ओडिशा

श्रीकाकुलम में मिला गजपति कपिलेंद्र देव के शासनकाल का शिलालेख

Kavita2
22 Aug 2026 3:43 PM IST
श्रीकाकुलम में मिला गजपति कपिलेंद्र देव के शासनकाल का शिलालेख
x

श्रीकाकुलम। आंध्र प्रदेश के श्रीकाकुलम जिले के टेक्काली शहर में एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक खोज सामने आई है। यहां गजपति कपिलेंद्र देव के शासनकाल से संबंधित शिलालेख वाला पत्थर मिला है। इस खोज से गजपति साम्राज्य के विस्तार, प्रशासनिक गतिविधियों और वर्तमान आंध्र प्रदेश के इस हिस्से पर ओडिशा के ऐतिहासिक प्रभाव को समझने में नई जानकारी मिलने की उम्मीद है।

यह महत्वपूर्ण शिलालेख हेरिटेज रिसर्चर दीपक कुमार नायक और बिक्रम कुमार नायक ने खोजा है। दोनों ‘रीडिस्कवर लॉस्ट हेरिटेज ट्रस्ट’ से जुड़े हैं। यह संस्था दक्षिण भारत में कलिंग से संबंधित ऐतिहासिक स्थलों, स्मारकों और पुरातात्विक साक्ष्यों पर शोध कर रही है।

पुरानी रिपोर्ट से मिला सुराग

हेरिटेज रिसर्चर दीपक कुमार नायक के अनुसार, इस शिलालेख का उल्लेख करीब एक सदी पहले प्रकाशित एक ऐतिहासिक दस्तावेज में हो चुका था। इसकी जानकारी वर्ष 1926-27 की ‘एनुअल रिपोर्ट ऑन इंडियन एपिग्राफी’ में दर्ज थी।

पुराने अभिलेख में शिलालेख का उल्लेख मिलने के बाद शोधकर्ताओं ने इसे दोबारा खोजने का प्रयास शुरू किया। उनका उद्देश्य यह पता लगाना था कि ऐतिहासिक रिपोर्ट में दर्ज शिलालेख वर्तमान समय में कहां मौजूद है और उसकी मौजूदा स्थिति क्या है।

इसी क्रम में शोधकर्ताओं ने टेक्काली के राजपरिवार से संपर्क किया। उन्होंने टेक्काली राजपरिवार के सदस्य ललित कुमार देव से इस संबंध में जानकारी साझा की और उनकी मदद मांगी।

टेक्काली महल में मिला शिलालेख

ललित कुमार देव के सहयोग से शोधकर्ताओं को टेक्काली महल तक पहुंच मिली। महल में ऐतिहासिक वस्तुओं और पुराने दस्तावेजों की तलाश के दौरान उन्हें वह शिलालेख वाला पत्थर मिल गया, जिसका उल्लेख दशकों पहले की एपिग्राफिक रिपोर्ट में किया गया था।

शोधकर्ताओं के लिए यह खोज विशेष महत्व रखती है, क्योंकि किसी पुराने अभिलेख का ऐतिहासिक रिकॉर्ड से मिलान होना उस क्षेत्र के इतिहास को समझने में महत्वपूर्ण आधार प्रदान करता है।

शिलालेख की खोज से यह भी संकेत मिलता है कि अतीत में दर्ज कई महत्वपूर्ण ऐतिहासिक अवशेष आज भी निजी परिसरों, महलों या स्थानीय संग्रहों में मौजूद हो सकते हैं। ऐसे अवशेषों की पहचान और वैज्ञानिक अध्ययन से इतिहास के कई अनछुए पहलुओं को सामने लाया जा सकता है।

कपिलेंद्र देव के शासन से जुड़ा है शिलालेख

शिलालेख का संबंध गजपति कपिलेंद्र देव के शासनकाल से बताया जा रहा है। कपिलेंद्र देव ओडिशा के गजपति साम्राज्य के प्रमुख शासकों में शामिल थे। उनके शासनकाल में साम्राज्य का विस्तार व्यापक क्षेत्र तक हुआ था और कलिंग क्षेत्र का राजनीतिक तथा सांस्कृतिक प्रभाव दूर-दूर तक पहुंचा।

टेक्काली में मिले इस शिलालेख को इसी ऐतिहासिक दौर से जोड़कर देखा जा रहा है। ऐसे में इसके अध्ययन से यह समझने में मदद मिल सकती है कि उस समय इस क्षेत्र में गजपति सत्ता का प्रभाव किस प्रकार था।

शिलालेखों को इतिहास के महत्वपूर्ण प्राथमिक स्रोतों में माना जाता है। इनमें तत्कालीन शासकों, प्रशासन, धार्मिक गतिविधियों, भूमि दान, सामाजिक व्यवस्था और राजनीतिक प्रभाव से जुड़ी जानकारी मिल सकती है।

ओडिशा और आंध्र के ऐतिहासिक संबंधों पर नई जानकारी

टेक्काली में मिला शिलालेख वर्तमान भौगोलिक सीमाओं से अलग उस समय के राजनीतिक और सांस्कृतिक संबंधों की ओर भी संकेत करता है। वर्तमान में टेक्काली आंध्र प्रदेश में है, लेकिन ऐतिहासिक रूप से इस पूरे क्षेत्र का कलिंग और ओडिशा से गहरा संबंध रहा है।

कलिंग का प्रभाव समुद्र तट के साथ-साथ दक्षिण की ओर भी विस्तारित हुआ था। विभिन्न राजवंशों के शासनकाल में राजनीतिक सीमाएं बदलती रही हैं। ऐसे में किसी गजपति शासक के समय का शिलालेख इस क्षेत्र में उस दौर के राजनीतिक प्रभाव का महत्वपूर्ण प्रमाण बन सकता है।

शोध के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि

‘रीडिस्कवर लॉस्ट हेरिटेज ट्रस्ट’ से जुड़े शोधकर्ताओं के लिए यह खोज इसलिए भी अहम है क्योंकि शिलालेख की जानकारी पहले से ऐतिहासिक दस्तावेज में दर्ज थी, लेकिन लंबे समय तक उसका वास्तविक स्थान स्पष्ट नहीं था।

पुरानी रिपोर्ट में उपलब्ध जानकारी के आधार पर खोज शुरू करना और फिर राजपरिवार की सहायता से उसी शिलालेख को महल में ढूंढ निकालना शोध प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा।

अब शोधकर्ताओं के सामने अगला चरण शिलालेख का विस्तृत अध्ययन और दस्तावेजीकरण करना है। इसके अक्षरों, भाषा, लिपि और सामग्री का अध्ययन कर इसके ऐतिहासिक संदर्भ को और स्पष्ट किया जा सकता है।

संरक्षण की जरूरत

इतिहासकारों और विरासत शोधकर्ताओं के लिए इस तरह के शिलालेख अमूल्य धरोहर होते हैं। समय के साथ प्राकृतिक क्षरण, उपेक्षा या उचित संरक्षण के अभाव में ऐसे ऐतिहासिक अवशेषों को नुकसान पहुंच सकता है।

टेक्काली में मिले शिलालेख का वैज्ञानिक तरीके से दस्तावेजीकरण और संरक्षण इसलिए महत्वपूर्ण है, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए यह ऐतिहासिक साक्ष्य सुरक्षित रह सके।

फिलहाल इस खोज ने इतिहास और विरासत शोध से जुड़े लोगों का ध्यान टेक्काली की ओर खींचा है। गजपति कपिलेंद्र देव के शासनकाल से जुड़े इस शिलालेख के विस्तृत अध्ययन से न केवल गजपति साम्राज्य के इतिहास को समझने में मदद मिल सकती है, बल्कि आंध्र प्रदेश के उत्तरी तटीय क्षेत्र और ओडिशा के बीच रहे प्राचीन राजनीतिक एवं सांस्कृतिक संबंधों पर भी नई रोशनी पड़ सकती है।

Next Story