ओडिशा

MKCG PG परीक्षा विवाद: OUHS ने पेपर लीक से किया इनकार

Kavita2
31 July 2026 2:35 PM IST
MKCG PG परीक्षा विवाद: OUHS ने पेपर लीक से किया इनकार
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भुवनेश्वर। ओडिशा के ब्रह्मपुर स्थित एमकेसीजी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (MKCG Medical College and Hospital) में आयोजित पोस्टग्रेजुएट (PG) एमडी/एमएस परीक्षा को लेकर उठे विवाद पर ओडिशा यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज़ (OUHS) के कुलपति प्रोफेसर (डॉ.) मानस रंजन साहू ने शुक्रवार को स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि इस मामले को "पेपर लीक" कहना उचित नहीं होगा, क्योंकि अब तक की शुरुआती जांच में ऐसा कोई प्रमाण सामने नहीं आया है। उनके अनुसार, प्रथम दृष्टया यह मामला परीक्षा प्रक्रिया में कथित अनियमितता या गड़बड़ी का प्रतीत होता है।

कुलपति डॉ. साहू ने कहा कि विश्वविद्यालय इस पूरे मामले को गंभीरता से ले रहा है और निष्पक्ष जांच कराई जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि तथ्यों की पुष्टि होने से पहले इसे पेपर लीक का मामला बताना उचित नहीं है। जांच पूरी होने के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय को परीक्षा से संबंधित शिकायतें प्राप्त हुई थीं, जिसके बाद तत्काल प्रारंभिक जांच शुरू कराई गई। जांच के दौरान उपलब्ध तथ्यों और दस्तावेजों का अध्ययन किया गया, जिसमें अब तक पेपर लीक जैसी स्थिति सामने नहीं आई है। हालांकि, परीक्षा संचालन में कुछ गड़बड़ियों के संकेत मिले हैं, जिनकी विस्तृत जांच की जा रही है।

डॉ. साहू ने कहा कि यदि जांच में किसी भी स्तर पर लापरवाही, अनियमितता या नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ विश्वविद्यालय के नियमों के अनुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से पूरी की जाएगी और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।

एमकेसीजी मेडिकल कॉलेज राज्य के प्रमुख सरकारी चिकित्सा संस्थानों में से एक है। यहां आयोजित पीजी परीक्षाओं में बड़ी संख्या में छात्र शामिल होते हैं। ऐसे में परीक्षा से जुड़ा कोई भी विवाद छात्रों के भविष्य और विश्वविद्यालय की विश्वसनीयता दोनों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।

हाल के दिनों में परीक्षा को लेकर उठे विवाद के बाद राजनीतिक प्रतिक्रिया भी सामने आई है। विपक्षी दलों ने इस मामले को लेकर राज्य सरकार और स्वास्थ्य विभाग पर सवाल उठाए हैं तथा निष्पक्ष जांच की मांग की है। वहीं कुछ संगठनों ने इसे पेपर लीक करार देते हुए दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की थी।

हालांकि कुलपति के ताजा बयान के बाद विश्वविद्यालय ने यह स्पष्ट करने की कोशिश की है कि बिना जांच पूरी हुए किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा। उन्होंने कहा कि जांच के आधार पर ही यह तय किया जाएगा कि परीक्षा में किस स्तर पर और किस प्रकार की अनियमितता हुई।

विश्वविद्यालय प्रशासन ने यह भी आश्वस्त किया कि छात्रों के हितों की पूरी तरह रक्षा की जाएगी। यदि जांच के दौरान यह आवश्यक पाया गया कि परीक्षा प्रक्रिया में किसी प्रकार का सुधार या अन्य कदम उठाने की जरूरत है, तो विश्वविद्यालय समय पर उचित निर्णय लेगा।

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि उच्च शिक्षा संस्थानों में परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। किसी भी प्रकार की अनियमितता छात्रों के विश्वास को प्रभावित कर सकती है। इसलिए ऐसे मामलों की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच बेहद जरूरी होती है।

इस बीच विश्वविद्यालय ने सभी संबंधित अधिकारियों और परीक्षा से जुड़े कर्मचारियों से जांच में पूरा सहयोग करने को कहा है। साथ ही छात्रों और अभिभावकों से अपील की गई है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करें।

फिलहाल मामले की जांच जारी है और विश्वविद्यालय का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि जांच में क्या निष्कर्ष निकलते हैं और विश्वविद्यालय परीक्षा की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए आगे क्या कदम उठाता है।

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