ओडिशा

रायगडा में ट्रेन की चपेट में आया नर हाथी, बिशमकटैक में रेलवे ट्रैक पर हुई दर्दनाक घटना

Kavita2
10 Sept 2026 10:09 AM IST
रायगडा में ट्रेन की चपेट में आया नर हाथी, बिशमकटैक में रेलवे ट्रैक पर हुई दर्दनाक घटना
x

रायगडा। ओडिशा के रायगडा जिले में रेलवे ट्रैक पार करने के दौरान एक नर हाथी की ट्रेन की चपेट में आने से मौत हो गई। घटना बुधवार देर रात बिशमकटैक ब्लॉक के बुरुंदाबाड़ी इलाके के पास हुई। शुरुआती जानकारी के मुताबिक हाथी को रेलवे लाइन पर चल रहे एक बैंकर लाइट इंजन ने टक्कर मारी। हादसे के बाद वन विभाग और रेलवे सुरक्षा बल (RPF) की टीम मौके पर पहुंची और घटनास्थल का निरीक्षण किया।

घटना बिशमकटैक-थेरुबली रेलवे ट्रैक पर हुई। बताया जा रहा है कि हाथियों का एक झुंड इलाके में घूम रहा था। इसी दौरान एक नर हाथी रेलवे लाइन तक पहुंच गया और इंजन की चपेट में आ गया। टक्कर इतनी जोरदार थी कि हाथी की मौके पर ही मौत हो गई।

रेलवे ट्रैक से तीन मीटर दूर मिला शव

हादसे के बाद हाथी का शव रेलवे ट्रैक से करीब तीन मीटर की दूरी पर मिला। घटना की जानकारी मिलने के बाद रेलवे सुरक्षा बल और वन विभाग के कर्मचारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने घटनास्थल का निरीक्षण करने के साथ आसपास के क्षेत्र में हाथियों की मौजूदगी की भी जानकारी जुटाई।

वन विभाग की टीम ने आसपास के इलाकों में हाथियों के झुंड की गतिविधियों का पता लगाने की कोशिश की। अधिकारियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह सुनिश्चित करना है कि झुंड के बाकी हाथी रेलवे लाइन के आसपास न पहुंचें और कोई दूसरी दुर्घटना न हो।

चार हाथियों का झुंड इलाके में था मौजूद

स्थानीय सूत्रों के अनुसार, पड़ोसी कालाहांडी जिले की ओर से चार हाथियों का एक झुंड रायगडा जिले के बिशमकटैक ब्लॉक में पहुंचा था। यह झुंड भाटपुर-बुरुंदाबाड़ी क्षेत्र में घूम रहा था।

हाथियों की आवाजाही के कारण इलाके में पहले से ही लोगों के बीच सतर्कता बनी हुई थी। इसी दौरान झुंड का एक नर हाथी रेलवे ट्रैक की ओर पहुंच गया। रात के समय दृश्यता कम होने और रेलवे लाइन पर इंजन की आवाजाही के कारण हादसा हुआ।

वन विभाग की ओर से झुंड की लोकेशन पर नजर रखे जाने की संभावना है, ताकि हाथी आबादी वाले इलाकों या रेलवे ट्रैक की ओर न बढ़ें।

रेलवे और वन विभाग ने शुरू की जांच

घटना के बाद रेलवे सुरक्षा बल और वन विभाग की टीमों ने मौके पर पहुंचकर प्रारंभिक जांच की। अधिकारी यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि हाथी रेलवे ट्रैक तक किस रास्ते से पहुंचा और हादसे के समय इंजन की गति कितनी थी।

रेलवे ट्रैक पर हाथियों की आवाजाही वाले क्षेत्रों में विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता होती है। वन विभाग और रेलवे के बीच समन्वय के जरिए ऐसे इलाकों की पहचान की जाती है, जहां हाथियों की आवाजाही अधिक रहती है।

घटना के बाद रेलवे अधिकारियों की ओर से भी आवश्यक जानकारी जुटाई जा सकती है। हादसे की परिस्थितियों की विस्तृत जांच के बाद ही दुर्घटना के कारणों को लेकर स्थिति स्पष्ट होगी।

हाथियों की आवाजाही से बढ़ती चुनौती

ओडिशा के कई जिलों में हाथियों की आवाजाही लंबे समय से वन विभाग और रेलवे के लिए चुनौती रही है। जंगलों से भोजन और पानी की तलाश में हाथी कई बार अपने प्राकृतिक आवास से बाहर निकलकर खेतों, गांवों और रेलवे ट्रैक के आसपास पहुंच जाते हैं।

रेलवे लाइन जंगल और हाथियों के पारंपरिक मार्गों से गुजरने की स्थिति में दुर्घटना का खतरा बढ़ जाता है। रात के समय यह जोखिम और अधिक बढ़ जाता है, क्योंकि लोको पायलटों के लिए ट्रैक पर मौजूद हाथियों को समय रहते देख पाना मुश्किल हो सकता है।

ऐसे मामलों को रोकने के लिए रेलवे और वन विभाग को हाथियों की गतिविधियों की नियमित जानकारी साझा करनी होती है।

हाथियों के लिए सुरक्षित कॉरिडोर की जरूरत

वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार हाथियों की आवाजाही वाले क्षेत्रों में सुरक्षित कॉरिडोर बनाए रखना बेहद जरूरी है। यदि उनके पारंपरिक रास्तों में सड़क, रेलवे लाइन या अन्य मानवीय गतिविधियां बढ़ती हैं तो वन्यजीवों के साथ टकराव की संभावना बढ़ जाती है।

रेलवे ट्रैक पर हाथियों की मौजूदगी की जानकारी पहले से मिलने पर ट्रेनों और इंजनों की गति नियंत्रित करने जैसे कदम उठाए जा सकते हैं। इसके अलावा संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने और चेतावनी प्रणाली विकसित करने की भी जरूरत होती है।

रायगडा की घटना के बाद एक बार फिर रेलवे ट्रैक के आसपास हाथियों की सुरक्षा का मुद्दा सामने आया है।

झुंड की निगरानी महत्वपूर्ण

हादसे में एक हाथी की मौत के बाद अब बाकी तीन हाथियों की सुरक्षा को लेकर वन विभाग को विशेष सतर्कता बरतनी होगी। यदि झुंड अभी भी बिशमकटैक क्षेत्र में मौजूद है तो उसके रेलवे लाइन या आबादी वाले क्षेत्रों में पहुंचने की आशंका बनी रह सकती है।

वन विभाग की टीम हाथियों की गतिविधियों पर नजर रख सकती है और आवश्यकता पड़ने पर उन्हें सुरक्षित दिशा में ले जाने के प्रयास किए जा सकते हैं। स्थानीय ग्रामीणों को भी हाथियों की मौजूदगी की स्थिति में दूरी बनाए रखने और वन विभाग को सूचना देने की सलाह दी जाती है।

मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकना बड़ी चुनौती

हाथी जैसे बड़े वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास और मानव बस्तियों के बीच बढ़ती गतिविधियों के कारण मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं सामने आती रहती हैं। रेलवे लाइन, सड़क और कृषि क्षेत्रों के विस्तार से हाथियों के पारंपरिक मार्ग प्रभावित हो सकते हैं।

ऐसे में वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए विकास कार्यों के साथ पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखना भी जरूरी है। रेलवे परियोजनाओं में हाथी कॉरिडोर और वन्यजीवों की आवाजाही को ध्यान में रखकर सुरक्षा उपाय करना महत्वपूर्ण है।

रायगडा जिले के बिशमकटैक में हुई इस घटना ने एक बार फिर रेलवे ट्रैक पर वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। बुरुंदाबाड़ी के पास बैंकर लाइट इंजन की टक्कर से एक नर हाथी की मौत हो गई, जबकि इलाके में घूम रहे बाकी हाथियों की सुरक्षा अब वन विभाग के लिए प्राथमिकता बन गई है। फिलहाल रेलवे सुरक्षा बल और वन विभाग की टीमें घटनास्थल पर स्थिति की निगरानी कर रही हैं और हाथियों के झुंड की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है।

Next Story