ओडिशा

Kathmandu-कलिंग साहित्य महोत्सव का ललितपुर में शुभारंभ

Kavita2
7 Jun 2026 4:44 PM IST
Kathmandu-कलिंग साहित्य महोत्सव का ललितपुर में शुभारंभ
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Odisha ओडिशा: काठमांडू-कलिंग साहित्य महोत्सव (KLF) का चौथा संस्करण नेपाल के ललितपुर स्थित होटल हिमालय में शुरू हुआ। यह दो दिवसीय आयोजन ओडिशा और नेपाल के बीच साहित्यिक, सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और सभ्यतागत संबंधों को और मजबूत करने के उद्देश्य से आयोजित किया गया है।

महोत्सव का उद्घाटन नेपाल की पूर्व प्रधानमंत्री सुशीला कार्की ने किया। इस अवसर पर ओडिया साहित्य की कई प्रमुख हस्तियां भी मौजूद रहीं, जिनमें लेखिका प्रतिभा रे, पारमिता सत्पथी और उपेन्द्रनाथ बेहरा शामिल थे। इन साहित्यकारों ने ओडिशा की समृद्ध साहित्यिक परंपरा और उसकी सांस्कृतिक विरासत को मंच पर प्रस्तुत किया।

कार्यक्रम के दौरान विभिन्न सत्रों में साहित्य, संस्कृति और समाज से जुड़े विषयों पर चर्चा की गई। उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए महोत्सव की निदेशक रंजना निरौला ने कहा कि साहित्य केवल शब्दों और किताबों तक सीमित नहीं होता, बल्कि यह साझा विचारों, संस्कृति, स्मृतियों, सहानुभूति और मानवीय संवेदनाओं का उत्सव भी है।

उन्होंने कहा कि यह महोत्सव सिर्फ एक साहित्यिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह एक ऐसा मंच है जो लोगों के बीच संवाद, समझ और आपसी जुड़ाव को बढ़ावा देता है। उनके अनुसार, साहित्य की असली ताकत उसकी वह क्षमता है, जिससे वह भौगोलिक सीमाओं को पार कर सकता है और विभिन्न भाषाओं और संस्कृतियों के बीच पुल का काम करता है।

रंजना निरौला ने आगे कहा कि साहित्य अलग-अलग समाजों को जोड़ने का माध्यम है और यह लोगों के बीच अंतर को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि साहित्यिक मंच केवल विचारों के आदान-प्रदान का स्थान नहीं, बल्कि मानवीय संबंधों को मजबूत करने का एक माध्यम भी है।

इस आयोजन में भारत और नेपाल के बीच सांस्कृतिक रिश्तों को नई दिशा देने पर भी विशेष ध्यान दिया गया। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के कार्यक्रम दोनों देशों की साझा विरासत को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

कार्यक्रम में उपस्थित साहित्यकारों ने भी अपने विचार साझा किए और क्षेत्रीय साहित्य के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि ओडिशा और नेपाल की साहित्यिक परंपराएं एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं और इन्हें और अधिक मजबूत करने की आवश्यकता है।

महोत्सव के दौरान आने वाले सत्रों में साहित्य, समाज, भाषा और संस्कृति से जुड़े कई विषयों पर चर्चा की जाएगी। आयोजकों ने उम्मीद जताई है कि यह मंच आने वाले समय में दक्षिण एशिया में साहित्यिक सहयोग को और मजबूत करेगा।

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