
Odisha ओडिशा: राजधानी भुवनेश्वर में रविवार को इस्कॉन मंदिर के बाहर रथ यात्रा के आयोजन की तारीखों को लेकर विरोध प्रदर्शन किया गया। सामाजिक संगठन ‘वी फॉर भुवनेश्वर’ के सदस्यों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन करते हुए इस्कॉन द्वारा पारंपरिक तिथि से अलग समय पर रथ यात्रा आयोजित करने के फैसले का विरोध किया।
प्रदर्शनकारियों का कहना था कि भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा सदियों पुरानी धार्मिक परंपराओं और निर्धारित तिथियों के अनुसार आयोजित की जाती है। उन्होंने आरोप लगाया कि पारंपरिक धार्मिक कैलेंडर से अलग तारीखों पर रथ यात्रा आयोजित करना जगन्नाथ संस्कृति और मान्यताओं के खिलाफ है।
परंपराओं के पालन की मांग
प्रदर्शन के दौरान संगठन के सदस्यों ने मांग की कि भगवान जगन्नाथ से जुड़े सभी धार्मिक आयोजनों में पुरी श्री जगन्नाथ मंदिर की परंपराओं और अनुष्ठानों का पालन किया जाना चाहिए।
संगठन का कहना है कि पुरी में भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह ओडिशा की सांस्कृतिक पहचान और करोड़ों भक्तों की आस्था से जुड़ी हुई है।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि रथ यात्रा की तिथि धार्मिक पंचांग और सदियों से चली आ रही परंपराओं के आधार पर तय होती है। इसलिए इसमें बदलाव या अलग-अलग तिथियों पर आयोजन से भक्तों की भावनाएं प्रभावित हो सकती हैं।
विदेशों में आयोजित रथ यात्रा पर उठे सवाल
यह विरोध भारत के बाहर इस्कॉन केंद्रों में आयोजित होने वाली कुछ रथ यात्राओं को लेकर चल रही बहस के बीच हुआ है।
संगठन ने आरोप लगाया कि विदेशों में कुछ स्थानों पर पुरी मंदिर की निर्धारित तिथियों से अलग समय पर रथ यात्रा और स्नान यात्रा जैसे धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि विदेशों में होने वाले ऐसे सभी आयोजनों में भी पुरी की धार्मिक परंपराओं और तिथियों का सख्ती से पालन किया जाए।
‘वी फॉर भुवनेश्वर’ ने जताई नाराजगी
प्रदर्शन में शामिल सदस्यों ने कहा कि जगन्नाथ संस्कृति की अपनी विशिष्ट परंपराएं हैं, जिनका सम्मान किया जाना चाहिए।
संगठन ने चेतावनी दी कि भगवान जगन्नाथ से जुड़ी धार्मिक परंपराओं को कमजोर करने या उनमें बदलाव करने के किसी भी प्रयास को स्वीकार नहीं किया जाएगा।
सदस्यों ने कहा कि यह विरोध केवल एक कार्यक्रम तक सीमित नहीं है, बल्कि जगन्नाथ परंपराओं की पवित्रता और गरिमा की रक्षा के लिए शुरू किया गया एक व्यापक अभियान है।
इस्कॉन और परंपरा को लेकर पुराना विवाद
भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा को लेकर इस्कॉन और पारंपरिक धार्मिक संस्थाओं के बीच समय-समय पर मतभेद सामने आते रहे हैं।
इस्कॉन दुनिया के कई देशों में भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा आयोजित करता है। संस्था का उद्देश्य विदेशों में रहने वाले भारतीय समुदाय और अन्य श्रद्धालुओं तक भगवान जगन्नाथ की भक्ति और संस्कृति को पहुंचाना है।
हालांकि, कुछ धार्मिक संगठनों का मानना है कि ऐसे आयोजनों में पुरी श्री जगन्नाथ मंदिर की परंपराओं और धार्मिक नियमों का पालन जरूरी है।
भक्तों की भावनाओं का मुद्दा
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि भगवान जगन्नाथ केवल ओडिशा ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के करोड़ों लोगों की आस्था के केंद्र हैं। इसलिए उनसे जुड़े धार्मिक आयोजनों में किसी भी प्रकार की असावधानी या बदलाव से बचना चाहिए।
उन्होंने कहा कि धार्मिक परंपराओं की रक्षा करना सभी की जिम्मेदारी है और इसके लिए समाज को जागरूक रहना होगा।
आगे आंदोलन तेज करने की चेतावनी
संगठन के सदस्यों ने कहा कि यदि भविष्य में भी पारंपरिक तिथियों से अलग रथ यात्रा आयोजित की जाती है तो वे अपना विरोध जारी रखेंगे।
उन्होंने कहा कि जगन्नाथ संस्कृति और धार्मिक रीति-रिवाजों की सुरक्षा के लिए आने वाले दिनों में आंदोलन को और व्यापक किया जा सकता है।
विवाद पर नजर
फिलहाल रथ यात्रा की तिथियों को लेकर विवाद जारी है। एक तरफ इस्कॉन वैश्विक स्तर पर भगवान जगन्नाथ की भक्ति और संस्कृति को बढ़ावा देने की बात करता है, वहीं दूसरी ओर पारंपरिक संगठनों का कहना है कि ऐसे आयोजनों में पुरी मंदिर की धार्मिक मर्यादाओं का पालन अनिवार्य होना चाहिए।
भुवनेश्वर में हुआ यह प्रदर्शन इसी विवाद का हिस्सा है, जिसने एक बार फिर जगन्नाथ परंपराओं और धार्मिक आयोजनों के स्वरूप को लेकर चर्चा तेज कर दी है।





