
भुवनेश्वर। बंगाल की खाड़ी में बने गहरे दबाव यानी डीप डिप्रेशन के कारण ओडिशा के कई हिस्सों में भारी बारिश के बीच मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने बुधवार को स्थिति की समीक्षा की। मुख्यमंत्री ने प्रशासन और सभी संबंधित विभागों को उच्च स्तर की तैयारी बनाए रखने और लोगों के जीवन तथा संपत्ति की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का निर्देश दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के दौरान राज्य सरकार की नीति 'शून्य जनहानि' की होनी चाहिए।
मुख्यमंत्री ने भुवनेश्वर स्थित लोक सेवा भवन में उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। इसमें राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री सुरेश पुजारी, मुख्य सचिव, मुख्यमंत्री के अतिरिक्त मुख्य सचिव और विशेष राहत आयुक्त (SRC) सहित वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। बैठक में डीप डिप्रेशन के कारण पैदा हुई मौजूदा स्थिति, बारिश के संभावित असर और आपदा से निपटने के लिए की गई तैयारियों पर विस्तार से चर्चा की गई।
SRC ने मुख्यमंत्री को दी हालात की जानकारी
बैठक के दौरान विशेष राहत आयुक्त राजेश प्रभाकर पाटिल ने मुख्यमंत्री को डीप डिप्रेशन की स्थिति और इसके कारण होने वाली संभावित बारिश के बारे में जानकारी दी। उन्होंने राज्य सरकार की ओर से संवेदनशील क्षेत्रों में किए गए इंतजाम और अलग-अलग विभागों की तैयारियों का विवरण भी मुख्यमंत्री के सामने रखा।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि मौसम की स्थिति पर लगातार नजर रखी जाए और जरूरत पड़ने पर तत्काल कदम उठाए जाएं। जिला प्रशासन और संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय बनाए रखने पर भी जोर दिया गया, ताकि किसी आपात स्थिति में राहत एवं बचाव कार्य बिना देरी शुरू किया जा सके।
'शून्य जनहानि' पर मुख्यमंत्री का जोर
मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने बैठक में कहा कि प्राकृतिक आपदाओं के दौरान राज्य सरकार का मुख्य लक्ष्य जनहानि को रोकना होना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी जरूरी एहतियाती कदम उठाने के निर्देश दिए। ओडिशा सरकार पहले भी अपनी राज्य स्तरीय प्राकृतिक आपदा समिति की बैठक में 'जीरो कैजुअल्टी' को आपदा प्रबंधन की प्रमुख नीति बता चुकी है।
मुख्यमंत्री ने संबंधित विभागों को जिला प्रशासन के साथ मिलकर काम करने के निर्देश दिए। खासतौर पर संवेदनशील और निचले इलाकों पर नजर रखने, जरूरत पड़ने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने और राहत सामग्री उपलब्ध रखने पर जोर दिया गया।
दक्षिण ओडिशा में भारी बारिश
डीप डिप्रेशन के प्रभाव से दक्षिण और तटीय ओडिशा के कई जिलों में भारी बारिश हुई है। मंगलवार को कोरापुट, गंजाम, गजपति, नबरंगपुर, अंगुल, ढेंकानाल, कटक, केंद्रपाड़ा, खुर्दा, पुरी, जाजपुर और जगतसिंहपुर समेत कई जिलों में बारिश दर्ज की गई। भुवनेश्वर और कटक के कुछ हिस्सों में तेज बारिश के बाद जलभराव की स्थिति भी बनी।
कोरापुट में मंगलवार शाम तक 82 मिलीमीटर से अधिक बारिश दर्ज की गई, जबकि पारलाखेमुंडी में 58 मिलीमीटर बारिश हुई। दक्षिण ओडिशा के कुछ इलाकों में तेज हवा के कारण पेड़ गिरने से सड़क यातायात भी प्रभावित हुआ।
11 जिलों को रखा गया हाई अलर्ट पर
मौसम प्रणाली के असर को देखते हुए ओडिशा के 11 जिलों में प्रशासन को हाई अलर्ट पर रखा गया है। संवेदनशील क्षेत्रों में आपदा प्रतिक्रिया टीमों और जरूरी उपकरणों को पहले से तैनात किया गया है। स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों को भी प्रभावित इलाकों में एहतियातन बंद रखने के कदम उठाए गए हैं।
राज्य सरकार ने पहले ही जिला कलेक्टरों को राहत शिविर तैयार रखने और आवश्यकता पड़ने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की तैयारी रखने को कहा था। जल संसाधन विभाग को भी भारी बारिश की आशंका को देखते हुए प्रमुख जलाशयों के जलस्तर पर नजर रखने के निर्देश दिए गए थे।
ODRAF की 33 टीमें तैनात
भारी बारिश और डीप डिप्रेशन से पैदा होने वाली संभावित आपात स्थिति से निपटने के लिए राज्य सरकार ने संवेदनशील जिलों में ओडिशा डिजास्टर रैपिड एक्शन फोर्स (ODRAF) की 33 टीमों को तैनात किया है। इन टीमों को जरूरत पड़ने पर राहत एवं बचाव कार्य में लगाया जाएगा।
सरकार ने जिला प्रशासन को स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार तुरंत निर्णय लेने और संवेदनशील इलाकों की लगातार निगरानी करने को कहा है। तटीय और दक्षिणी जिलों में बारिश के साथ तेज हवाओं की आशंका को देखते हुए प्रशासन को विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं।
ओडिशा-आंध्र तट की ओर बढ़ा डीप डिप्रेशन
भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार बुधवार सुबह डीप डिप्रेशन पश्चिम-मध्य और उससे सटे उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी के ऊपर मौजूद था और पश्चिम की ओर बढ़ रहा था। सुबह 5:30 बजे यह आंध्र प्रदेश के कलिंगपट्टनम से करीब 70 किलोमीटर पूर्व-दक्षिणपूर्व और ओडिशा के गोपालपुर से करीब 150 किलोमीटर दक्षिण में केंद्रित था।
मौसम प्रणाली के प्रभाव से ओडिशा और आंध्र प्रदेश के तटीय हिस्सों में भारी बारिश और तेज हवाओं की स्थिति बनी हुई है। इसे देखते हुए प्रशासन ने लोगों से मौसम संबंधी आधिकारिक चेतावनियों का पालन करने और जोखिम वाले इलाकों में अनावश्यक आवाजाही से बचने की अपील की है।
जिला प्रशासन के साथ समन्वय के निर्देश
मुख्यमंत्री ने बैठक में साफ किया कि किसी भी आपदा की स्थिति में विभागों के बीच बेहतर समन्वय सबसे महत्वपूर्ण है। उन्होंने अधिकारियों से जिला प्रशासन के संपर्क में रहने और राहत एवं बचाव संसाधनों को तैयार रखने को कहा।
मुख्यमंत्री ने जान-माल की सुरक्षा को पहली प्राथमिकता देते हुए प्रभावित इलाकों की लगातार निगरानी के निर्देश दिए हैं। सरकार का जोर इस बात पर है कि भारी बारिश, जलभराव या अन्य आपात स्थिति पैदा होने पर स्थानीय प्रशासन तुरंत कार्रवाई करे और जरूरत पड़ने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जाए।
फिलहाल राज्य सरकार डीप डिप्रेशन की गतिविधियों और इसके कारण हो रही बारिश पर लगातार नजर रख रही है। मुख्यमंत्री की समीक्षा बैठक के बाद सभी संबंधित विभागों को अधिकतम सतर्कता बनाए रखने और 'शून्य जनहानि' के लक्ष्य के साथ काम करने का निर्देश दिया गया है।





