ओडिशा

जगन्नाथ की 1.5 एकड़ जमीन पर बड़ा फैसला

Kavita2
4 Oct 2026 3:56 PM IST
जगन्नाथ की 1.5 एकड़ जमीन पर बड़ा फैसला
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पुरी। ओडिशा के पुरी में भगवान जगन्नाथ से जुड़ी भूमि संपत्तियों की सुरक्षा को लेकर राजस्व बोर्ड ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। बोर्ड ने श्रीगुंडिचा मंदिर और शरधाबली के पास स्थित करीब 1.5 एकड़ मूल्यवान ‘अमृत मनोही’ भूमि को दोबारा महाप्रभु जगन्नाथ के नाम दर्ज करने का निर्देश दिया है। इस फैसले को भगवान जगन्नाथ की संपत्तियों और मंदिर से संबंधित जमीन के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

मामला पुरी के मौजा तालबनिया क्षेत्र में स्थित जमीन से संबंधित है। इस भूमि को लेकर दो अलग-अलग मामले राजस्व बोर्ड के सामने पहुंचे थे। इनमें जमीन की किस्म यानी ‘किसम’ में बदलाव और निजी स्वामित्व अधिकारों को मान्यता देने का दावा किया गया था। मामलों की सुनवाई के बाद राजस्व बोर्ड के सदस्य सत्यव्रत साहू ने संबंधित अधिकारियों को भूमि अभिलेखों में आवश्यक सुधार करते हुए जमीन को फिर से भगवान जगन्नाथ के नाम दर्ज करने का आदेश दिया।

पुरी में भगवान जगन्नाथ के नाम पर अलग-अलग क्षेत्रों में बड़ी संख्या में भूमि संपत्तियां दर्ज हैं। इनमें से कई संपत्तियों का धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व है। ‘अमृत मनोही’ श्रेणी की जमीन को भी भगवान जगन्नाथ से जुड़ी विशेष भूमि माना जाता है। ऐसे में इस जमीन के स्वामित्व और रिकॉर्ड में किसी भी तरह के बदलाव का मामला संवेदनशील माना जाता है।

राजस्व बोर्ड के सामने आए दोनों मामलों में मुख्य विवाद जमीन के रिकॉर्ड और उसके स्वामित्व को लेकर था। दावा किया गया था कि भूमि की किस्म में बदलाव किया गया और इसके आधार पर निजी स्वामित्व अधिकारों को मान्यता देने की प्रक्रिया आगे बढ़ी। राजस्व बोर्ड ने मामले से जुड़े दस्तावेजों और रिकॉर्ड का परीक्षण करने के बाद भूमि को फिर से महाप्रभु जगन्नाथ के नाम दर्ज करने का निर्देश दिया।

इस फैसले के बाद संबंधित राजस्व अधिकारियों को अब भूमि रिकॉर्ड में आवश्यक बदलाव करने होंगे। रिकॉर्ड ऑफ राइट्स सहित संबंधित अभिलेखों में जमीन का स्वामित्व भगवान जगन्नाथ के नाम बहाल किया जाएगा। इससे जमीन की स्थिति को लेकर लंबे समय से बने विवाद को स्पष्ट करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

जिस भूमि को लेकर फैसला आया है, उसकी स्थिति भी इसे बेहद महत्वपूर्ण बनाती है। जमीन श्रीगुंडिचा मंदिर और शरधाबली के निकट स्थित बताई गई है। पुरी में भगवान जगन्नाथ की वार्षिक रथयात्रा के दौरान श्रीगुंडिचा मंदिर और उसके आसपास का पूरा क्षेत्र धार्मिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र बन जाता है। लाखों श्रद्धालु रथयात्रा और अन्य धार्मिक आयोजनों के दौरान यहां पहुंचते हैं।

श्रीगुंडिचा मंदिर भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा से सीधे जुड़ा हुआ है। रथयात्रा के दौरान भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा अपने रथों पर सवार होकर श्रीमंदिर से श्रीगुंडिचा मंदिर पहुंचते हैं। इसी कारण इस इलाके में स्थित मंदिर से संबंधित भूमि का धार्मिक और प्रशासनिक महत्व और बढ़ जाता है।

पुरी में जमीन की कीमतों में लगातार वृद्धि के कारण मंदिर से जुड़ी संपत्तियों की सुरक्षा का मुद्दा भी महत्वपूर्ण बना हुआ है। विशेष रूप से प्रमुख धार्मिक और पर्यटन स्थलों के आसपास मौजूद जमीन बेहद मूल्यवान मानी जाती है। ऐसे क्षेत्रों में भूमि रिकॉर्ड और स्वामित्व को लेकर विवाद सामने आने पर प्रशासनिक स्तर पर विशेष सतर्कता की जरूरत होती है।

राजस्व बोर्ड के आदेश का असर केवल संबंधित 1.5 एकड़ जमीन तक सीमित नहीं माना जा रहा। यह फैसला मंदिर की अन्य भूमि संपत्तियों के रिकॉर्ड की निगरानी और संरक्षण के लिए भी महत्वपूर्ण उदाहरण बन सकता है। यदि मंदिर से संबंधित अन्य जमीनों के स्वामित्व या रिकॉर्ड में इसी तरह की विसंगतियां सामने आती हैं तो उनकी भी जांच की मांग उठ सकती है।

भगवान जगन्नाथ की भूमि संपत्तियों का प्रबंधन लंबे समय से प्रशासन और श्रीजगन्नाथ मंदिर से जुड़े अधिकारियों के लिए महत्वपूर्ण विषय रहा है। विभिन्न जिलों और राज्यों में भी भगवान जगन्नाथ के नाम पर जमीन होने की जानकारी समय-समय पर सामने आती रही है। ऐसी संपत्तियों की पहचान, रिकॉर्ड का सत्यापन और अतिक्रमण से सुरक्षा प्रशासन के सामने बड़ी जिम्मेदारी है।

राजस्व रिकॉर्ड में जमीन का सही स्वामित्व दर्ज होना इसलिए भी जरूरी है क्योंकि इसी आधार पर संपत्ति से संबंधित भविष्य की प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई तय होती है। यदि रिकॉर्ड में गलत तरीके से किसी निजी व्यक्ति या संस्था का नाम दर्ज हो जाए तो आगे चलकर भूमि के हस्तांतरण, बिक्री या उपयोग को लेकर जटिल कानूनी विवाद पैदा हो सकते हैं।

राजस्व बोर्ड के सदस्य सत्यव्रत साहू के निर्देश के बाद अब स्थानीय राजस्व प्रशासन को आदेश के अनुसार रिकॉर्ड दुरुस्त करने की प्रक्रिया पूरी करनी होगी। इसमें पुराने अभिलेखों और संबंधित दस्तावेजों के आधार पर आवश्यक प्रविष्टियां की जाएंगी। जमीन का रिकॉर्ड भगवान जगन्नाथ के नाम बहाल होने के बाद इसके स्वामित्व की स्थिति प्रशासनिक रूप से स्पष्ट हो जाएगी।

इस मामले में भूमि की ‘किसम’ बदलने का मुद्दा भी महत्वपूर्ण रहा। राजस्व व्यवस्था में जमीन की किस्म उसके उपयोग और प्रकृति से जुड़ी होती है। इसमें बदलाव का असर जमीन से जुड़े अधिकारों और उसके उपयोग पर पड़ सकता है। इसी कारण धार्मिक संस्था या देवता के नाम दर्ज भूमि की श्रेणी में बदलाव से जुड़े मामलों की बारीकी से जांच जरूरी मानी जाती है।

पुरी में भगवान जगन्नाथ केवल धार्मिक आस्था के केंद्र नहीं हैं, बल्कि मंदिर की संपत्तियों से जुड़े मामलों में कानूनी और प्रशासनिक स्तर पर भी उनके नाम से भूमि दर्ज होती है। ऐसे में मंदिर की जमीन से संबंधित किसी भी परिवर्तन के लिए निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन आवश्यक है।

राजस्व बोर्ड के ताजा आदेश से करीब 1.5 एकड़ ‘अमृत मनोही’ भूमि के रिकॉर्ड को लेकर स्थिति स्पष्ट हो गई है। संबंधित अधिकारियों को इसे दोबारा महाप्रभु जगन्नाथ के नाम दर्ज करने का निर्देश दिया गया है। अब इस आदेश के अनुपालन और भूमि अभिलेखों में बदलाव की प्रक्रिया पर नजर रहेगी।

श्रीगुंडिचा मंदिर और शरधाबली जैसे महत्वपूर्ण धार्मिक क्षेत्र के पास स्थित होने के कारण इस जमीन का महत्व और भी बढ़ जाता है। राजस्व बोर्ड का यह फैसला भगवान जगन्नाथ की भूमि संपत्तियों के संरक्षण और भूमि अभिलेखों की शुद्धता सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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