ओडिशा

ओडिशा पेपर लीक कांड में बड़ा खुलासा, ईडी की जांच का दायरा बढ़ा

Kiran
18 Oct 2026 4:19 PM IST
ओडिशा पेपर लीक कांड में बड़ा खुलासा, ईडी की जांच का दायरा बढ़ा
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भुवनेश्वर/नई दिल्ली: अधिकारियों ने रविवार को बताया कि ओडिशा में 2024 पुलिस सब-इंस्पेक्टर परीक्षा का पेपर लीक होने के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच में ओडिशा पुलिस भर्ती बोर्ड (OPRB) के कुछ अधिकारियों और निजी संस्थाओं की भूमिका सामने आई है, जो अब तक जांच के दायरे से बाहर थे। अधिकारियों ने PTI को बताया कि इन लोगों की जांच करने के अलावा, केंद्रीय एजेंसी अपराध से हुई कमाई का पता लगाने की भी कोशिश कर रही है। यह पैसा कथित तौर पर उम्मीदवारों द्वारा नकद में दिया गया था, जिसका इस्तेमाल "अवैध" संपत्ति बनाने के लिए किया गया। एजेंसी 'प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट' (PMLA) के तहत ऐसी संपत्तियों को जब्त करने की कार्रवाई कर रही है। पिछले हफ्ते ED ने ओडिशा और पश्चिम बंगाल में एक दर्जन जगहों पर छापेमारी की थी।
इनमें सिलिकॉन टेकलैब प्राइवेट लिमिटेड (STPL), पंचसॉफ्ट टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड और PSIL इंटरनेशनल लिमिटेड जैसी निजी कंपनियों के ठिकाने शामिल हैं, जो परीक्षा आयोजित करने में शामिल थीं। अधिकारियों ने बताया कि नए सबूत और जानकारी मिलने के बाद जांच का दायरा बढ़ाया जा रहा है, जिसमें OPRB के कुछ अधिकारियों की भूमिका की जांच भी शामिल है।
ED ने 14 अक्टूबर को एक बयान में कहा कि उसने "ऐसी कंपनियों/संस्थाओं की भूमिका का पता लगाया है, जो अब तक एजेंसियों की जांच के दायरे से बाहर थीं।" एजेंसी ने कहा कि छापेमारी में अन्य लोगों की "संभावित भूमिका" भी सामने आई है, जिनमें OPRB से जुड़े लोग भी शामिल हैं। “ऐसी संस्थाएं पूरी परीक्षा प्रक्रिया से गहराई से जुड़ी पाई गई हैं।
एजेंसी ने कहा, “अब तक की जांच और तलाशी के दौरान मिले सबूतों से पता चलता है कि प्रश्न पत्र लीक करने का काम एक सुनियोजित तरीके से किया गया था। इसमें उम्मीदवारों से नकद रकम लेकर अपराध के जरिए बड़ी कमाई की गई।” जांच में पता चला कि OPRB ने परीक्षा कराने का काम केंद्र सरकार के PSU, ITI लिमिटेड को सौंपा था, जिसने आगे चलकर यह काम भुवनेश्वर स्थित STPL को “सौंप” दिया।
पता चला कि STPL के निदेशक एस. सी. नायक ने ITI लिमिटेड की “लिखित अनुमति के बिना” उम्मीदवारों की “संवेदनशील” जानकारी संभालने का काम पंचसॉफ्ट टेक्नोलॉजी (Panchsoft Technology) को दे दिया। ED ने अपने बयान में दावा किया कि सिलिकॉन टेकलैब (Silicon Techlab) और पंचसॉफ्ट के निदेशक शंकर प्रुस्टी से जुड़े लोगों ने उम्मीदवारों से “संपर्क” किया। उन्होंने उम्मीदवारों को पैसे के बदले परीक्षा पत्र की गोपनीय जानकारी देने का “लालच” दिया और उन्हें एकजुट किया। ED ने यह भी आरोप लगाया कि STPL की “नियंत्रण हिस्सेदारी और बहुमत शेयर” PSIL इंटरनेशनल लिमिटेड नाम की एक कंपनी ने “हथिया” लिए थे, और इस बारे में ITI लिमिटेड को कोई जानकारी नहीं दी गई।
ED के अनुसार, नायक STPL के निदेशक बने रहे और उन्होंने “बिना किसी अधिकार के” परीक्षा पत्रों तक पहुंच बनाई। ED का यह PMLA मामला ओडिशा पुलिस की उस FIR से जुड़ा है, जो सितंबर 2025 में दर्ज की गई थी। तब पुलिस ने आंध्र प्रदेश और ओडिशा की सीमा के पास इच्छापुरम के पास तीन बसों को रोका था, जिनमें उक्त परीक्षा के 114 उम्मीदवार सवार थे। आरोप है कि उम्मीदवारों से कहा गया था कि उन्हें 5 और 6 अक्टूबर (पिछले साल) को होने वाली परीक्षा का “लीक” प्रश्न पत्र मिल जाएगा, जिसके बदले में उन्हें 15 लाख से 30 लाख रुपये तक नकद देने होंगे। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने भी इस मामले की जांच की थी। ED के मुताबिक, CBI ने अदालत में एक चार्जशीट दाखिल की, जिसमें बताया गया कि मार्च 2025 में—जब यह परीक्षा पहली बार आयोजित होनी थी—इसमें कई तरह की अनियमितताएं हुई थीं, और इन मुद्दों के सामने आने के बाद... पता चला कि OPRB ने परीक्षाएं रद्द कर दी थीं।
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