
Odisha ओडिशा: ओडिशा के मयूरभंज जिले में एक बेहद संवेदनशील मामला सामने आया है, जहां एक 80 वर्षीय बुजुर्ग महिला को कथित तौर पर जंगल में छोड़ दिया गया। हालांकि, पुलिस की त्वरित कार्रवाई से महिला को सुरक्षित बचा लिया गया और बाद में उन्हें वृद्धाश्रम में भेज दिया गया।
बुजुर्ग महिला की पहचान रुक्मणी पात्रा के रूप में हुई है, जो भुवासुनी पंचायत के अंतर्गत कंडोलिया गांव की रहने वाली हैं। वह अपने बेटे गोलक चंद्र पात्रा के साथ रह रही थीं। बताया जा रहा है कि उम्र संबंधी बीमारियों और स्वास्थ्य समस्याओं के कारण उन्हें लगातार देखभाल की आवश्यकता थी।
रिपोर्ट्स के अनुसार, उनके पोते तपन कुमार पात्रा पर आरोप है कि उन्होंने रुक्मणी पात्रा को बांगीरीपोसी ब्लॉक के पास स्थित जंगल में छोड़ दिया। आरोप यह भी है कि बुजुर्ग महिला की देखभाल को लेकर परिवार में परेशानियां चल रही थीं, जिसके चलते यह कदम उठाया गया।
घटना की जानकारी सबसे पहले पूर्व ब्लॉक चेयरमैन सुबोध मारंडी को मिली, जिन्होंने तुरंत पुलिस को सूचित किया। सूचना मिलते ही पुलिस टीम ने बिना देरी किए कार्रवाई शुरू की और जंगल में सर्च ऑपरेशन चलाया।
कुछ समय बाद पुलिस टीम ने जंगल से बुजुर्ग महिला को सुरक्षित अवस्था में ढूंढ निकाला। उन्हें तत्काल प्राथमिक सहायता दी गई और सुरक्षित स्थान पर लाया गया। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि महिला की स्थिति फिलहाल स्थिर है, लेकिन उन्हें लगातार देखभाल की जरूरत है।
इसके बाद प्रशासन की मदद से रुक्मणी पात्रा को एक वृद्धाश्रम में स्थानांतरित कर दिया गया, जहां उनकी उचित देखभाल और सुरक्षा की व्यवस्था की गई है।
इस घटना ने क्षेत्र में मानवीय संवेदनाओं और बुजुर्गों की देखभाल को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों ने भी इस घटना पर नाराजगी जताई है और कहा है कि परिवारों को बुजुर्गों की जिम्मेदारी समझनी चाहिए।
पुलिस ने मामले में आरोपी पोते तपन कुमार पात्रा के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है और आगे की जांच शुरू कर दी गई है। अधिकारियों का कहना है कि जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसके आधार पर आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
यह घटना एक बार फिर समाज में बुजुर्गों के प्रति जिम्मेदारी और देखभाल की आवश्यकता को उजागर करती है।





