
बालासोर ज़िले की जमुदिहा स्टोन खदान-2 में अवैध पत्थर खनन, पर्यावरण नियमों के उल्लंघन और तय सीमा से ज़्यादा खनिज निकालने के आरोपों पर पट्टेदार (lessee) के ख़िलाफ़ मामला।
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल एक्ट, 2010 के तहत पर्यावरण से जुड़े अहम सवाल उठाने वाली इस याचिका पर ईस्ट ज़ोन बेंच के दो सदस्यों - ज्यूडिशियल मेंबर अरुण कुमार त्यागी और एक्सपर्ट मेंबर ईश्वर सिंह - ने गौर किया।
यह अर्ज़ी मानस रंजन बारिक और मनोज परिडा ने दायर की है, जिनकी ओर से वकील शंकर प्रसाद पानी और आशुतोष पाढ़ी पेश हुए।
याचिका के अनुसार, नीलागिरी तहसील में 1.49 एकड़ की जमुदिहा स्टोन खदान-2 से कथित तौर पर मंज़ूर क्षमता से ज़्यादा काला पत्थर निकाला गया और ज़रूरी छमाही अनुपालन रिपोर्ट (compliance reports) जमा नहीं की गईं। याचिकाकर्ताओं का यह भी आरोप है कि वाइल्डलाइफ़ सैंक्चुअरी के 10 किलोमीटर के दायरे में होने के बावजूद खदान के पास कोई वाइल्डलाइफ़ मैनेजमेंट प्लान नहीं है। साथ ही, बार-बार ब्लास्टिंग करने से आस-पास के घरों में दरारें आ गई हैं और पर्यावरण मंज़ूरी की कई शर्तों का उल्लंघन हुआ है। याचिकाकर्ताओं ने खदान को 5 मई, 2025 को मिली पर्यावरण मंज़ूरी को रद्द करने, पर्यावरण नियमों के उल्लंघन और ज़्यादा खनन के लिए प्राइवेट पट्टेदार पर भारी जुर्माना लगाने, कथित लापरवाही के लिए सरकारी अधिकारियों की जवाबदेही तय करने और खनन से बने गड्ढों को ठीक करने (reclamation) की मांग की है।
ट्रिब्यूनल ने वन, पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन विभाग के एडिशनल चीफ सेक्रेटरी, बालासोर कलेक्टर, माइनिंग ऑफिसर, नीलागिरी तहसीलदार, स्टेट एनवायरनमेंट इम्पैक्ट असेसमेंट अथॉरिटी (SEIAA) और ओडिशा स्टेट पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (OSPCB) को नोटिस जारी करने का निर्देश दिया।





