ओडिशा

पुरी में बनेगा 1,500 करोड़ का इंटरनेशनल क्रूज टर्मिनल

Kavita2
4 Nov 2026 10:52 AM IST
पुरी में बनेगा 1,500 करोड़ का इंटरनेशनल क्रूज टर्मिनल
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पुरी। ओडिशा के प्रसिद्ध धार्मिक और पर्यटन स्थल पुरी को अंतरराष्ट्रीय क्रूज पर्यटन के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने मंगलवार को पुरी इंटरनेशनल क्रूज टर्मिनल के विकास के लिए 1,500 करोड़ रुपये की महत्वाकांक्षी योजना की घोषणा की। इस परियोजना को पारादीप पोर्ट अथॉरिटी (पीपीए) और ओडिशा सरकार संयुक्त रूप से विकसित करेंगे। केंद्र सरकार का उद्देश्य समुद्री पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ तटीय परिवहन, रोजगार और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में नए अवसर पैदा करना है।

पुरी में आयोजित संसदीय सलाहकार समिति की बैठक को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने देश के समुद्री क्षेत्र के विकास से जुड़ी विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सरकार 'क्रूज भारत मिशन' के माध्यम से मार्च 2029 तक देश में समुद्री क्रूज यात्रियों की संख्या 10 लाख तक पहुंचाने का लक्ष्य लेकर काम कर रही है। इसके साथ ही तटीय और अंतर्देशीय जलमार्ग परिवहन को मजबूत करने के लिए भी महत्वपूर्ण पहल की जा रही है।

मंत्री ने कहा कि पुरी में प्रस्तावित अंतरराष्ट्रीय क्रूज टर्मिनल समुद्री पर्यटन को नई दिशा दे सकता है। पुरी देश के प्रमुख धार्मिक पर्यटन स्थलों में शामिल है और यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु तथा पर्यटक पहुंचते हैं। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय क्रूज टर्मिनल बनने से समुद्री मार्ग से आने वाले पर्यटकों के लिए नए अवसर उपलब्ध हो सकते हैं। परियोजना से पर्यटन, परिवहन और स्थानीय सेवाओं से जुड़े कारोबार को भी लाभ मिलने की संभावना है।

केंद्रीय मंत्री ने बताया कि सरकार का लक्ष्य वर्ष 2047 तक देश के कुल माल परिवहन में तटीय जहाजरानी और अंतर्देशीय जलमार्गों की हिस्सेदारी को मौजूदा 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 12 प्रतिशत करना है। इसके लिए 'कोस्टल कार्गो प्रमोशन स्कीम' को महत्वपूर्ण पहल के रूप में आगे बढ़ाया जा रहा है। इस योजना का उद्देश्य सड़क और रेल परिवहन के साथ जलमार्गों का अधिक प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करना है।

सोनोवाल के अनुसार, देश में माल परिवहन की बढ़ती जरूरतों को देखते हुए समुद्री और नदी मार्गों के इस्तेमाल को बढ़ावा देना आवश्यक है। जलमार्गों के माध्यम से बड़ी मात्रा में सामान एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाया जा सकता है। इससे परिवहन के विभिन्न साधनों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने में मदद मिलेगी।

कोस्टल कार्गो प्रमोशन स्कीम की घोषणा केंद्रीय बजट 2026-27 में की गई थी। इसके अंतर्गत माल भेजने वाली कंपनियों, तटीय जहाज संचालकों और मल्टीमॉडल परिवहन ऑपरेटरों को प्रोत्साहन देने की व्यवस्था प्रस्तावित है। मल्टीमॉडल परिवहन में जहाज, रेल और सड़क जैसे एक से अधिक परिवहन साधनों का संयुक्त रूप से उपयोग किया जाता है।

केंद्रीय मंत्री ने बताया कि 'कोस्टल कार्गो प्रमोशन स्कीम' और 'क्रूज भारत मिशन' से मिलाकर 5 लाख 60 हजार से अधिक रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है। इसके अतिरिक्त इन पहलों से लगभग 1.6 करोड़ टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन की बचत होने का अनुमान लगाया गया है। सरकार इन योजनाओं को आर्थिक विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण मान रही है।

सोनोवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले 12 वर्षों के दौरान भारत के समुद्री क्षेत्र में व्यापक बदलाव हुए हैं। बंदरगाहों के विकास, जहाजरानी सुविधाओं और जलमार्ग परिवहन को मजबूत करने के लिए कई कदम उठाए गए हैं। उन्होंने कहा कि देश की लंबी समुद्री तटरेखा आर्थिक गतिविधियों को आगे बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण संसाधन है।

मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, पिछले 12 वर्षों में भारतीय बंदरगाहों पर तटीय माल ढुलाई 7.4 करोड़ टन से बढ़कर 17.7 करोड़ टन हो गई है। यह लगभग 140 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है। सरकार का मानना है कि तटीय जहाजरानी को और प्रोत्साहन मिलने से माल परिवहन में जलमार्गों की भूमिका बढ़ सकती है।

क्रूज पर्यटन के क्षेत्र में भी पिछले कुछ वर्षों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान भारत में 4,62,661 समुद्री क्रूज यात्रियों का आवागमन दर्ज किया गया, जबकि क्रूज जहाजों के 212 आगमन दर्ज हुए। मंत्रालय के अनुसार, वर्ष 2013-14 की तुलना में यात्रियों की संख्या लगभग साढ़े पांच गुना बढ़ी है।

सितंबर 2024 में शुरू किए गए 'क्रूज भारत मिशन' के तहत मार्च 2029 तक 10 लाख समुद्री क्रूज यात्रियों को आकर्षित करने और लगभग चार लाख रोजगार के अवसर सृजित करने का लक्ष्य रखा गया है। इस मिशन के माध्यम से भारत को अंतरराष्ट्रीय क्रूज पर्यटन के क्षेत्र में अधिक आकर्षक गंतव्य बनाने की योजना है।

नदी आधारित पर्यटन को भी सरकार की योजनाओं में विशेष स्थान दिया गया है। मंत्रालय के अनुसार, वर्तमान में 16 राष्ट्रीय जलमार्गों पर 20 नदी क्रूज सर्किट संचालित हैं। इसके अलावा 51 अन्य सर्किट चरणबद्ध तरीके से विकसित करने के लिए चिह्नित किए गए हैं। देशभर में 143 नदी क्रूज टर्मिनल और उतरने-चढ़ने के स्थान संचालित हैं।

ओडिशा में जलमार्गों के विकास के संबंध में सोनोवाल ने राष्ट्रीय जलमार्ग संख्या-5 का भी उल्लेख किया। इस परियोजना की अनुमानित लागत 13 हजार करोड़ रुपये से अधिक है। इसके माध्यम से तालचेर और कलिंगनगर जैसे औद्योगिक तथा खनन क्षेत्रों को पूर्वी तट के बंदरगाहों से जोड़ने की योजना है।

संसदीय सलाहकार समिति की बैठक में केंद्रीय बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग राज्य मंत्री शांतनु ठाकुर तथा आठ सांसद भी उपस्थित रहे। बैठक में तटीय परिवहन और क्रूज पर्यटन को मजबूत करने से संबंधित विभिन्न पहलुओं पर चर्चा हुई। सांसदों ने समुद्री बुनियादी ढांचे के विकास को लेकर अपने सुझाव भी प्रस्तुत किए।

केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा कि सरकार देश के समुद्री संसाधनों को आर्थिक विकास, रोजगार और पर्यावरण संरक्षण से जोड़ने की दिशा में काम कर रही है। पुरी इंटरनेशनल क्रूज टर्मिनल की प्रस्तावित परियोजना इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा है। आने वाले समय में इस परियोजना के क्रियान्वयन से ओडिशा के समुद्री पर्यटन क्षेत्र को नई पहचान मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

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