ओडिशा

वेस्ट एशिया संकट के बीच EV की ओर बढ़ता भारत, 2030 तक 1 लाख करोड़ की बचत की संभावना

Kavita2
2 July 2026 11:39 AM IST
वेस्ट एशिया संकट के बीच EV की ओर बढ़ता भारत, 2030 तक 1 लाख करोड़ की बचत की संभावना
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Odisha ओडिशा: वेस्ट एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव का असर अब भारत में लोगों की यात्रा और परिवहन विकल्पों पर भी दिखने लगा है। बदलती परिस्थितियों के बीच भारतीय उपभोक्ता तेजी से इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की ओर रुख कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि EV अपनाने की यह बढ़ती प्रवृत्ति आने वाले वर्षों में देश की अर्थव्यवस्था पर बड़ा प्रभाव डाल सकती है और 2030 तक इससे लगभग 1 लाख करोड़ रुपये तक के आयात बिल में बचत संभव है।

रिपोर्ट के अनुसार, 28 फरवरी को पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने के बाद भारत में EV रजिस्ट्रेशन में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वर्ष 2025 में जहां औसतन 1.3 लाख EV रजिस्ट्रेशन हो रहे थे, वहीं मार्च से जून के बीच यह आंकड़ा बढ़कर औसतन 2.3 लाख तक पहुंच गया। यह वृद्धि सामान्य औसत से लगभग 1 लाख अधिक बताई जा रही है।

विश्लेषकों का कहना है कि मौजूदा रुझान को देखते हुए वर्ष 2026 में कुल EV रजिस्ट्रेशन 25 लाख का आंकड़ा पार कर सकते हैं। यह भारत में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के तेजी से विस्तार को दर्शाता है, जो ऊर्जा सुरक्षा और ईंधन आयात पर निर्भरता कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि भारत में कुल वाहन रजिस्ट्रेशन में प्योर EV की हिस्सेदारी लगातार बढ़ रही है। वर्ष 2024 में यह हिस्सेदारी 2 प्रतिशत से भी कम थी, जो 2026 तक बढ़कर 8 प्रतिशत से अधिक हो गई है। कुछ राज्यों में यह आंकड़ा 10 प्रतिशत से भी ऊपर पहुंच चुका है, जो EV अपनाने की बढ़ती स्वीकार्यता को दर्शाता है।

देश में चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर भी धीरे-धीरे मजबूत हो रहा है। मौजूदा समय में भारत में 29,151 सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन मौजूद हैं। इनमें से लगभग 35 प्रतिशत चार्जिंग स्टेशन अकेले कर्नाटक और महाराष्ट्र में स्थित हैं, जो EV उपयोग के प्रमुख केंद्र बनकर उभर रहे हैं।

दिल्ली सरकार ने भी इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देने के लिए नई EV नीति के तहत अगले चार वर्षों में 32,000 नए चार्जिंग पॉइंट स्थापित करने की योजना बनाई है। इस कदम से राजधानी में EV उपयोग को और गति मिलने की उम्मीद है।

विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक ऊर्जा संकट और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच EV की ओर यह बदलाव भारत की ऊर्जा रणनीति को मजबूत कर रहा है। इससे न केवल प्रदूषण में कमी आएगी, बल्कि लंबी अवधि में आर्थिक लाभ भी मिलेगा।

सरकारी और निजी क्षेत्र दोनों ही EV इकोसिस्टम को मजबूत करने में लगे हुए हैं। वाहन निर्माता कंपनियां नई तकनीक और बैटरी क्षमता पर काम कर रही हैं, जबकि सरकार चार्जिंग नेटवर्क और सब्सिडी नीतियों के जरिए इसे बढ़ावा दे रही है।

कुल मिलाकर, वेस्ट एशिया संकट के बीच भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर बढ़ता रुझान एक बड़े बदलाव का संकेत है, जो आने वाले वर्षों में देश की ऊर्जा खपत, परिवहन प्रणाली और आर्थिक संरचना पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकता है।

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