ओडिशा

राजनीति छोड़ OCS में 138वीं रैंक

Kavita2
28 May 2026 9:43 AM IST
राजनीति छोड़ OCS में 138वीं रैंक
x

Odisha ओडिशा: ओडिशा के बालासोर जिले के सोरो विधानसभा क्षेत्र से जुड़े शिबानी शंकर रे ने अपने करियर की दिशा बदलते हुए ओडिशा सिविल सर्विसेज (OCS) परीक्षा-2024 में 138वीं रैंक हासिल की है। ओडिशा लोक सेवा आयोग (OPSC) द्वारा घोषित परिणामों के बाद रे की यह उपलब्धि चर्चा का विषय बन गई है।

शिबानी शंकर रे, स्वर्गीय कन्हेई चरण राउत और रंजीता नायक के इकलौते पुत्र हैं। उनका प्रारंभिक झुकाव राजनीति की ओर था और वे सोरो विधानसभा क्षेत्र से बीजू जनता दल (BJD) के टिकट पर 2024 विधानसभा चुनाव लड़ने के इच्छुक थे। बताया जाता है कि वे दो वर्ष पहले इसी क्षेत्र से विधायक टिकट के प्रमुख दावेदारों में शामिल थे।

हालांकि, राजनीतिक परिस्थितियों और पार्टी के निर्णय के चलते उन्हें टिकट नहीं मिल सका। इसके बावजूद वे लगातार सार्वजनिक जीवन और सामाजिक जुड़ाव से जुड़े रहे। मजबूत स्थानीय संपर्क और सक्रिय राजनीतिक रुचि के कारण वे क्षेत्र में एक युवा नेता के रूप में पहचाने जाते रहे हैं।

राजनीति में अवसर न मिलने के बाद शिबानी शंकर रे ने अपने करियर की दिशा बदलते हुए शिक्षा और प्रशासनिक सेवाओं की ओर कदम बढ़ाया। वे उच्च शिक्षा प्राप्त व्यक्ति हैं और उनके पास इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट (IIM) इंदौर से एमबीए की डिग्री है। इसके अलावा उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी योग्यता का प्रदर्शन करते हुए विभिन्न शैक्षणिक और प्रशासनिक क्षेत्रों में अनुभव भी हासिल किया।

राजनीतिक संभावनाओं के बीच अवसर की कमी के बाद वे नई दिल्ली चले गए और वहां नेशनल डिफेंस कॉलेज में फैकल्टी मेंबर के रूप में कार्य करना शुरू किया। इस दौरान उन्होंने प्रशासनिक सेवाओं की तैयारी जारी रखी और अंततः ओडिशा सिविल सर्विसेज परीक्षा में सफलता हासिल की।

ओपीएससी द्वारा घोषित परिणामों में 138वीं रैंक प्राप्त कर उन्होंने यह साबित किया कि निरंतर प्रयास और दृढ़ संकल्प से किसी भी क्षेत्र में सफलता हासिल की जा सकती है। उनकी यह उपलब्धि न केवल व्यक्तिगत स्तर पर महत्वपूर्ण है, बल्कि उन युवाओं के लिए भी प्रेरणा है जो करियर में बदलाव या नए अवसरों की तलाश में हैं।

शिबानी शंकर रे की कहानी यह दर्शाती है कि जीवन में असफलताओं या अवसरों के छूटने के बाद भी नए रास्ते खोले जा सकते हैं। राजनीति से प्रशासनिक सेवा तक का उनका सफर इस बात का उदाहरण है कि सही दिशा में मेहनत और लगन से सफलता संभव है।

Next Story