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Kerala केरल: प्रसिद्ध हर्बल विशेषज्ञ कोल्लकायिल देवकी अम्मा को पद्म श्री 2026 से सम्मानित किया गया। पुरस्कार मिलने के बाद उन्होंने अपनी खुशी और जीवन दृष्टिकोण को साझा किया। देवकी अम्मा ने कहा कि अपने जीवन के इस पड़ाव पर भी जड़ी-बूटियों और हर्बल उपचार के माध्यम से लोगों की मदद करना उन्हें अत्यंत संतोष और ऊर्जा देता है। देवकी अम्मा ने बताया, “लोग जिन्हें इन जड़ी-बूटियों की आवश्यकता होती है, वे यहां आते हैं, मैं उन्हें दिखाती हूं, उनका परीक्षण करती हूं और फिर वे इसका उपयोग करते हैं। यह गतिविधि मुझे बहुत पसंद है और इसी कारण मुझे अपने इस उम्र में भी काम करने की ऊर्जा मिलती है। यहाँ के लोग और मेरा पूरा परिवार इस कार्य में मेरी मदद करता है और मुझे पूरा समर्थन देता है।
कोल्लकायिल देवकी अम्मा ने पिछले कई दशकों में हर्बल और आयुर्वेदिक उपचार के क्षेत्र में असाधारण योगदान दिया है। उनके प्रयासों से स्थानीय समुदायों को प्राकृतिक औषधियों और जड़ी-बूटियों की जानकारी मिली है और हजारों लोग उनके ज्ञान और चिकित्सा पद्धतियों से लाभान्वित हुए हैं। उनकी विशेषज्ञता में हर्बल दवाओं का सही चयन, रोगनिवारण और प्राकृतिक उपचार के सुरक्षित तरीके शामिल हैं। उन्होंने अपने जीवन के अनुभवों को साझा करते हुए कहा कि हर्बल उपचार के प्रति उनका लगाव और उत्साह उन्हें हमेशा प्रेरित करता रहा है। “जब मैं अपने काम के माध्यम से किसी की मदद करती हूं और उनका स्वास्थ्य बेहतर होता है, तो यह मुझे संतोष और शक्ति प्रदान करता है। मेरे परिवार और स्थानीय लोग भी इस कार्य में हमेशा साथ देते हैं, जिससे मेरी मेहनत और उद्देश्य को और बल मिलता है।
देवकी अम्मा ने यह भी बताया कि उन्होंने हमेशा स्थानीय जड़ी-बूटियों और पारंपरिक आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धतियों को संरक्षित करने और उन्हें आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इन प्राकृतिक उपचारों की शक्ति का अनुभव करने वाले लोग अक्सर उनका मार्गदर्शन लेने आते हैं। उनकी यह सेवाभावना और विशेषज्ञता ही उन्हें राष्ट्रीय सम्मान दिलाने का कारण बनी। उनकी उपलब्धियों और समाज के प्रति योगदान को देखते हुए केरल सरकार और केंद्र सरकार ने उन्हें पद्म श्री 2026 से सम्मानित किया। यह सम्मान न केवल उनके व्यक्तिगत प्रयासों की पहचान है, बल्कि हर्बल और प्राकृतिक चिकित्सा के क्षेत्र में काम करने वाले हजारों पेशेवरों के लिए प्रेरणा का स्रोत भी है।
कोल्लकायिल देवकी अम्मा ने अंत में सभी से अपील की कि वे प्राकृतिक उपचारों और जड़ी-बूटियों के महत्व को समझें और इसे अपने जीवन का हिस्सा बनाएं। उनका कहना है कि यह न केवल स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है, बल्कि पारंपरिक ज्ञान और संस्कृति को संरक्षित रखने का भी एक तरीका है। देवकी अम्मा का यह सम्मान उन्हें आने वाली पीढ़ियों के लिए हर्बल चिकित्सा और आयुर्वेदिक उपचार में उत्कृष्ट उदाहरण के रूप में स्थापित करता है। उनकी कहानी इस बात का प्रमाण है कि समर्पण, सेवा और ज्ञान का संयोजन जीवन में किसी भी उम्र में प्रभावशाली योगदान दे सकता है।
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