ओडिशा

महानदी का जलस्तर बढ़ा, जगतसिंहपुर के छह से ज्यादा गांवों में घुसा बाढ़ का पानी

Kavita2
29 Sept 2026 11:43 AM IST
महानदी का जलस्तर बढ़ा, जगतसिंहपुर के छह से ज्यादा गांवों में घुसा बाढ़ का पानी
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जगतसिंहपुर। ओडिशा के जगतसिंहपुर जिले में महानदी का जलस्तर बढ़ने के बाद बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं। टिरटोल और कुजंग ब्लॉक के छह से अधिक गांवों में बाढ़ का पानी घुस गया है। कई सड़कों पर पानी बहने से लोगों की आवाजाही प्रभावित हुई है, जबकि बड़े क्षेत्र में खेती की जमीन जलमग्न हो गई है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक बाढ़ से 200 से अधिक परिवार प्रभावित हुए हैं।

सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में कोटाकाना, मनिजांगा, टिरटोल आदिवासी साही और हरिपुर समेत आसपास के कई गांव शामिल हैं। महानदी का जलस्तर बढ़ने के बाद निचले इलाकों में तेजी से पानी फैलने लगा और कई गांवों की सड़कों तथा खेतों तक पहुंच गया।

कोटाकाना आदिवासी साही में स्थिति गंभीर बनी हुई है। यहां सड़क के ऊपर से लगभग दो फीट तक पानी बह रहा है। तेज बहाव के कारण स्थानीय लोगों के लिए सड़क पार करना मुश्किल हो गया है। सुरक्षा को देखते हुए लोगों को पानी से भरे रास्तों से गुजरने से बचने की सलाह दी गई है।

मनिजांगा के गोपाला साही की सड़क पर भी बाढ़ का पानी भर गया है। सड़क पर पानी जमा होने से ग्रामीणों की रोजमर्रा की आवाजाही प्रभावित हुई है। कई जगह स्थानीय लोगों को जरूरी काम के लिए भी पानी के बीच से गुजरना पड़ रहा है।

बाढ़ के कारण ग्रामीण इलाकों में जनजीवन प्रभावित होने लगा है। निचले इलाकों में बने कई घरों के आसपास पानी पहुंच गया है। ग्रामीण अपने सामान और जरूरी वस्तुओं को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं। यदि महानदी का जलस्तर और बढ़ता है तो प्रभावित गांवों में परेशानी बढ़ सकती है।

सबसे ज्यादा चिंता खेती को लेकर है। टिरटोल और कुजंग ब्लॉक में बड़े क्षेत्र की कृषि भूमि पानी में डूब गई है। खेतों में खड़ी फसलें जलमग्न होने से किसानों को भारी नुकसान की आशंका है। लंबे समय तक खेतों में पानी जमा रहने की स्थिति में फसलों के खराब होने का खतरा बढ़ सकता है।

ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी संख्या में परिवार खेती पर निर्भर हैं। ऐसे में बाढ़ के पानी से कृषि भूमि प्रभावित होने का सीधा असर किसानों की आय पर पड़ सकता है। किसान अब पानी कम होने का इंतजार कर रहे हैं, ताकि फसलों को हुए वास्तविक नुकसान का आकलन किया जा सके।

प्रशासन ने बाढ़ की स्थिति को देखते हुए संबंधित अधिकारियों और जमीनी स्तर पर तैनात कर्मचारियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। प्रभावित गांवों में पानी की स्थिति और महानदी के जलस्तर पर लगातार नजर रखने को कहा गया है।

जिला प्रशासन की ओर से ऐसे स्थानों की पहचान की जा रही है जहां पानी का बहाव ज्यादा तेज है। जोखिम वाले कई स्थानों पर लाल कपड़े लगाकर लोगों को चेतावनी दी गई है। इन संकेतों के जरिए लोगों को ऐसे रास्तों और क्षेत्रों में जाने से रोका जा रहा है जहां तेज बहाव के कारण हादसे का खतरा है।

प्रशासन ने ग्रामीणों से भी अपील की है कि वे पानी से भरी सड़कों को पार करने का जोखिम न लें। विशेष रूप से बच्चों और बुजुर्गों को बाढ़ के पानी से दूर रखने की सलाह दी गई है। तेज बहाव वाली जगहों पर थोड़ी सी लापरवाही भी गंभीर हादसे का कारण बन सकती है।

बाढ़ प्रभावित इलाकों में अधिकारी स्थानीय स्तर पर स्थिति की जानकारी जुटा रहे हैं। जरूरत पड़ने पर राहत और बचाव की व्यवस्था तैयार रखने के निर्देश दिए गए हैं। जिन क्षेत्रों का सड़क संपर्क प्रभावित हुआ है, वहां वैकल्पिक व्यवस्था की आवश्यकता का भी आकलन किया जा रहा है।

महानदी में बढ़े पानी के कारण निचले गांव सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं। नदी से जुड़े छोटे जलमार्गों और नालों में भी पानी बढ़ने के कारण आसपास के खेत और सड़कें जलमग्न हो रही हैं। यदि नदी का जलस्तर स्थिर होने के बाद कम होता है तो धीरे-धीरे गांवों से पानी उतरने की उम्मीद है।

फिलहाल 200 से अधिक परिवारों के प्रभावित होने की जानकारी है। प्रशासन प्रभावित परिवारों की संख्या और फसलों को हुए नुकसान का विस्तृत आकलन कर रहा है। पानी का स्तर कम होने के बाद नुकसान की वास्तविक स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।

बाढ़ के कारण पशुपालकों की परेशानी भी बढ़ गई है। खेत और खुले स्थान पानी में डूब जाने के कारण पशुओं के लिए सुरक्षित जगह और चारे की व्यवस्था करना मुश्किल हो सकता है। ग्रामीण अपने पशुओं को ऊंचे स्थानों पर ले जाने की कोशिश कर रहे हैं।

टिरटोल और कुजंग ब्लॉक के प्रभावित इलाकों में प्रशासन की निगरानी बढ़ा दी गई है। स्थानीय अधिकारियों को लोगों के संपर्क में रहने और किसी आपात स्थिति की सूचना तत्काल वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचाने के लिए कहा गया है।

बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पीने के पानी और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी पैदा होने की आशंका रहती है। लंबे समय तक पानी जमा रहने से जल स्रोत दूषित हो सकते हैं और संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है। ऐसे में प्रशासन को स्थिति सामान्य होने तक आवश्यक सेवाओं पर भी नजर रखनी होगी।

ग्रामीणों में महानदी के जलस्तर को लेकर चिंता बनी हुई है। लोगों की नजर इस बात पर है कि नदी का पानी कब कम होना शुरू होगा। जिन परिवारों के घर और खेत निचले क्षेत्रों में हैं, उनकी चिंता सबसे अधिक है।

फिलहाल जिला प्रशासन ने किसी भी संभावित खतरे से निपटने के लिए अधिकारियों को अलर्ट रहने को कहा है। प्रभावित क्षेत्रों में चेतावनी संकेत लगाए गए हैं और लोगों से तेज बहाव वाले स्थानों से दूरी बनाए रखने की अपील की गई है।

महानदी के बढ़ते जलस्तर से टिरटोल और कुजंग ब्लॉक के छह से ज्यादा गांवों में बनी बाढ़ की स्थिति पर प्रशासन लगातार नजर रख रहा है। आने वाले समय में नदी के जलस्तर में होने वाला बदलाव ही तय करेगा कि प्रभावित क्षेत्रों को जल्द राहत मिलेगी या बाढ़ का दायरा और बढ़ेगा।

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