ओडिशा

पुरी में जगन्नाथ संस्कृति का संदेश

SHIDDHANT
19 Nov 2025 9:41 PM IST
पुरी में जगन्नाथ संस्कृति का संदेश
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Odisha ओडिशा। भगवान जगन्नाथ की पावन धरती पर मंगलवार को जगन्नाथ संस्कृति के प्रख्यात प्रचारक पंडित सूर्य नारायण रथ शर्मा ने सनातन धर्म के मूल सिद्धांतों और पितृ श्रद्धा के महत्व पर गहरा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि श्रीजगन्नाथ महाप्रभु के पवित्र मंदिर में मानवता को आशीष प्राप्त होता है, और यह स्थान भारतीय संस्कृति के मूल्यों का जीवंत प्रतीक है।
पंडित रथ शर्मा ने कहा कि भारतीय संस्कृति और सनातन धर्म में पितृ—अर्थात् पूर्वज—दैवीय रूप माने जाते हैं, जिनका सम्मान करना हर मानव का कर्तव्य है। उन्होंने बताया कि सनातन परंपरा में पितरों को प्रथम देवता माना गया है और माता-पिता को प्रथम गुरु की उपाधि दी गई है। “माता और पिता ही वह ज्ञान देते हैं, जो जीवन का आधार बनता है। उनका सम्मान करना ही सर्वोच्च धर्म है,” उन्होंने कहा।
उन्होंने बताया कि भगवान जगन्नाथ महाप्रभु की परंपरा भी इसी आदर्श को आगे बढ़ाती है। जगन्नाथ मंदिर में हर अनुष्ठान और रीतियों का उद्देश्य मनुष्य को परिवार, समाज और पूर्वजों के प्रति कर्तव्य का बोध कराना है। पंडित शर्मा ने कहा कि सनातन धर्म का सार यही है कि हम अपने माता-पिता, पूर्वजों और गुरुजनों का सम्मान करें और उनके सिद्धांतों को जीवन में उतारें।
रथ शर्मा के अनुसार, आज की पीढ़ी को अपने मूल से जुड़ने की आवश्यकता है। “आधुनिकता के दौर में लोग आध्यात्मिक जड़ों से दूर हो रहे हैं। ऐसे समय में जगन्नाथ संस्कृति मार्गदर्शन देती है कि धर्म का आधार सम्मान, कृतज्ञता और सेवा है,” उन्होंने कहा।
उन्होंने यह भी बताया कि जगन्नाथ परंपरा में जगत का कल्याण सर्वोपरि माना गया है। मंदिर के रीतिरिवाज, महाप्रभु का भोग, सेवा और सामाजिक एकता की परंपराएं विश्व को प्रेम और सद्भाव का संदेश देती हैं। पंडित रथ शर्मा ने लोगों से अपील की कि वे अपने माता-पिता और पूर्वजों के प्रति सम्मान की भावना को जीवन का मंत्र बनाएं और सनातन धर्म के मूल्यों को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाएं।
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