ओडिशा

35 साल पुरानी प्लॉट योजना की रिकॉर्ड गड़बड़ी दूर करने की पहल

Kavita2
10 Sept 2026 5:47 PM IST
35 साल पुरानी प्लॉट योजना की रिकॉर्ड गड़बड़ी दूर करने की पहल
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भुवनेश्वर : भुवनेश्वर विकास प्राधिकरण (बीडीए) ने घाटिकिया मौजा स्थित के-7 कलिंगा नगर प्लॉटेड डेवलपमेंट स्कीम के लाभार्थियों को राहत देने के लिए महत्वपूर्ण पहल की है। प्राधिकरण ने संबंधित विभागों के साथ समन्वय बनाकर सेटलमेंट रिकॉर्ड में लंबे समय से चली आ रही विसंगतियों को दूर करने की प्रक्रिया शुरू की है। रिकॉर्ड में प्लॉट के क्षेत्रफल और अन्य विवरणों में अंतर होने के कारण वास्तविक आवंटियों को आवंटन के बाद मिलने वाली कई सेवाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा था।

घाटिकिया मौजा में आवासीय प्लॉट वर्ष 1991 में कलिंगा नगर प्लॉटेड डेवलपमेंट स्कीम के तहत आवंटित किए गए थे। योजना का उद्देश्य शहर के विस्तार के साथ नागरिकों को व्यवस्थित आवासीय भूखंड उपलब्ध कराना था। पात्र आवेदकों को प्लॉट आवंटित किए गए और इनमें से अनेक लाभार्थियों ने जमीन पर कब्जा लेकर मकान का निर्माण भी कराया। हालांकि, समय बीतने के साथ सेटलमेंट और राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज विवरणों की गड़बड़ी बड़ी समस्या बन गई।

यह मामला उस समय प्रमुखता से सामने आया, जब आवंटियों ने लीज डीड, संपत्ति हस्तांतरण और लीजहोल्ड जमीन को फ्रीहोल्ड में बदलने जैसी सेवाओं के लिए बीडीए के पास आवेदन जमा किए। आवेदनों की जांच के दौरान अधिकारियों ने पाया कि कई प्लॉटों का वास्तविक क्षेत्रफल और राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज क्षेत्रफल एक-दूसरे से मेल नहीं खा रहा है। कुछ मामलों में प्लॉट नंबर, सीमा या माप से संबंधित विवरणों में भी अंतर होने की बात सामने आई।

महत्वपूर्ण बात यह है कि जमीन पर अधिकांश प्लॉट सही स्थान पर मौजूद हैं और उनकी पहचान भी की जा सकती है। आवंटियों के पास आवंटन से जुड़े दस्तावेज उपलब्ध होने के बावजूद रिकॉर्ड में अंतर के कारण उनके आवेदनों पर अंतिम निर्णय नहीं हो पा रहा था। दस्तावेजों में दर्ज क्षेत्रफल और वास्तविक कब्जे वाली भूमि के माप में अंतर होने से अधिकारी लीज डीड संबंधी प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ा पा रहे थे।

रिकॉर्ड की इन गड़बड़ियों के कारण लाभार्थियों को वर्षों तक अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़े। कई लोगों ने प्राधिकरण के सामने आवेदन और पुराने दस्तावेज जमा किए, लेकिन तकनीकी विसंगतियों की वजह से उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हो सका। संपत्ति से जुड़ा रिकॉर्ड स्पष्ट नहीं होने के कारण आवंटियों को बैंक ऋण, संपत्ति हस्तांतरण और भवन संबंधी स्वीकृतियों में भी परेशानी होने की संभावना बनी रही।

सबसे अधिक समस्या उन आवंटियों को हुई जो अपनी लीजहोल्ड संपत्ति को फ्रीहोल्ड में बदलना चाहते थे। फ्रीहोल्ड प्रक्रिया के लिए जमीन का सही क्षेत्रफल, सीमा, स्वामित्व और राजस्व रिकॉर्ड स्पष्ट होना जरूरी है। दस्तावेजों में मामूली अंतर होने पर भी आवेदन लंबित हो सकता है। इसी कारण वास्तविक आवंटी सभी शर्तें पूरी करने के बावजूद संपत्ति पर पूर्ण स्वामित्व से जुड़ी प्रक्रिया पूरी नहीं कर पा रहे थे।

अब बीडीए ने संबंधित राजस्व अधिकारियों और अन्य विभागों के साथ मिलकर विसंगतियों को दूर करने की पहल की है। उपलब्ध आवंटन रिकॉर्ड, पुराने नक्शे, सेटलमेंट दस्तावेज और जमीन की वास्तविक स्थिति का मिलान किया जाएगा। जरूरत पड़ने पर प्लॉटों का दोबारा माप और भौतिक सत्यापन भी कराया जा सकता है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि रिकॉर्ड में सुधार का लाभ केवल वास्तविक और वैध आवंटियों को मिले।

प्राधिकरण के इस कदम से उन लोगों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है जिनके आवेदन रिकॉर्ड की गड़बड़ी के कारण लंबे समय से लंबित हैं। रिकॉर्ड ठीक होने के बाद लीज डीड से संबंधित सेवाएं, नामांतरण, संपत्ति हस्तांतरण और फ्रीहोल्ड परिवर्तन जैसे मामलों को आगे बढ़ाया जा सकेगा। इससे लाभार्थियों को अपनी संपत्ति से जुड़े अधिकारों का उपयोग करने में आसानी होगी।

बीडीए के सामने इस प्रक्रिया को पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से पूरा करने की चुनौती भी होगी। वर्ष 1991 की योजना से जुड़े दस्तावेज काफी पुराने हैं। बीते वर्षों में कुछ संपत्तियों का हस्तांतरण, उत्तराधिकार या उपयोग में बदलाव भी हुआ हो सकता है। ऐसी स्थिति में प्रत्येक मामले के दस्तावेजों की सावधानीपूर्वक जांच जरूरी होगी। किसी भी गलत दावे या दोहरे आवंटन की संभावना को रोकने के लिए सत्यापन की मजबूत व्यवस्था आवश्यक है।

लाभार्थियों से अपेक्षा की जा रही है कि वे आवंटन पत्र, कब्जा प्रमाणपत्र, लीज संबंधी दस्तावेज, भुगतान की रसीद, पहचान पत्र और अन्य जरूरी रिकॉर्ड उपलब्ध कराएं। पुराने दस्तावेज उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में बीडीए के मूल रिकॉर्ड और राजस्व अभिलेखों की सहायता ली जा सकती है। जमीन पर वास्तविक स्थिति की पुष्टि के लिए संयुक्त निरीक्षण भी इस प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकता है।

यह पहल शहरी विकास योजनाओं में रिकॉर्ड के डिजिटलीकरण और नियमित अद्यतन की जरूरत को भी सामने लाती है। पुराने कागजी रिकॉर्ड में माप, प्लॉट नंबर या स्वामित्व से संबंधित छोटी गलती भविष्य में बड़ा विवाद पैदा कर सकती है। यदि आवंटन से लेकर लीज और फ्रीहोल्ड परिवर्तन तक सभी विवरण डिजिटल प्रणाली में एकीकृत किए जाएं तो नागरिकों को सेवाएं देने में समय कम लगेगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि बीडीए और राजस्व विभाग के रिकॉर्ड का आपस में तालमेल होना बेहद जरूरी है। विकास प्राधिकरण की ओर से किए गए आवंटन और राजस्व अभिलेखों में दर्ज जमीन के विवरण अलग-अलग होने पर संपत्ति संबंधी सेवाएं प्रभावित होती हैं। दोनों विभागों के संयुक्त प्रयास से रिकॉर्ड में एकरूपता लाई जा सकती है और भविष्य में इसी तरह की समस्याओं को रोका जा सकता है।

लाभार्थियों ने प्राधिकरण की पहल का स्वागत करते हुए उम्मीद जताई है कि प्रक्रिया केवल दस्तावेजों और बैठकों तक सीमित नहीं रहेगी। उनका कहना है कि विसंगतियों को दूर करने के लिए एक स्पष्ट समयसीमा तय की जानी चाहिए। आवेदकों को अपने मामलों की स्थिति जानने के लिए ऑनलाइन सुविधा या विशेष सहायता केंद्र उपलब्ध कराया जाए तो बार-बार कार्यालय जाने की आवश्यकता कम होगी।

रिकॉर्ड में सुधार होने से संपत्तियों की कानूनी स्थिति स्पष्ट होगी और इलाके में निर्माण तथा विकास संबंधी गतिविधियों को भी गति मिल सकती है। मकान मालिक अपनी संपत्ति बेचने, हस्तांतरित करने या उसके आधार पर बैंक से ऋण लेने में सक्षम होंगे। फ्रीहोल्ड अधिकार मिलने के बाद उन्हें संपत्ति के उपयोग और उत्तराधिकार संबंधी मामलों में अधिक सुविधा प्राप्त होगी।

बीडीए की यह पहल तीन दशक से अधिक समय से परेशान आवंटियों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अब लाभार्थियों की नजर इस बात पर है कि रिकॉर्ड सुधार की प्रक्रिया कितनी तेजी और पारदर्शिता से पूरी होती है। यदि सभी विभाग समन्वित तरीके से काम करते हैं तो के-7 कलिंगा नगर प्लॉटेड स्कीम के वास्तविक आवंटियों की पुरानी समस्या का स्थायी समाधान संभव हो सकेगा।

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