूर्यबंशी सूरज, मुख्य सचिव अनु गर्ग और गुरु पद्मसंभव बौद्ध महाविहार, जिरांग के अध्यक्ष ग्येत्रुल जिग्मे रिनपोछे सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

इस समझौते के तहत राज्य सरकार और बौद्ध महाविहार मिलकर ओडिशा की बौद्ध संस्कृति, परंपराओं और ऐतिहासिक स्थलों को संरक्षित करने की दिशा में काम करेंगे। इसके अलावा बौद्ध पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न योजनाओं और गतिविधियों को आगे बढ़ाया जाएगा।

बौद्ध पर्यटन को मिलेगा नया आयाम

ओडिशा प्राचीन समय से ही बौद्ध धर्म का एक महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। राज्य में कई ऐसे ऐतिहासिक स्थल मौजूद हैं, जो बौद्ध संस्कृति और इतिहास से जुड़े हुए हैं। इनमें रत्नागिरी, उदयगिरी और ललितगिरी जैसे प्रमुख बौद्ध स्थल शामिल हैं।

सरकार का मानना है कि बौद्ध विरासत को पर्यटन से जोड़कर न केवल सांस्कृतिक संरक्षण किया जा सकता है, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और आर्थिक अवसर भी पैदा किए जा सकते हैं।

गुरु पद्मसंभव बौद्ध महाविहार, जिरांग ओडिशा के प्रमुख बौद्ध केंद्रों में से एक है। यह स्थान अपनी आध्यात्मिक गतिविधियों और तिब्बती बौद्ध परंपराओं के लिए जाना जाता है। यहां देश-विदेश से श्रद्धालु और पर्यटक पहुंचते हैं।

सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण पर जोर

MoU के माध्यम से सरकार का लक्ष्य बौद्ध विरासत से जुड़े स्थलों के संरक्षण, प्रचार और विकास को गति देना है। इसके तहत सांस्कृतिक कार्यक्रमों, शोध गतिविधियों और जागरूकता अभियानों को बढ़ावा देने की योजना है।

अधिकारियों के अनुसार, इस पहल से ओडिशा की प्राचीन सांस्कृतिक विरासत को नई पहचान मिलेगी। साथ ही राज्य को अंतरराष्ट्रीय बौद्ध पर्यटन मानचित्र पर मजबूत स्थान दिलाने में मदद मिलेगी।

सरकार की पर्यटन नीति को मजबूती

ओडिशा सरकार पिछले कुछ समय से राज्य में पर्यटन क्षेत्र को विकसित करने पर विशेष ध्यान दे रही है। धार्मिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पर्यटन को बढ़ावा देना इसकी प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है।

सरकार का मानना है कि बौद्ध सर्किट के विकास से राज्य में पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी फायदा होगा।

कार्यक्रम में मौजूद अधिकारियों ने कहा कि ओडिशा की विरासत केवल राज्य की नहीं, बल्कि पूरे देश की सांस्कृतिक संपदा है। इसलिए इसके संरक्षण और प्रचार के लिए सभी संस्थाओं के सहयोग की जरूरत है।

जिरांग महाविहार की भूमिका अहम

गुरु पद्मसंभव बौद्ध महाविहार, जिरांग राज्य में बौद्ध धर्म के प्रचार-प्रसार का प्रमुख केंद्र है। यहां धार्मिक शिक्षा, ध्यान और आध्यात्मिक गतिविधियां संचालित होती हैं।

इस MoU के बाद महाविहार और सरकार के बीच सहयोग बढ़ेगा, जिससे बौद्ध संस्कृति से जुड़े कार्यक्रमों और गतिविधियों को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।

कुल मिलाकर, ओडिशा सरकार और गुरु पद्मसंभव बौद्ध महाविहार के बीच हुआ यह समझौता राज्य की बौद्ध विरासत को संरक्षित करने और उसे दुनिया के सामने लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। इससे धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ ओडिशा की सांस्कृतिक पहचान भी और मजबूत होगी।

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