ओडिशा

चक्रवात अर्नब का जगन्नाथ मंदिर पर असर तेज हवाओं से फटा पवित्र पतितपावन ध्वज,

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28 Oct 2026 5:35 PM IST
चक्रवात अर्नब का जगन्नाथ मंदिर पर असर तेज हवाओं से फटा पवित्र पतितपावन ध्वज,
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पुरी। ओडिशा में चक्रवाती तूफान 'अर्नब' का असर अब विश्वप्रसिद्ध श्री जगन्नाथ मंदिर पर भी देखने को मिल रहा है। बुधवार, 28 अक्टूबर 2026 को पुरी में भारी बारिश और तेज हवाओं के बीच मंदिर के शिखर पर लगे पवित्र 'पतितपावन बाना' को लेकर एक असामान्य घटना सामने आई। प्राप्त जानकारी के अनुसार, तेज हवाओं से मंदिर के शिखर पर लहरा रहे पवित्र ध्वज का एक हिस्सा फट गया और उसमें अपने आप एक गांठ जैसी आकृति बन गई, जिसे स्थानीय धार्मिक परंपरा में 'शून्य ग्रंथि' कहा जाता है। इसके अलावा मंदिर के नीलचक्र पर श्रद्धालुओं द्वारा बांधे गए सैकड़ों छोटे ध्वज भी तेज हवाओं के कारण टूटकर नीचे गिर गए। इस घटना ने श्रद्धालुओं का ध्यान अपनी ओर खींचा है।

तेज हवाओं से पतितपावन ध्वज को पहुंचा नुकसान

जानकारी के मुताबिक, चक्रवात अर्नब के प्रभाव से बुधवार सुबह से ही पुरी में तेज हवाओं के साथ लगातार बारिश हो रही थी। समुद्र के किनारे बसे इस धार्मिक शहर में मौसम का मिजाज अचानक बदलने से जनजीवन प्रभावित हुआ।

इसी दौरान श्री जगन्नाथ मंदिर के ऊंचे शिखर पर स्थापित पवित्र पतितपावन बाना तेज हवाओं की चपेट में आ गया। हवा का दबाव बढ़ने से ध्वज का एक हिस्सा फट गया।

बताया जा रहा है कि फटे हुए ध्वज का कपड़ा हवा के प्रभाव से इस तरह मुड़ गया कि उसमें गांठ जैसी आकृति बन गई। इसे 'शून्य ग्रंथि' कहा जा रहा है।

हालांकि, इस विशेष घटना की मंदिर प्रशासन की ओर से स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं हो सकी है।

क्या है शून्य ग्रंथि, जिसे देखकर आकर्षित हुए श्रद्धालु?

श्री जगन्नाथ मंदिर की धार्मिक परंपराओं में पतितपावन बाना का विशेष महत्व है। मंदिर के शिखर पर लहराने वाले इस पवित्र ध्वज को श्रद्धालु भगवान जगन्नाथ से जुड़ी आस्था का प्रतीक मानते हैं।

'शून्य ग्रंथि' शब्द का इस्तेमाल ध्वज में अपने आप बनने वाली गांठ जैसी स्थिति के लिए किया जा रहा है।

इस घटना के बाद श्रद्धालुओं के बीच इसे लेकर चर्चा शुरू हो गई है। कुछ लोग इसे धार्मिक दृष्टि से विशेष मान रहे हैं, जबकि तेज हवाओं के कारण कपड़े के मुड़ने और उलझने से भी ऐसी आकृति बन सकती है।

धार्मिक मान्यताओं का सम्मान करते हुए यह समझना आवश्यक है कि ध्वज में गांठ बनने को किसी भविष्य की घटना या अनिष्ट का प्रमाण नहीं माना जा सकता।

नीलचक्र पर बंधे सैकड़ों छोटे झंडे भी टूटे

चक्रवाती हवाओं का असर मंदिर के शिखर पर स्थित प्रसिद्ध नीलचक्र पर भी पड़ा।

प्राप्त विवरण के अनुसार, नीलचक्र से जुड़े सैकड़ों छोटे ध्वज तेज हवाओं के दबाव से टूट गए और मंदिर के ऊपरी गोलाकार हिस्से पर आ गिरे।

इन छोटे ध्वजों को श्रद्धालु अपनी आस्था, मनोकामना और धार्मिक परंपरा से जोड़कर देखते हैं।

मंदिर के शिखर पर स्थित नीलचक्र भगवान जगन्नाथ की धार्मिक परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसके आसपास लगे ध्वजों का तेज हवाओं के दौरान प्रभावित होना श्रद्धालुओं के लिए चिंता का विषय बन गया।

दधिनाउति पर गिरे फटे हुए ध्वज

बताया जा रहा है कि नीलचक्र से टूटे हुए कई छोटे झंडे मंदिर के शिखर के ऊपरी गोलाकार हिस्से पर जाकर अटक गए।

इस हिस्से को स्थानीय परंपरा में 'दधिनाउति' कहा जाता है। यह मंदिर की विशिष्ट स्थापत्य संरचना का महत्वपूर्ण भाग है।

तेज हवाओं के बीच छोटे झंडों का टूटकर वहां गिरना बताता है कि चक्रवात का असर मंदिर की ऊंचाई तक महसूस किया गया।

फिलहाल नीलचक्र या दधिनाउति की मूल संरचना को किसी प्रकार की क्षति पहुंचने की पुष्टि नहीं हुई है।

हर दिन बदला जाता है मंदिर का पवित्र ध्वज

पुरी स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर की सबसे प्रसिद्ध धार्मिक परंपराओं में से एक मंदिर के शिखर पर ध्वज बदलने की परंपरा है।

मंदिर के सेवायत नियमित रूप से शिखर पर चढ़कर पवित्र ध्वज बदलते हैं। यह कार्य विशेष रूप से प्रशिक्षित चुनरा सेवायतों द्वारा किया जाता है।

मंदिर के शिखर पर स्थित नीलचक्र लगभग 214 फीट की ऊंचाई पर है। इतनी ऊंचाई पर तेज हवाओं के बीच ध्वज बदलना अत्यंत चुनौतीपूर्ण कार्य माना जाता है।

मई 2026 में भी एक तेज आंधी के दौरान मंदिर का पतितपावन ध्वज फट गया था। हालांकि, उस समय मंदिर की दैनिक पूजा और धार्मिक अनुष्ठान सामान्य रूप से जारी रहे थे।

चक्रवात अर्नब से पुरी में भारी बारिश, सड़कों पर जलभराव

चक्रवात अर्नब के चलते पुरी शहर में मंगलवार से ही भारी बारिश और तेज हवाओं का सिलसिला शुरू हो गया था।

बारिश के कारण शहर की कई प्रमुख सड़कों पर पानी भर गया। मंदिर के आसपास के इलाकों में भी जलभराव की स्थिति देखने को मिली।

मरीन ड्राइव और ग्रैंड रोड के कुछ हिस्सों में पानी जमा होने से पर्यटकों और श्रद्धालुओं को आवागमन में परेशानी हुई।

रिपोर्टों के मुताबिक, शहर के कुछ हिस्सों में करीब दो फीट तक पानी भर गया था। तेज हवाओं की रफ्तार भी समय-समय पर 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच रही थी।

खराब मौसम के कारण बाजारों में भी गतिविधियां प्रभावित हुईं और कई दुकानें बंद रहीं।

समुद्र तट पर बढ़ाई गई सतर्कता

चक्रवात के प्रभाव को देखते हुए पुरी के समुद्र तट पर भी सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई है।

समुद्र में ऊंची लहरें और तेज हवाएं चलने के कारण प्रशासन ने संवेदनशील स्थानों पर लाल झंडे लगाए हैं।

पर्यटकों को समुद्र में स्नान करने से रोकने के लिए एहतियाती कदम उठाए गए हैं। सुरक्षा कर्मियों द्वारा लोगों को समुद्र से दूर रहने की सलाह दी जा रही है।

इसके अलावा चिलिका झील में भी चक्रवात के खतरे को देखते हुए 26 से 29 अक्टूबर तक नौका संचालन पर रोक लगाई गई है।

मौसम खराब होने से श्रद्धालुओं को परेशानी

पुरी का श्री जगन्नाथ मंदिर देश के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है। यहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं।

लेकिन चक्रवात अर्नब के कारण लगातार बारिश और जलभराव से मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

बुधवार को सामने आए दृश्यों में मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में भारी बारिश का असर दिखाई दिया। खराब मौसम के कारण सामान्य दिनों की तुलना में श्रद्धालुओं की आवाजाही भी कम नजर आई।

पवित्र ध्वज की घटना के बाद सुरक्षा पर विशेष ध्यान जरूरी

पतितपावन बाना में गांठ बनने और छोटे ध्वजों के टूटने की सूचना के बाद मंदिर के ऊंचे शिखर पर मौसम के प्रभाव को लेकर चर्चा बढ़ गई है।

ऐसे हालात में ध्वज बदलने वाले सेवायतों की सुरक्षा अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है। तेज हवाओं, भारी बारिश और फिसलन के दौरान ऊंचाई पर चढ़ना जोखिम भरा हो सकता है।

श्री जगन्नाथ मंदिर करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। इसलिए धार्मिक परंपराओं के साथ सुरक्षा व्यवस्थाओं का ध्यान रखना भी आवश्यक है।

फिलहाल चक्रवात के कारण पुरी में खराब मौसम बना हुआ है। श्रद्धालुओं और पर्यटकों को स्थानीय प्रशासन की चेतावनियों का पालन करने तथा मौसम सामान्य होने तक अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी जा रही है।

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