
नबरंगपुर। ओडिशा के नबरंगपुर जिले के कोसागुमुडा ब्लॉक में लगातार हो रही बारिश के कारण हालात बिगड़ते जा रहे हैं। बारिश के चलते इंद्रावती और भास्कर नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ गया है। नदी का पानी बढ़ने से किनारे बसे दो गांवों का संपर्क आसपास के इलाकों से टूट गया है। कांटाशरगुडा और घाटवालीगुडा गांवों में करीब 1,500 लोगों के प्रभावित होने की सूचना है। ग्रामीणों के अनुसार, बढ़ते जलस्तर के कारण दोनों गांवों के लोग बाहरी दुनिया से लगभग कट गए हैं और उन्हें जरूरी सामान तथा आवागमन को लेकर परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
बताया जा रहा है कि रविवार रात इंद्रावती नदी के जलस्तर में अचानक तेज वृद्धि हुई। इसके बाद नदी के आसपास के क्षेत्रों में पानी का दबाव बढ़ गया और कांटाशरगुडा तथा घाटवालीगुडा के संपर्क मार्ग प्रभावित हो गए। ग्रामीणों का कहना है कि पानी बढ़ने के बाद गांवों से बाहर निकलना मुश्किल हो गया है।
दो गांवों का संपर्क टूटा
इंद्रावती नदी का जलस्तर बढ़ने से दोनों गांवों को जोड़ने वाले रास्ते प्रभावित हुए हैं। कई जगह पानी भर जाने के कारण लोगों की आवाजाही बाधित हो गई है। ग्रामीणों को रोजमर्रा की जरूरतों के लिए भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, भारी बारिश के दौरान इंद्रावती नदी के उफान पर आने से हर साल ऐसी स्थिति पैदा होती है। नदी का जलस्तर बढ़ने पर कांटाशरगुडा और घाटवालीगुडा गांव कुछ समय के लिए आसपास के क्षेत्रों से कट जाते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि इस समस्या का स्थायी समाधान अब तक नहीं हो सका है।
दोनों गांवों में बड़ी संख्या में परिवार रहते हैं। संपर्क मार्ग बंद होने से बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। यदि जलस्तर और बढ़ता है तो स्थिति और गंभीर होने की आशंका है।
प्रशासनिक मदद का इंतजार
ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि स्थिति गंभीर होने के बावजूद अब तक कोई प्रशासनिक अधिकारी प्रभावित गांवों तक नहीं पहुंचा है। लोगों का कहना है कि नदी का पानी लगातार बढ़ रहा है और उन्हें यह चिंता सता रही है कि अगर जलस्तर जल्द कम नहीं हुआ तो हालात और बिगड़ सकते हैं।
ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लेने और आवश्यक राहत व्यवस्था उपलब्ध कराने की मांग की है। लोगों का कहना है कि प्रभावित क्षेत्रों में राहत सामग्री, दवाइयों और अन्य जरूरी सामान की जरूरत पड़ सकती है।
यदि संपर्क मार्ग लंबे समय तक बंद रहता है तो ग्रामीणों के सामने भोजन, पेयजल और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी खड़ी हो सकती हैं। ऐसे में प्रशासन की ओर से समय रहते वैकल्पिक व्यवस्था करना जरूरी होगा।
फसलों पर मंडरा रहा संकट
बढ़ते जलस्तर के बीच ग्रामीणों की सबसे बड़ी चिंता उनकी फसलों को लेकर है। नदी के पानी का फैलाव खेतों तक पहुंचने पर खरीफ फसलों को नुकसान होने की आशंका है। स्थानीय परिवारों की आय का बड़ा हिस्सा कृषि पर निर्भर है। ऐसे में फसल खराब होने का सीधा असर उनकी आर्थिक स्थिति पर पड़ सकता है।
ग्रामीणों का कहना है कि हर साल भारी बारिश और नदी में बाढ़ जैसी स्थिति के दौरान उन्हें फसल नुकसान का सामना करना पड़ता है। पानी लंबे समय तक खेतों में जमा रहने से फसलों के सड़ने और उत्पादन प्रभावित होने का खतरा रहता है।
किसानों के लिए यह स्थिति इसलिए भी चिंता का विषय है क्योंकि फसल में लगाया गया पैसा और मेहनत दोनों पानी में बह सकते हैं। यदि बड़े स्तर पर फसलें खराब होती हैं तो स्थानीय परिवारों के सामने अगले सीजन की खेती के लिए आर्थिक संसाधन जुटाने की चुनौती भी खड़ी हो सकती है।
हर साल दोहराती है समस्या
ग्रामीणों के मुताबिक इंद्रावती नदी के उफान पर आने के बाद दोनों गांवों का संपर्क टूटना कोई नई समस्या नहीं है। मानसून के दौरान जब बारिश तेज होती है और नदी का जलस्तर बढ़ता है, तब कांटाशरगुडा और घाटवालीगुडा के लोगों को इसी तरह की परेशानी का सामना करना पड़ता है।
हर साल समस्या सामने आने के बावजूद स्थायी समाधान नहीं होने से ग्रामीणों में नाराजगी है। लोगों का कहना है कि प्रशासन को केवल बाढ़ के समय राहत देने के बजाय ऐसी व्यवस्था तैयार करनी चाहिए जिससे जलस्तर बढ़ने के दौरान गांवों का संपर्क पूरी तरह न टूटे।
स्थायी सड़क, पुल या बेहतर जलनिकासी व्यवस्था जैसे उपायों पर काम होने से भविष्य में ऐसी स्थिति में लोगों को राहत मिल सकती है। हालांकि फिलहाल ग्रामीणों की प्राथमिकता बढ़ते पानी के बीच सुरक्षित रहना और जरूरी सुविधाएं हासिल करना है।
स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर भी चिंता
गांवों का संपर्क टूटने की स्थिति में स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच भी प्रभावित हो सकती है। यदि किसी व्यक्ति की तबीयत अचानक खराब होती है या गर्भवती महिला, बुजुर्ग अथवा बच्चे को तत्काल चिकित्सा की जरूरत पड़ती है, तो उन्हें गांव से बाहर ले जाना मुश्किल हो सकता है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से अपील की है कि स्थिति को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग की टीम और जरूरी दवाओं की व्यवस्था की जाए। साथ ही आपात स्थिति में लोगों को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने के लिए नाव या अन्य वैकल्पिक साधनों की व्यवस्था करने की मांग भी उठ रही है।
जलस्तर पर नजर जरूरी
फिलहाल दोनों नदियों के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए ग्रामीणों में चिंता बनी हुई है। लगातार बारिश जारी रहने की स्थिति में नदी का पानी और बढ़ सकता है। ऐसे में प्रभावित गांवों में प्रशासन की निगरानी और राहत व्यवस्था बेहद जरूरी हो जाती है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि जल्द बारिश थमती है और जलस्तर नीचे आता है तो स्थिति सामान्य हो सकती है। लेकिन यदि बारिश का दौर जारी रहा तो फसल, आवागमन और जनजीवन पर इसका व्यापक असर पड़ सकता है।
कांटाशरगुडा और घाटवालीगुडा में करीब 1,500 लोगों के प्रभावित होने की सूचना के बीच अब ग्रामीण प्रशासनिक सहायता का इंतजार कर रहे हैं। लगातार बारिश से बढ़ते इंद्रावती और भास्कर नदी के जलस्तर ने एक बार फिर हर साल सामने आने वाली बाढ़ की समस्या को उजागर कर दिया है। ग्रामीणों की मांग है कि तत्काल राहत के साथ-साथ भविष्य में इस समस्या का स्थायी समाधान भी सुनिश्चित किया जाए, ताकि हर मानसून में उन्हें अपने गांव और फसलों के कट जाने का डर न झेलना पड़े।





