ओडिशा

Bengal की खाड़ी में नया साइक्लोनिक सर्कुलेशन, ओडिशा में 15 मई तक आंधी-तूफान की चेतावनी

Kavita2
9 May 2026 9:58 AM IST
Bengal की खाड़ी में नया साइक्लोनिक सर्कुलेशन, ओडिशा में 15 मई तक आंधी-तूफान की चेतावनी
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Odisha ओडिशा: भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने शुक्रवार को जानकारी दी है कि बंगाल की खाड़ी (Bay of Bengal) के ऊपर एक नया अपर एयर साइक्लोनिक सर्कुलेशन (ऊपरी वायु चक्रवातीय परिसंचरण) विकसित हुआ है। विभाग के अनुसार यह सर्कुलेशन दक्षिण अंडमान सागर और आसपास के क्षेत्रों में समुद्र तल से लगभग 1.5 किलोमीटर ऊपर तक फैला हुआ है, जिससे क्षेत्रीय मौसम में बदलाव के संकेत मिल रहे हैं।

IMD ने यह भी बताया कि ओडिशा के अंदरूनी हिस्सों और उससे सटे छत्तीसगढ़ क्षेत्र के ऊपर मौजूद एक अन्य अपर एयर साइक्लोनिक सर्कुलेशन, जो पहले समुद्र तल से 1.5 किलोमीटर ऊपर सक्रिय था, अब कमजोर पड़ गया है और इसका असर कम हो गया है।

रीजनल मौसम केंद्र के अनुसार, एक ट्रफ लाइन भी सक्रिय है, जो दक्षिण-पश्चिम उत्तर प्रदेश और आसपास के क्षेत्रों में बने साइक्लोनिक सर्कुलेशन से शुरू होकर पूर्वी मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ होते हुए उत्तरी अंदरूनी ओडिशा तक फैली हुई है। यह ट्रफ समुद्र तल से लगभग 0.9 किलोमीटर ऊपर स्थित है, जिससे क्षेत्रीय मौसम में अस्थिरता बनी हुई है।

मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, ओडिशा के कई जिलों में 15 मई तक आंधी-तूफान की स्थिति बनी रह सकती है। इसके साथ ही बिजली गिरने और तेज हवाएं चलने की संभावना भी जताई गई है, जिससे जनजीवन प्रभावित हो सकता है।

IMD और मौसम विभाग (MeT) ने विशेष रूप से कई जिलों के लिए चेतावनी जारी की है। बालासोर, भद्रक, जाजपुर, केंद्रपाड़ा, कटक, जगतसिंहपुर, पुरी, खुर्दा, नयागढ़, गंजम, गजपति, रायगढ़, कोरापुट, मलकानगिरी, मयूरभंज और क्योंझर जैसे जिलों में 13 मई तक आंधी-तूफान, बिजली चमकने और तेज हवाओं की स्थिति बनी रह सकती है।

विभाग ने इन जिलों के लिए येलो वॉर्निंग जारी की है, जिसका मतलब है कि लोगों को सतर्क रहने और सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी गई है। किसानों और मछुआरों को भी विशेष सावधानी बरतने को कहा गया है, क्योंकि मौसम की यह स्थिति उनकी गतिविधियों को प्रभावित कर सकती है।

IMD ने कहा है कि मौसम की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और आवश्यकता पड़ने पर आगे और चेतावनी जारी की जाएगी। प्रशासन को भी आपदा प्रबंधन की तैयारियों को सक्रिय रखने के निर्देश दिए गए हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि बंगाल की खाड़ी में बन रहे ऐसे साइक्लोनिक सिस्टम और ट्रफ लाइन मानसून से पहले के मौसम में आम होते हैं, लेकिन इनसे अचानक तेज हवाएं और बारिश की स्थिति उत्पन्न हो सकती है, जिससे सावधानी जरूरी हो जाती है।

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