ओडिशा

संसद में स्थापित होंगे भगवान जगन्नाथ रथ के पहिए, ओडिशा की सांस्कृतिक विरासत को मिलेगा सम्मान

SHIDDHANT
31 Aug 2025 8:35 PM IST
संसद में स्थापित होंगे भगवान जगन्नाथ रथ के पहिए, ओडिशा की सांस्कृतिक विरासत को मिलेगा सम्मान
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ODISHA ओडिशा: ऐतिहासिक फैसला लेते हुए, भगवान जगन्नाथ के तीन रथ (नंदीघोष, तालध्वज और दर्पदलन) के पहिए अब जल्द ही नई दिल्ली के संसद परिसर में स्थापित किए जाएंगे। लोकसभा के स्पीकर ओम बिरला ने जगन्नाथ मंदिर प्रशासन के इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। यह कदम न सिर्फ ओडिशा की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक धरोहर को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित करेगा, बल्कि लोकतंत्र के मंदिर में भी भगवान जगन्नाथ की परंपरा की पहचान बनाएगा। जगन्नाथ मंदिर के मुख्य प्रशासक अरविंद पाठी ने इस निर्णय पर खुशी जताते हुए स्पीकर ओम बिरला का धन्यवाद किया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि यह पहल पूरे देश में जगन्नाथ संस्कृति और परंपरा को प्रदर्शित करेगी।
इसके पहले भी ऐसे कई अवसर आए थे, जब भगवान जगन्नाथ के रथ के पहिए ओडिशा विधानसभा परिसर और राज्य अतिथि गृह में लगाए गए थे। अब इस परंपरा को एक कदम आगे बढ़ाते हुए संसद परिसर में भी स्थापित किया जाएगा, जो कि राष्ट्रीय राजधानी के केंद्र में भगवान जगन्नाथ की विरासत का प्रतिनिधित्व करेगा। मंदिर के पुजारियों और सेवकों ने इस निर्णय का जोरदार स्वागत किया है। जगन्नाथ धाम के पुजारी सोमनाथ खुंटिया ने आईएएनएस से बताया कि तीन दिन पहले लोकसभा स्पीकर ओम बिरला मंदिर में दर्शन के लिए आए थे। उन्होंने भगवान जगन्नाथ के दर्शन किए और मंदिर प्रशासन की ओर से उन्हें एक उपहार भी दिया गया। इस उपहार में भगवान जगन्नाथ के रथ के पहिए थे, जिन्हें जल्द ही संसद परिसर में स्थापित करने का प्रस्ताव है।
सोमनाथ खुंटिया ने कहा, "मैं सोचता हूं कि संसद में भगवान जगन्नाथ का एक पूरा रथ ही लगना चाहिए।" उन्होंने प्रशासन से अपील की कि जल्द से जल्द भगवान जगन्नाथ के रथ के पहिए संसद में भेजे जाएं। पुजारी ने कहा, "मुझे बहुत खुशी हो रही है कि भगवान जगन्नाथ की रथ के पहिए हों या पूरा रथ, संसद में उनकी जगह बनना बड़ा सौभाग्य है। मैं आज भगवान जगन्नाथ के धाम से कह रहा हूं कि हमारी सरकार पूरी तरह से भगवान के प्रति आस्था रखती है, इसलिए उस आस्था को साकार करने के लिए हमें वहां इस पहिए को जल्द पहुंचाना चाहिए।" उन्होंने यह भी कहा कि ओडिशा के लगभग साढ़े चार करोड़ लोग भी इस बात से बेहद खुश होंगे कि उनकी सांस्कृतिक विरासत संसद में प्रदर्शित होगी।
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