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भुवनेश्वर। ओडिशा में गुरुवार, 8 अक्टूबर 2026 को विपक्षी INDIA गठबंधन ने विभिन्न मांगों को लेकर राज्यव्यापी बंद आयोजित किया। इस दौरान गठबंधन के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार के माइंस एंड मिनरल्स (डेवलपमेंट एंड रेगुलेशन) संशोधन अधिनियम, 2026 को वापस लेने की मांग उठाई। इसके साथ ही ओडिशा के स्कूल एवं जन शिक्षा मंत्री नित्यानंद गोंड और देश के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी की गई। गठबंधन ने खनिज संसाधनों पर राज्य के अधिकार, मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को लेकर विरोध दर्ज कराया।बंद का आह्वान कांग्रेस और INDIA गठबंधन के सहयोगी दलों ने किया था। विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि संशोधित खनन कानून से ओडिशा के खनिज संसाधनों और उनसे मिलने वाले राजस्व पर राज्य के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। हालांकि, सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी ने इन आरोपों को खारिज किया है
खनन संपत्ति अधिकार वापस देने की मांग
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सुरेश कुमार रौतरे ने कहा कि ओडिशा बंद की सबसे महत्वपूर्ण मांग राज्य के खनन संपत्ति अधिकारों को वापस दिलाना है। उन्होंने दावा किया कि ओडिशा के खनिज संसाधनों का मूल्य लाखों करोड़ रुपये है और इन संसाधनों पर राज्य के हितों की रक्षा की जानी चाहिए।रौतरे ने कहा कि ओडिशा के खनन संपत्ति अधिकार राज्य को वापस सौंपे जाने चाहिए। उन्होंने संशोधित खनन कानून का विरोध करते हुए कहा कि राज्य के प्राकृतिक संसाधनों से संबंधित अधिकारों और आर्थिक हितों की अनदेखी नहीं की जानी चाहिए।कांग्रेस नेता के मुताबिक, खनिज संपदा का मुद्दा केवल आर्थिक संसाधनों तक सीमित नहीं है, बल्कि राज्य के अधिकारों और विकास से भी जुड़ा हुआ है।विपक्षी गठबंधन का आरोप है कि नए कानून से राज्य की खनिज संपदा और उससे मिलने वाले राजस्व पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। हालांकि, इन दावों को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच मतभेद हैं।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग
ओडिशा बंद के दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ भी विपक्षी नेताओं ने विरोध जताया। कांग्रेस नेता सुरेश कुमार रौतरे ने उन पर चुनावी प्रक्रिया से संबंधित गंभीर आरोप लगाते हुए इस्तीफे और गिरफ्तारी की मांग की।रौतरे ने आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त के कार्यों से ओडिशा के मतदाताओं के हितों को नुकसान पहुंचा है। उन्होंने मतदाता सूची से जुड़े मामलों को लेकर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।हालांकि, ये विपक्षी नेताओं के आरोप हैं और इन्हें किसी न्यायिक जांच में सिद्ध तथ्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ विरोध विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR प्रक्रिया से जुड़ी कथित अनियमितताओं को लेकर हो रहा है। देश के विभिन्न हिस्सों में विपक्षी दल मतदाता सूची में नाम हटाए जाने और चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर सवाल उठा रहे हैं। चुनाव आयोग और भाजपा ने चुनावी गड़बड़ी के आरोपों से इनकार किया है।
शिक्षा मंत्री नित्यानंद गोंड का इस्तीफा भी मांगा
INDIA गठबंधन ने ओडिशा के स्कूल एवं जन शिक्षा मंत्री नित्यानंद गोंड के इस्तीफे की मांग भी उठाई है।विपक्षी दलों ने राज्य की स्कूली पाठ्यपुस्तकों में कथित गंभीर त्रुटियों को लेकर शिक्षा मंत्री की जिम्मेदारी तय करने की मांग की। कांग्रेस का आरोप है कि पाठ्यपुस्तकों में गलत जानकारियां सामने आने के बाद संबंधित विभाग की जवाबदेही निर्धारित की जानी चाहिए।इस मुद्दे को लेकर पहले भी राज्य में राजनीतिक विरोध प्रदर्शन हुए हैं। विपक्ष ने शिक्षा मंत्री से पद छोड़ने की मांग की है।दूसरी ओर, भाजपा नेताओं का कहना है कि पाठ्यपुस्तकों में गलतियों के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की जा चुकी है और मामले की जांच चल रही है।
12 घंटे के बंद का किया गया आयोजन
INDIA गठबंधन ने सुबह से शाम तक 12 घंटे के बंद का आह्वान किया था। गठबंधन की ओर से कार्यकर्ताओं को शांतिपूर्ण और अनुशासित तरीके से विरोध प्रदर्शन करने की अपील की गई।बंद के दौरान दुकानों, बाजारों, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और निजी कार्यालयों से गतिविधियां बंद रखने का अनुरोध किया गया।हालांकि, गठबंधन ने आवश्यक और आपातकालीन सेवाओं को बंद से बाहर रखने का निर्णय लिया। अस्पताल, एंबुलेंस, दमकल सेवाएं, दवा दुकानें और दूध की आपूर्ति जैसी आवश्यक सुविधाओं को प्रभावित नहीं करने की बात कही गई।बंद के कारण राज्य के कुछ क्षेत्रों में परिवहन और बाजारों की सामान्य गतिविधियां प्रभावित हुईं। ऑटो-रिक्शा सेवाओं पर भी असर देखा गया। भुवनेश्वर में कुछ बस मार्गों पर सेवाएं बाधित होने की आशंका जताई गई थी।
बाढ़ पीड़ितों के लिए राहत की मांग भी शामिल
खनन कानून और इस्तीफों की मांग के अलावा INDIA गठबंधन ने राज्य में बाढ़ से प्रभावित लोगों के लिए पर्याप्त राहत और मुआवजे की मांग भी उठाई।विपक्षी दलों का कहना है कि बाढ़ प्रभावित परिवारों के पुनर्वास और आर्थिक सहायता पर ध्यान दिया जाना चाहिए।गठबंधन ने इस मुद्दे को भी राज्यव्यापी आंदोलन की प्रमुख मांगों में शामिल किया। विपक्ष के अनुसार, प्राकृतिक आपदा से प्रभावित परिवारों को पर्याप्त सहयोग उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है
बीजद ने बंद से बनाई दूरी
ओडिशा की प्रमुख विपक्षी पार्टी बीजू जनता दल (BJD) ने INDIA गठबंधन के इस राज्यव्यापी बंद में भाग नहीं लेने का फैसला किया।इससे पहले पार्टी की ओर से बंद को समर्थन देने की बात सामने आई थी, लेकिन बाद में बीजद ने अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए आंदोलन से दूरी बना ली।पार्टी नेताओं ने कहा कि बीजद राज्य और जनता के हितों से जुड़े मुद्दों पर अपनी स्वतंत्र राजनीतिक स्थिति बनाए रखेगी। बीजद ने चुनाव आयोग से संबंधित मुद्दों पर विपक्ष के प्रदर्शन में भागीदारी की थी, लेकिन उसे INDIA गठबंधन में औपचारिक रूप से शामिल होने का संकेत नहीं बताया।
पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था पर दिया ध्यान
राज्यव्यापी बंद को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था पर ध्यान दिया। अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों से शांतिपूर्ण तरीके से विरोध दर्ज कराने की अपील की।भुवनेश्वर-कटक पुलिस आयुक्त एस. देव दत्ता सिंह ने बताया कि विभिन्न पक्षों से बातचीत की गई, ताकि विरोध प्रदर्शन संवैधानिक अधिकारों की सीमा में रहते हुए आयोजित हों।पुलिस का उद्देश्य बंद के दौरान कानून व्यवस्था बनाए रखना और किसी भी अप्रिय घटना को रोकना रहा।
ओडिशा में राजनीतिक विरोध तेज
ओडिशा में संशोधित खनन कानून, मतदाता सूची और स्कूली शिक्षा से संबंधित विवादों ने राजनीतिक विरोध को तेज कर दिया है।कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों ने इन मुद्दों को लेकर सरकार से जवाबदेही की मांग की है। वहीं, भाजपा ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए संशोधित खनन कानून को खनन व्यवस्था में सुधार से जुड़ा कदम बताया है।कांग्रेस नेता सुरेश कुमार रौतरे ने बंद का समर्थन करने वालों को धन्यवाद देते हुए कहा कि आंदोलन का उद्देश्य राज्य के हितों और जनता के अधिकारों से जुड़े मुद्दों को उठाना है।इस राज्यव्यापी बंद के माध्यम से INDIA गठबंधन ने खनिज संसाधनों पर राज्य के अधिकारों, चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता, शिक्षा विभाग की जवाबदेही और बाढ़ पीड़ितों की सहायता को प्रमुख राजनीतिक मुद्दों के रूप में सामने रखा है।
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