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ओडिशा मानवाधिकार आयोग में नई नियुक्ति, वकील बिराजा शंकर मिश्रा बने सदस्य

Kavita2
18 Aug 2026 6:00 PM IST
ओडिशा मानवाधिकार आयोग में नई नियुक्ति, वकील बिराजा शंकर मिश्रा बने सदस्य
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भुवनेश्वर। ओडिशा मानवाधिकार आयोग (OHRC) में एक महत्वपूर्ण नियुक्ति की गई है। राज्यपाल हरि बाबू कम्भमपति ने वरिष्ठ वकील बिराजा शंकर मिश्रा को ओडिशा मानवाधिकार आयोग का सदस्य नियुक्त किया है। कानून विभाग की ओर से मंगलवार को जारी अधिसूचना में इस नियुक्ति की जानकारी दी गई।

अधिसूचना के अनुसार, राज्यपाल ने यह नियुक्ति मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 (1994 का अधिनियम 10) की धारा 22(1) के तहत मिली शक्तियों का उपयोग करते हुए की है। यह नियुक्ति मिश्रा के पदभार ग्रहण करने की तारीख से प्रभावी होगी।

राज्य सरकार की ओर से जारी नोटिफिकेशन में कहा गया है कि बिराजा शंकर मिश्रा के कार्यभार संभालने के बाद ही उनकी नियुक्ति औपचारिक रूप से प्रभावी मानी जाएगी। इसके बाद वे ओडिशा मानवाधिकार आयोग में सदस्य के रूप में अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करेंगे।

मानवाधिकार मामलों में अहम भूमिका निभाएंगे मिश्रा

ओडिशा मानवाधिकार आयोग राज्य में नागरिकों के अधिकारों की रक्षा और मानवाधिकार उल्लंघन से जुड़े मामलों की सुनवाई करने वाली महत्वपूर्ण संस्था है। आयोग का उद्देश्य लोगों को न्याय दिलाना और प्रशासनिक व्यवस्था में जवाबदेही सुनिश्चित करना है।

बिराजा शंकर मिश्रा के आयोग में शामिल होने से संस्था की कार्यक्षमता को मजबूती मिलने की उम्मीद है। कानून के क्षेत्र में उनके अनुभव का इस्तेमाल मानवाधिकार से जुड़े मामलों की सुनवाई और निर्णय प्रक्रिया में किया जाएगा।

OHRC में अब तीन सदस्यीय व्यवस्था

ओडिशा मानवाधिकार आयोग के प्रमुख चेयरपर्सन के पद पर जस्टिस शत्रुघ्न पुजारी कार्यरत हैं। इसके अलावा आयोग में मौजूदा सदस्य के रूप में चित्त रंजन महापात्रा पहले से जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।

बिराजा शंकर मिश्रा की नियुक्ति के बाद आयोग में सदस्यों की संख्या बढ़ गई है। इससे लंबित मामलों के निपटारे और आयोग की गतिविधियों को गति मिलने की संभावना है।

मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम के तहत हुई नियुक्ति

मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 के तहत राज्य मानवाधिकार आयोगों का गठन किया जाता है। इन आयोगों का काम राज्य में मानवाधिकारों के उल्लंघन से जुड़े मामलों की जांच करना और पीड़ितों को राहत दिलाने के लिए सिफारिश करना होता है।

आयोग पुलिस कार्रवाई, हिरासत, प्रशासनिक लापरवाही और अन्य मामलों में शिकायतों की जांच कर सकता है। इसके अलावा आयोग सरकार और संबंधित विभागों को सुधारात्मक कदम उठाने की सलाह भी देता है।

कानून क्षेत्र से जुड़े हैं बिराजा शंकर मिश्रा

बिराजा शंकर मिश्रा कानून के क्षेत्र से जुड़े अनुभवी व्यक्ति हैं। उनकी नियुक्ति से आयोग को न्यायिक और कानूनी मामलों को समझने में मदद मिलने की उम्मीद है।

मानवाधिकार आयोग में ऐसे सदस्यों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि उन्हें शिकायतों की जांच, कानूनी पहलुओं का विश्लेषण और पीड़ितों के अधिकारों से जुड़े मामलों पर निर्णय लेने में योगदान देना होता है।

आयोग के कामकाज को मिलेगी मजबूती

ओडिशा मानवाधिकार आयोग में लंबे समय से कई तरह के मामले आते रहे हैं। इनमें पुलिस कार्रवाई, प्रशासनिक लापरवाही, नागरिक अधिकारों से जुड़े मामले और अन्य शिकायतें शामिल होती हैं।

नए सदस्य की नियुक्ति से आयोग में मामलों की सुनवाई और निर्णय प्रक्रिया को गति मिलने की संभावना है। इससे लोगों को समय पर राहत मिलने में मदद मिल सकती है।

राज्य सरकार की ओर से अधिसूचना जारी

कानून विभाग की ओर से जारी अधिसूचना में नियुक्ति से संबंधित सभी औपचारिक जानकारी दी गई है। इसमें बताया गया है कि राज्यपाल ने संवैधानिक और कानूनी अधिकारों के तहत यह नियुक्ति की है।

अब बिराजा शंकर मिश्रा के पदभार ग्रहण करने के बाद आयोग की नियमित कार्यप्रणाली में उनकी भागीदारी शुरू हो जाएगी।

मानवाधिकार आयोग जैसे संस्थानों में अनुभवी सदस्यों की नियुक्ति को प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जाता है। ओडिशा में भी इस नियुक्ति के बाद आयोग के कामकाज को और प्रभावी बनाने की उम्मीद जताई जा रही है।

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